कमला नदी में पुल नहीं बनने से जान जोखिम में डाल नदी पार कर रहे लोग
Published by : RAJKISHOR K Updated At : 21 May 2026 11:44 PM
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कमला नदी में पुल नहीं बनने से जान जोखिम में डाल नदी पार कर रहे लोग
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नदी पार करने में दर्जनों लोगों की गयी है जान
फलका. आजादी के 78 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी फलका के मोरसंडा कमला घाट में पुल नहीं बन पाया. अभी भी यहां के लोग चचरी पुल के सहारे आवागमन करते हैं, जो निश्चय ही जोखिम भरा है. इन जगहों पर चचरी पुल पर आवागमन करने पर कई जिंदगियां मौत के आगोश में समा चुकी हैं. मोरसंडा पंचायत कामलाघाट मुसहरी व रहटा पंचायत के बांध टोला वासियों के लिए यह कमला घाट मुख्य रास्ता है. जिस कारण प्रत्येक वर्ष किसी न किसी व्यक्ति का पुल और नाव के अभाव के कारण नदी पार करने पर असमय मौत हो जाती है. जबकि स्थानीय आमजन क्षेत्रीय सांसद व विधायक से कई एक बार इस पर पुल निर्माण की गुहार लगा चुकी है. लेकिन अब तक स्थानीय ग्रामीणों को आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला है. सरकारी आंकड़े के मुताबिक करीब दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत चचरी और नाव से नदी पार करने के दौरान हो चुकी है. गौरतलब हो कि मोरसंडा के अधिकतर लोगों की खेती की जमीन उस पार में है. जिससे सैकड़ों किसान मजदूर नदी पार करते है. लिहाजा इस सप्ताह चचरी पुल टूट जाने कारण नदी में नाव के आभाव के कारण लोग जान जोखिम में डाल कर नदी पार कर रहे हैं.कहते हैं मुखिया
मोरसंडा पंचायत के मुखिया अजहरुद्दीन उर्फ राजू नायक ने कहा कि कमला घाट में पुल नहीं होने के कारण लोगों को आवागमन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. बरंडी नदी के कमला घाट पर चचरी पुल और डेंगी नाव से हर साल मासूमों की जान जा रही है. कई बार स्थानीय ग्रामीणों द्वारा क्षेत्रीय विधायक और सांसद से पुल समस्या से निजात की मांग की गई. पर पुल निर्माण को लेकर सांसद या विधायक से सिर्फ आश्वासनों का लॉलीपॉप मिला.कहते हैं ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीण, उप प्रमुख प्रतिनिधि इरसाद आलम, उप मुखिया सेरुदद्दीन, प्रवेश झा उर्फ बंटी, राजू चौधरी, विनय मंडल, शंभू साह, असजद,आलम, उखिया देवी, सीता राम ऋषि, मुलाहय ऋषि, कुंदन ऋषि, जफर, टुनटुन, मनोज मण्डल सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि अब तक पुल के अभाव में दर्जनों लोगों की निर्मम मौत हो चुकी है. हर साल चचरी पुल और डेंगी नाव से लोग मौत के शिकार हो रहे है. पुल निर्माण अति आवश्यक है. चुनाव के समय नेताजी आश्वासन देकर जाते हैं जीतने के बाद वादा भूल जाते हैं. जबकि इस पुल से मोरसंडा और रहटा, भरसिया पंचायत के करीब 20 हजार आबादी प्रभावित है. साथ ही करीब पांच हजार महादलित का आवाजाही का एक मात्र रास्ता चचरी पुल है. फिर भी सरकार ध्यान नहीं दे रही है. लोगों का यह भी कहना है कि देश को आजादी तो मिल गई लेकिन आज भी हमलोगों को लगता है कि मानो गुलामी में जिंदगी जीने को विवश हैं.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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