विधानसभा चुनाव: क्या वोटर अधिकार यात्रा से बदलेगा सियासी समीकरण

विधानसभा चुनाव: क्या वोटर अधिकार यात्रा से बदलेगा सियासी समीकरण
– महागठबंधन के कार्यकर्ताओं में उत्साह कटिहार बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. पर सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी है. हर राजनीतिक दल अपने-अपने गतिविधियों के जरिये जनता को लुभाने की कोशिश में अभी से जुट गया है. सत्तारूर एनडीए के विभिन्न घटक दलों की ओर से कई तरह की गतिविधि आयोजित की जा रही है. दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों की महागठबंधन में शामिल घटक दल की ओर से भी गतिविधियां अब तेज कर दी गयी है. इस बीच महागठबंधन की ओर से वोटर अधिकारी यात्रा बिहार में शुरू की गयी है. इसी कड़ी में वोटर अधिकार यात्रा कटिहार सहित सीमांचल संपन्न हो गयी है. यह यात्रा शनिवार को दिन भर कटिहार के विभिन्न विधानसभा क्षेत्र की ओर से गुजरी. शनिवार का दिन राजनीतिक सरगर्मियों से भरा रहा. उल्लेखनीय है कि वोटर अधिकारी यात्रा का नेतृत्व कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सहित महागठबंधन में शामिल विभिन्न दलों के शीर्ष नेतृत्व कर रहे है. अपने शीर्ष नेताओं को अपने यहां पहुंचने से महागठबंधन में शामिल घटक दल के कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह नजर आ रहा है. दूसरी तरफ यह इस उत्साह का यह भी कारण है कि अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के संभावित प्रत्याशी भी इस वोटर अधिकार यात्रा को सफल बनाने में पूरी ताकत झोंक दी. संभावित प्रत्याशी की ओर से एक तरह से शक्ति प्रदर्शन भी किया जा रहा था. ताकि अपने नेताओं की नजर में वह आ सके. बहरहाल महागठबंधन की इस वाटर अधिकार यात्रा का आने वाले विधानसभा चुनाव पर कितना असर डालता है या तो आने वाला वक्त ही बताया पर यह यात्रा एनडीए के बीच भी खलबली मचा दी है. कटिहार के चार विधानसभा क्षेत्र से गुजरी यात्रा जानकारों की माने तो महागठबंधन की ओर से निकली इस यात्रा को लेकर भी प्लानिंग काफी सोच समझकर किया गया. अगर यात्रा की रूट पर नजर डालें तो यह यात्रा कटिहार जिले के सात विधानसभा में से चार विधानसभा क्षेत्र से होकर गुजरी है. इन चार विधानसभा क्षेत्र में से दो पर राजद व दो कांग्रेस पर चुनाव लड़ती रही है. फ़िलहाल इन चार विधानसभा क्षेत्र में एक विधानसभा क्षेत्र कदवा कांग्रेस के कब्जे में है. जबकि तीन विधानसभा क्षेत्र में बरारी एनडीए के घटक दल जदयू एवं कटिहार तथा कोढ़ा भाजपा के कब्जे में है. माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिये विधानसभा चुनाव में न केवल कदवा को महागठबंधन बरकरार रखने की कोशिश करेगी. बल्कि बरारी, कटिहार एवं कोढ़ा भी एनडीए से छीनने की कोशिश में रहेगी. जानकार यह भी बताते है कि महागठबंधन इसी रणनीति के तहत न केवल इस यात्रा की प्लानिंग की. बल्कि आने वाले समय में भी कई तरह की रणनीति अपनायेगी. फिलहाल वोटर अधिकार यात्रा को लेकर न केवल महागठबंधन में शामिल घटक दल के स्थानीय नेताओं एवं संभावित प्रत्याशियों के बीच उत्साह का संचार हुआ है. बल्कि एनडीए के घटक दल भी महागठबंधन की इस वोटर अधिकार यात्रा पर नजर है. राहुल की यात्रा का लोकसभा चुनाव में मिला था फायदा राहुल-तेजस्वी के नेतृत्व में निकली वोटर अधिकार यात्रा को लेकर न केवल महागठबंधन में शामिल दल के नेता कार्यकर्ता सक्रिय रहे. बल्कि इस यात्रा पर एनडीए की भी नजर रही गया. साथ ही यात्रा पर सियासी टिप्पणी कार की भी नजर रही है. यही वजह है कि सियासी जानकर भी अपने हिसाब से इस यात्रा का विश्लेषण कर रहे है. दरअसल लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा के तहत सीमांचल के अन्य जिले से गुजरते हुए कटिहार पहुंची तथा कटिहार होते पश्चिम बंगाल में प्रवेश किया था. राहुल की उस यात्रा का असर भी इन क्षेत्रों में दिखा. सीमांचल के चार लोकसभा सीट में कटिहार व किशनगंज के खाते में गयी. जबकि पूर्णिया में निर्दलीय पप्पू यादव ने यह सीट जदयू से छीन ली. इसलिए माना जा रहा है कि वोटर अधिकार यात्रा का असर अक्तूबर -नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में होगा. इस तरह के कयास लगाये जा रहे है.
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