इन मांगों को लेकर हड़ताल पर थे बैंक कर्मी
11 सूत्री मांगों के समर्थन व सरकार की तीन नीतियों के विरोध में यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल आहूत की गयी. बैंक यूनियन के नेताओं के अनुसार जन विरोधी बैकिंग सुधारों, कामगार विरोधी श्रम सुधारों, ट्रेड यूनियन के अधिकारों का उल्लंघन का प्रयास करने, नियमित व स्थायी बैंकिग कार्यों की आउटसोर्सिंग करने का विरोध किया गया है. […]
11 सूत्री मांगों के समर्थन व सरकार की तीन नीतियों के विरोध में यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल आहूत की गयी. बैंक यूनियन के नेताओं के अनुसार जन विरोधी बैकिंग सुधारों, कामगार विरोधी श्रम सुधारों, ट्रेड यूनियन के अधिकारों का उल्लंघन का प्रयास करने, नियमित व स्थायी बैंकिग कार्यों की आउटसोर्सिंग करने का विरोध किया गया है.
साथ ही इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के माध्यम से नोटबंदी के दौरान कर्मचारी व अधिकारियों द्वारा बैंक कार्यावधि के अलावा अतिरिक्त कार्य करने के लिए उचित भुगतान की प्रतिपूर्ति करने की मांग की गयी है. इसके अतिरिक्त ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 में ग्रेच्युटी सीमा राशि को समाप्त कर सेवा निवृत्ति पर ग्रेच्युटी व अवकाश नकदी करण की राशि को पूर्णत: आयकर से मुक्त करने सहित 11 सूत्री मांग शामिल है. इस मांग के समर्थन में यूनियन के द्वारा स्टेट बैंक के मुख्य शाखा के द्वार पर धरना प्रदर्शन भी किया गया.
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