हरिपुर में हिंदू मनाते हैं मुहर्रम, मजार में झरना गीत गाकर पेश करते हैं मिशाल

Updated at : 02 Jul 2025 7:46 PM (IST)
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हरिपुर में हिंदू मनाते हैं मुहर्रम, मजार में झरना गीत गाकर पेश करते हैं मिशाल

हरिपुर में हिंदू मनाते हैं मुहर्रम, मजार में झरना गीत गाकर पेश करते हैं मिशाल

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हसनगंज प्रखंड के जगगरनाथपुर पंचायत स्थित हरिपुर महमदिया गांव में तकरीबन 100 वर्षों से श्रद्धा पूर्वक हिंदू परिवार के लोग पूरी शिद्दत से मुहर्रम का पर्व मनाते हैं. कुछ दिन पूर्व से ही इमामबाड़ा की साफ- सफाई एवं रंग रोगन करते हुए हर लोग पूरी इबादत से मुहर्रम पर्व में अपने-अपने परिवारों के साथ इकट्ठा होकर स्व छेदी साह के मजार इमामबाड़ा में लिसान खड़ा कर चारों ओर केला के पेड़ से सजाते हैं. मुस्लिम रीति रिवाज के साथ फतिहा पढ़ते हुए ढोल नगाड़े बजाते हुए झरनी गीत गाते हैं. यह परंपरा पिछले 100 वर्षों से गांव में कायम है. यहां के हिंदू समाज के परिवार इमाम हुसैन की सदाओं में उनके जयकारे के साथ जुलूस निकालते हैं. इमामबाड़ा के चारों ओर घूम-घूम कर झरनी गीत गाते हैं. स्थानीय शंकर साह, राजू साह, विकास साह, जयप्रकाश साह, शंकर यादव, दीपक कुमार, सुभाष साह, राजेंद्र साह, कजान साह आदि ने कहा कि गांव में करीब तीन पीढ़ी पूर्व से स्व छेदी साह के मजार पर मुहर्रम पर्व के मौके पर मुस्लिम रीति रिवाज से तजिया जुलूस निकाला जाता है. जो हिंदू मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल है. उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने इसकी शुरुआत किया था. उसके बाद से हमलोग निष्ठा पूर्वक मुहर्रम पर्व मनाते आ रहे हैं. जिससे आने वाले पीढ़ी को नया संदेश मिले एवं समाज में सद्भाव श्रद्धा बना रहे. पूर्व प्रमुख मनोज मंडल, पूर्व समिति प्रतिनिधि सदानंद तिर्की, माया देवी, परणी देवी, सुलेखा देवी ने कहा की स्व छेदी साह के मजार पर मुहर्रम के मौके पर पौराणिक परंपरा के साथ लिसान खड़ा कर दूध लावा, मिठाई पान आदि को लेकर पूजा अर्चना किए जाते हैं. साथ ही अपने और अपने पूरे परिवार समेत गांव में सुख शांति समृद्धि बनी रहे इसकी कामना की जाती है. पूजा अर्चना के बाद माथा टेक दुआ मांगते हैं. साथ ही एक दूसरे के बीच प्रसाद का भी वितरण किया जाता है. कहा की इस मजार पर मांगी गई हर मन्नतें लोगों की पूरी होती है. इस दौरान पूर्व प्रमुख मनोज कुमार मंडल, पूर्व वार्ड सदस्य अब्दुल वाहिद आदि ने कहा कि यह मुहर्रम का पर्व आपसी भाईचारा व श्रद्धा का प्रतीक है. इस त्यौहार के माध्यम से आने वाले पीढ़ी को बड़ी संदेश मिलते रहेगी. गांव के लोगों ने इस पर्व पर लाठी खेलते हुए इमाम हुसैन के जयकारे भी लगाते हैं. विधि विधान के साथ स्व छेदी साह के मजार पर निशान खड़ा करते हुए ढोल नगाड़े के साथ त्यौहार मनाते हैं. कहा कि जिस तरह हिन्दू परिवार पूरी सिद्दत से अपना त्यौहार मनाता हैं. उसी आदर और सत्कार से मुहर्रम में भी लिसानदारी भी करता है. यहां का हर बासिन्दा अपने परिवार साथ ताज़िया को सम्मान के साथ रख इबादत करता है. यह परंपरा प्रखंड व जिला के लिए एक बड़ी मिसाल व संदेश है.

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