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बिहार में BLO की ब्रेन हैमरेज से मौत, परिजन बोले- काम का बोझ नहीं झेल सके सत्यजीत...

Updated at : 01 Aug 2025 1:50 PM (IST)
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katihar blo news| BLO dies of brain hemorrhage in Bihar

पार्थिव शरीर पहुंचा कटिहार

Bihar News: कटिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में लगे शिक्षक की ड्यूटी के दौरान ब्रेन हैमरेज से मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि अत्यधिक काम के दबाव और लगातार मानसिक तनाव के चलते उनकी हालत बिगड़ी थी. शिक्षक संघ ने इस मामले में मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.

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Bihar News: बिहार के कटिहार जिले के सदर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय नीचा टोला, दलन पश्चिम पंचायत में कार्यरत शिक्षक सत्यजीत कुमार सिंह की ब्रेन हैमरेज से मौत हो गई. वे 2014 से पंचायत शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे थे. इस बार उन्हें निर्वाचन आयोग के विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के लिए BLO पर्यवेक्षक बनाया गया था. वे कटिहार प्रखंड कार्यालय के ट्रायसेम भवन में पदस्थापित थे. लेकिन इसी सरकारी जिम्मेदारी के दौरान अत्यधिक मानसिक दबाव उनकी जान ले गया.

कार्यभार का बोझ बना मौत का कारण?

28 जुलाई को अचानक उनकी तबीयत प्रखंड कार्यालय में बिगड़ गई. परिजनों के अनुसार, अत्यधिक वर्कलोड और उच्चाधिकारियों के दबाव में काम करते-करते सत्यजीत मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे. पहले उन्हें घर लाया गया, फिर कटिहार मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि होने के बाद कोलकाता के पियरलेस अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान 31 जुलाई की सुबह उनका निधन हो गया.

विभागीय प्रेशर का आरोप

परिजनों और साथ काम करने वाले BLO कर्मियों ने बताया कि सत्यजीत के अधीन 14 बीएलओ कार्यरत थे और एक महीने से वे दबाव में थे. शिक्षकों ने कहा कि “काम का प्रेशर इतना अधिक था कि वो उसे झेल नहीं सके, यही उनकी मौत की वजह बनी.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाया, जिससे स्थिति और बिगड़ती गई.

परिवार को नहीं मिला समय पर इलाज

मृतक शिक्षक के परिजनों ने बताया कि जब फोन पर सूचना मिली, तब तक स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी. कोलकाता में भर्ती कराने के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका. सीटी स्कैन में ब्रेन में गंभीर क्लॉटिंग मिली थी.

शिक्षक संघ की मांग- पीड़ित परिवार को मिले मुआवजा

शिक्षक संघ और स्थानीय शिक्षकों ने इस घटना को चुनाव आयोग की लापरवाही और काम के अत्यधिक बोझ का नतीजा बताया है. शिक्षक संघ के लोगों ने कहा कि “सत्यजीत हर दिन रात 11 बजे तक ऑफिस में काम करते थे. वे ईमानदारी से जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन सिस्टम का दबाव जानलेवा बन गया.”

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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