भैया की कलाई पर सजेगी जूट की रंग-बिरंगी राखियां
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 22 Jul 2024 11:24 PM
प्रशिक्षण प्राप्त किसान बना रहीं जूट की राखी, कृषि विभाग भी कर रहा सहयोग
सरोज कुमार, कटिहार. भाई बहनों के अटूट स्नेह व प्यार का प्रतीक है रक्षा बंधन. इस त्योहार में रेशम की डोर से बनी राखी भाइयों की कलाई पर सजती है. लेकिन इस रक्षाबंधन जूट की रंग-बिरंगी राखियां बाजार में भाई-बहनों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी. पहली बार जूट की राखी तैयार कर जिले के जूट किसान बाजार में उतारने की प्लानिंग कर रहे हैं. उप परियोजना निदेशक एसके झा कहते हैं कि कोलकाता से आयी दो मास्टर ट्रेनर जिले के 40 एससी किसानों को जूट से संबंधित कई तरह के सामान बनाने की कला सिखा रही हैं. इससे पूर्व जिले के 30 किसान कोलकाता जाकर जूट की राखी बनाने की कला में निपुण हो चुके हैं. खासकर महिला किसान जूट की रंग-बिरंगी राखियां बनाकर रक्षा बंधन में बाजार में उतारने को तैयार हैं. सब कुछ ठीक रहा, तो सबसे पहले जिले के डीएम, एसपी, पूर्णिया प्रमंडलीय आयुक्त, मुख्यमंत्री समेत विभागीय मंत्री को जूट की राखी इस बार रक्षा बंधन से पूर्व भेजी जायेगी. एक माह पूर्व कोलकाता आइसीआर गये किसान व वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे किसानों द्वारा जूट की राखी बनायी जा रही है. समय पर अधिक से अधिक जूट की राखी बनकर तैयार हो सके, इसे लेकर कृषि विभाग भी किसानों की मदद को तैयार है. किसान रविशंकर श्रवणे, पंकज कुमार निराला समेत अन्य किसान बताते हैं कि तो जूट की राखी बनाने की विधि सरल है.
सस्ती होगी जूट की राखीप्रशिक्षण प्राप्त किसान पंकज कुमार निराला, रविशंकर श्रवणे व प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला किसानों का कहना है कि जूट की राखी बनाने के लिए जूट की चोटी, जूट का धागा जरूरी है. अधिक ब्लीच किये जाने से इसमें चमक बढ़ जाती है. जरूरत पड़ने पर कोलकाता के वैज्ञानिकों व मास्टर ट्रेनरों के संपर्क में रहकर कार्य को आगे बढ़ाया जायेगा. इसके लिए मैटेरियल कोलकाता से मंगाया जायेगा. राखी बनाने में मोटा पेपर, मोती का प्रयोग किया जायेगा. इसके निर्माण में मेहनत व कुछ राशि का उपयोग कर इसे आकर्षक बनाया जा सकता है. अन्य राखियों के अपेक्षा जूट की राखी अधिक सस्ती होगी.
हाई स्पीड मशीन से होगी सहूलियतउप परियोजना निदेशक एसके झा ने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जूट किसानों को विभाग की ओर से हाईस्पीड मशीन के माध्यम से सहयोग किया जा सकता है. वर्तमान में चार से पांच हाइस्पीड मशीन से जूट से संबंधित कई तरह के सामान बनाने को लेकर 40 एससी किसान प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. प्रशिक्षण ले चुके किसान व प्रशिक्षण ले रहे किसान रक्षा बंधन पर जूट की राखी बनाने की प्लानिंग कर रहे हैं. बाजार में उतारने को लेकर कार्य करना चाहते हैं, तो उन्हें हाइस्पीड मशीन उपयोग करने के लिए छूट दी जा सकती है. इस मद में जरूरत पड़ने वाली मैटेरियल की डिमांड के अनुसार कोलकाता से उपलब्ध करायी जा सकती है.
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