अपनों ने दुत्कारा, जलील िकया, मौत ने भी गले नहीं लगाया
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
Updated:
विज्ञापन
साहब, अपनों ने दुत्कार दिया, हमारे बच्चों को भी हमसे जुदा कर दिया, गैरों ने भी कम जलील नहीं किया, मायके से भी कोई उम्मीद नहीं है. मरने के लिए निकली थी, लेकिन मौत ने भी गले नहीं लगाया. आप ही बताएं मुझ जैसी अभागन इस दुनिया में कहां मिलेगी. ये पीड़ा है उस शीला […]
विज्ञापन
साहब, अपनों ने दुत्कार दिया, हमारे बच्चों को भी हमसे जुदा कर दिया, गैरों ने भी कम जलील नहीं किया, मायके से भी कोई उम्मीद नहीं है. मरने के लिए निकली थी, लेकिन मौत ने भी गले नहीं लगाया. आप ही बताएं मुझ जैसी अभागन इस दुनिया में कहां मिलेगी. ये पीड़ा है उस शीला की जिसे मजदूरों ने ट्रेन से कटने से बचा कर कुरसेला पीएचसी में भरती कराया था.
कुरसेला : ससुराल वालों व पति के दुत्कार से अवसाद ग्रस्त महिला ने बुधवार को कुरसेला स्टेशन के रैक प्वाइंट के समीप ट्रेन से कट कर जान देने का प्रयास किया. हालांकि रैक प्वाइंट पर काम कर रहे मजदूरों ने विवाहिता को ट्रेन से कटने से बचा लिया. रेल ट्रैक पर बदहवास होकर गिरी महिला को मजदूरों ने कुरसेला पीएचसी में भरती कराया है. शीला देवी (26) ने बताया कि उसका ससुराल पूर्णिया के रूपौली थाना क्षेत्र के गद्दीघाट में है. मायका भागलपुर जिले के गोपालपुर थाना क्षेत्र के कालूचक तीनटेंगा गांव में है. पति बेचन रजक बाहर रह कर रिक्शा चलाता है. उसे एक बेटा आठ वर्ष का एवं छह व चार साल की दो बेटियां हैं.
ससुराल में पिछले दस वर्षों से उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है. उसका पति केवल बच्चों का भरण-पोषण करता है और उसे खुद के भरोसे जीने-मरने के लिये छोड़ दिया है. वह सिलाई, कटाई कर खुद का पेट पालती है. इसके बाद भी वह ससुराल में रहती आ रही थी. वह महिला समूह से जुड़ी हुई है. उस समूह में गांव से जुड़ी एक महिला ने उस पर उसके पति से अवैध सबंध रखने का आरोप लगा कर उसे जलील किया और मारपीट की. इस आरोप की जानकारी पर पति ने भी उसके साथ मारपीट की.
चहुंओर से नि:सहाय होकर वह बच्चों को लेकर एक परिचित के घर कटिहार गयी थी. वहां सुलह व भरोसा देकर पति उसे व बच्चों को कटिहार से कुरसेला लेकर आया था. कुरसेला आकर पति उसे छोड़ बच्चों को लेकर घर चला गया. कुरसेला आकर वह पूरी तरह असहाय व बेसहारा हो गयी. मायके से भी सहारे की उम्मीद नहीं थी. इस स्थिति में उसके पास जीने की कोई वजह नहीं बची है. पति बच्चों को उससे छीन कर ले गया. ऐसे में ट्रेन से कट कर वह जान देने पहुंची थी. वह जीना नहीं चाहती है.
बच्चों को भी हमसे दूर कर िदया
कुरसेला पीएचसी में एडमिट शीला ने बताया कि गांव की महिला द्वारा उस गलत आरोप लगाने से वह आहत हो चुकी है. पति भी उसे शक की नजर से देखता है. जिसने जीवन भर आपका साथ निभाने का वादा किया हो और वही आप पर विश्वास न करे, तो फिर जीने का क्या मतलब. मैं मां हूं और बच्चों का मुंह देखे बिना कैसे रह सकती हूं.
मेरे कलेजे के टुकड़ों को ही मुझसे दूर कर दिया. बच्चों के बिना एक-एक पल काटना पहाड़ के समान है. गरीब हूं, लेकिन हूं तो मां ही. लोगों के उलाहने व पति की उपेक्षा से उसका जीवन नरक हो गया है. अबला हूं किसके पास शिकायत लेकर जाऊं, कौन मेरी मदद करेगा. सोचा इससे तो मर जाना ही बेहतर है, कम से कम इन दुखों से तो छुटकारा मिल जायेगा. पर किस्मत को ये भी मंजूर नहीं था. लगता है मुझे और भी बुरे दिन देखने हैं, तभी तो मर भी ना सकी.
पीएचसी नहीं पहुंची पुिलस, चली गयी शीला
शीला के पीएचसी पहुंचने पर कुरसेला थाने को सूचना दी गयी, लेकिन पुलिस ने दिलचस्पी नहीं ली. शीला अकेले ही पीएचसी ने घर जाने की बात कह निकल गयी. हालांकि यह आत्महत्या के प्रयास का मामला था इसमें पुलिस को शीला काे संरक्षण देना चाहिए था. जो महिला आत्महत्या का प्रयास कर चुकी है, वह क्या गारंटी है कि दोबारा इस तरह का कदम नहीं उठायेगी. इस संबंध में कुरसेला थानाध्यक्ष ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ िलया कि उक्त महिला अपने घर चली गयी है और वहीं संबंधित थाने में मामला दर्ज करायेगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










