प्रतिबंध के बावजूद कोढ़ा की सड़कों पर दौड़ रही जुगाड़ गाड़ियां, NH-31 पर बढ़ रहा बड़े हादसों का खतरा
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 31 May 2026 3:30 PM
कोढ़ा की सड़कों पर दौड़ रहे जुगाड़ गाड़ियां
Illegal: कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड में सरकारी प्रतिबंध के बाद भी 'जुगाड़ गाड़ियों' (अवैध कस्टमाइज्ड वाहनों) का परिचालन धड़ल्ले से जारी है. बिना किसी सुरक्षा मानक और ब्रेक व्यवस्था के राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31) जैसे व्यस्ततम मार्ग पर दौड़ रहे ये वाहन आए दिन भीषण सड़क दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं.
कटिहार के कोढ़ा से अमीर सोहेल की रिपोर्ट
Illegal: कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय प्रशासन व परिवहन विभाग की सुस्ती के कारण सड़कों पर सुरक्षित सफर करना भगवान भरोसे हो गया है. क्षेत्र में पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद कबाड़ के इंजनों से बनी ‘जुगाड़ गाड़ियों’ का संचालन खुलेआम जारी है. प्रशासनिक मुस्तैदी के बड़े-बड़े दावों के बीच ये अवैध वाहन बिना किसी कागजात और सुरक्षा मानकों के मुख्य सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31) पर रफ्तार भर रहे हैं, जिससे आम राहगीरों और वाहन चालकों की जान हर वक्त जोखिम में बनी रहती है.
न रजिस्ट्रेशन, न सही ब्रेक: मौत का सामान बनीं ये गाड़ियां
सड़कों पर दौड़ रही इन जुगाड़ गाड़ियों की तकनीकी खामियों और उनसे उत्पन्न खतरों का विवरण निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- सुरक्षा मानकों का घोर अभाव: ये जुगाड़ गाड़ियां अमूमन पुराने डीजल इंजनों, सिंचाई पंपों और कबाड़ के लोहे के अस्थायी ढांचों को जोड़कर स्थानीय स्तर पर तैयार की जाती हैं. परिवहन विभाग (RTO) के पास इनका कोई रजिस्ट्रेशन, फिटनेस सर्टिफिकेट या वैध इंश्योरेंस नहीं होता.
- खतरनाक बनावट: अधिकांश वाहनों में न तो भारी लोड संभालने के लिए उचित हाइड्रोलिक ब्रेक की व्यवस्था होती है और न ही रात में चलने के लिए हेडलाइट या बैक-रिफ्लेक्टर लगे होते हैं. इसके बावजूद इन पर क्षमता से कई गुना अधिक लकड़ी, मक्का, ईंट और भारी माल ढुलाई की जा रही है.
NH-31 पर अचानक मुड़ने से होते हैं हादसे, राहगीर परेशान
सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल: स्थानीय ग्रामीणों और नियमित राहगीरों का कहना है कि पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले व्यस्त एनएच-31 पर इन गाड़ियों की मौजूदगी किसी दुःस्वप्न जैसी है. धीमी गति से चलने वाले ये वाहन बिना कोई इंडिकेटर (संकेत) दिए अचानक हाईवे के बीचो-बीच मुड़ जाते हैं या रुक जाते हैं. ऐसे में पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रकों या कारों को संभलने का मौका नहीं मिलता, जिससे हर वक्त बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है.
खानापूर्ति बनकर रह गई है प्रशासनिक कार्रवाई
कार्यवाही पर उठ रहे सवाल:
क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का आरोप है कि परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस द्वारा समय-समय पर जो जांच अभियान चलाया जाता है, वह महज एक औपचारिक खानापूर्ति बनकर रह गया है. इन अवैध वाहन चालकों और मालिकों पर कोई ठोस कानूनी पेनाल्टी या जब्ती की कार्रवाई नहीं होने के कारण उनके हौसले लगातार बुलंद हैं. चंद रुपयों के जुर्माने के बाद ये गाड़ियां फिर से सड़कों पर मौत बनकर दौड़ने लगती हैं.
विशेषज्ञों की राय: पाबंदी के साथ वैकल्पिक रोजगार भी जरूरी
स्थायी समाधान की मांग:
यातायात मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस गंभीर समस्या से पूरी तरह निजात पाने के लिए नियमित रूप से ‘सघन चेकिंग अभियान’ चलाना होगा. इसके साथ ही प्रशासन को एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इन गाड़ियों पर निर्भर गरीब चालकों को सरकारी योजनाओं के तहत लोन दिलाकर ‘वैकल्पिक व्यावसायिक वाहन’ (जैसे ई-रिक्शा या छोटे कमर्शियल लोडर) उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल करनी चाहिए, ताकि उनका रोजगार भी न छिने.
कोढ़ा के नगरवासियों ने जिला प्रशासन और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी से मांग की है कि किसी बड़े और दर्दनाक हादसे का इंतजार किए बिना इन खतरनाक जुगाड़ वाहनों पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए, ताकि एनएच-31 पर सफर करने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
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लेखक के बारे में
By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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