कटिहार की दलन पूरब पंचायत में नाला निर्माण न होने से स्थिति बदहाल, अधिकांश वार्ड नालाविहीन, मुखिया पर भेदभाव का आरोप

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 30 May 2026 11:35 AM

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बदहाल सड़क बगैर नाला के

Purab Panchayat Waterlogging: कटिहार नगर निगम से सटे सदर प्रखंड की दलन पूरब पंचायत में जल निकासी की व्यवस्था भगवान भरोसे है. कुल दस वार्डों वाली इस पंचायत के करीब सात से आठ वार्ड पूरी तरह नालाविहीन हैं, जिससे हल्की बारिश में ही जलजमाव हो जाता है. ग्रामीणों ने मुखिया पर विकास कार्यों में भेदभाव बरतने का गंभीर आरोप लगाया है.

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कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट

Purab Panchayat Waterlogging: कटिहार जिला मुख्यालय के नगर निगम क्षेत्र से बिल्कुल सटीक दूरी पर स्थित सदर प्रखंड की दलन पूरब पंचायत इन दिनों विकास की दौड़ में पिछड़ती नजर आ रही है. कुल दस वार्डों और 17 हजार से अधिक की विशाल आबादी वाली इस पंचायत में जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम) की समस्या एक नासूर बन चुकी है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विशेषकर मुखिया और सरपंच की कथित उदासीनता का आलम यह है कि लगातार दस वर्षों से एक ही व्यक्ति के मुखिया पद पर रहने के बावजूद पंचायत का एक बड़ा हिस्सा आज भी नाला विहीन है. इसका नतीजा यह है कि हल्की सी मानसूनी बारिश होते ही पूरी पंचायत जलजमाव की चपेट में आ जाती है और लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो जाता है.

घरों के पीछे पानी जमा करने की मजबूरी, गंभीर बीमारियों का खतरा

जल निकासी की कोई सुदृढ़ व्यवस्था न होने के कारण स्थानीय नागरिकों को एक बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे इलाके में जन-स्वास्थ्य का संकट खड़ा हो गया है:

  • आंगनों में जलजमाव: नाला नहीं होने के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर बहता है. इससे बचने के लिए लोग अपने घरों के आंगन या फिर घर के ठीक पीछे खेतों में गड्ढा बनाकर दूषित पानी को संग्रह करने पर मजबूर हैं.
  • संक्रमण का भय: हफ्तों और महीनों तक एक ही जगह पर गंदा पानी जमा रहने के कारण वह पूरी तरह प्रदूषित और बदबूदार हो जाता है. मच्छरों के पनपने और जलजनित बैक्टीरिया के कारण स्थानीय ग्रामीण, खासकर बच्चे और बुजुर्ग गंभीर संक्रामक बीमारियों के डर से सहमे हुए हैं.

विचित्र स्थिति यह है कि उपसरपंच समेत अन्य वार्ड प्रतिनिधियों को जमीनी हकीकत की पूरी जानकारी तक नहीं है कि उनके क्षेत्र के किस टोले या मोहल्ले में सरकारी नाला बना है और कहां नहीं, जबकि नाला निर्माण के नाम पर प्रतिवर्ष सरकार द्वारा लाखों रुपये की राशि निर्गत की जाती है.

मुखिया के गृह वार्ड में चमचमा रहा नाला, महादलित टोले उपेक्षित

भेदभाव का आरोप: पंचायत के आक्रोशित लोगों का आरोप है कि मुखिया द्वारा विकास कार्यों में चहेते क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है. ग्रामीणों के अनुसार, वार्ड नंबर 09 में वर्तमान मुखिया का स्वयं का निवास स्थान है, इसलिए वहां नियम कानून ताक पर रखकर सुव्यवस्थित नाले का निर्माण कराया गया है. इसके अलावा वार्ड नंबर 08 (बीच टोला) और वार्ड नंबर 10 के कुछ सीमित हिस्सों में ही नाला बनाया गया है.

ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि वार्ड नंबर 03 (कॉलोनी टोला) में सरकारी राशि से नाला तो बनाया गया, लेकिन उसकी सफाई और देखरेख करने वाला कोई नहीं है, जिसके कारण वह कचरे से पूरी तरह जाम है और घरों का गंदा पानी वापस आंगनों में सिमट जाता है.

इन प्रमुख टोलों में अब तक नहीं बना नाला:

पंचायत के अधिकांश महादलित और पिछड़े टोले आज भी बुनियादी ड्रेनेज सिस्टम से वंचित हैं. ग्रामीणों के अनुसार डैकाटा, महलदार टोला, चौधरी टोला, ब्राह्मण टोला, यादव टोला, मंडल टोला, पुराना टोला, कुशवाहा टोला, डाकबाड़ी, रासो टोला, कनवा टोला, पलटन टोला, भागवत टोला, बिस टोला और सिरसा चौक टोला जैसी घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में अब तक नाला निर्माण की एक ईंट भी नहीं रखी गई है. केवल पटरी उस पार के कुछ क्षेत्रों जैसे मोंगरा मस्जिद, सात नंबर और आठ नंबर टोला में ही आंशिक रूप से नाला निर्मित है.

जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण फंसा है पेंच: मुखिया नैमुल हक

जमीन पर उठ रहे इन गंभीर आरोपों और भेदभाव की शिकायतों के संदर्भ में जब दलन पूरब पंचायत के मुखिया नैमुल हक से उनका पक्ष जाना गया, तो उन्होंने अपनी व्यावहारिक लाचारी व्यक्त करते हुए कहा:

  • प्रयास जारी है: मुखिया ने भेदभाव के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे पूरी पंचायत में नाला निर्माण के लिए लगातार प्रयासरत हैं. महादलित टोलों में भी काम कराया गया है, लेकिन मुख्य आउटलेट (निकासी व्यवस्था) न होने से पानी जमा हो जाता है.
  • जमीन की समस्या: उन्होंने बताया कि टोले और मोहल्लों में नाला निर्माण के लिए जब भी योजना बनाई जाती है, तो निजी जमीन आड़े आ जाती है. ग्रामीणों से नाले के रास्ते के लिए जमीन देने की मांग की जाती है, लेकिन लोगों द्वारा आपसी सहमति से जगह उपलब्ध नहीं कराई जाने के कारण कई महत्वपूर्ण वार्डों में नाले का निर्माण कार्य धरातल पर संभव नहीं हो पा रहा है.
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Divyanshu Prashant

लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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