नोटबंदी के 50 दिन बाद भी स्थिति जस की तस
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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कटिहार : नोटबंदी के पचास दिन बुधवार को पूरे हो गये. इस पचास दिन में नोटबंदी की वजह से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति काफी उथल-पुथल रही. शुरुआती दौर में लोग नोट बदलने के लिए घंटो कतार में खड़े रहे. नोट की अदला-बदली बंद होने के बाद पुराने नोट लेकर लोग बैंक खाते में […]
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कटिहार : नोटबंदी के पचास दिन बुधवार को पूरे हो गये. इस पचास दिन में नोटबंदी की वजह से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति काफी उथल-पुथल रही. शुरुआती दौर में लोग नोट बदलने के लिए घंटो कतार में खड़े रहे. नोट की अदला-बदली बंद होने के बाद पुराने नोट लेकर लोग बैंक खाते में जमा करने के लिए कतारों में खड़े रहे. अब तक अधिकांश लोग 500 व 1000 के पुराने नोट बैंक खाता में जमा कर चुके हैं. हालांकि सरकार ने पुराने नोट को 30 दिसंबर तक जमा करने की आखिरी तिथि निर्धारित की है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बीच घोषणा की कि 50 दिन में नोटबंदी के बाद से उत्पन्न स्थिति सामान्य हो जायेगी, लेकिन अब तक स्थिति सामान्य नहीं बनी है. खासकर नोटबंदी के बाद से नकदी की किल्लत को लेकर जूझ रहे लोगों की परेशानी अब भी बरकरार है. प्रभात खबर ने नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने पर विभिन्न स्थलों पर इसकी पड़ताल की. प्रस्तुत है प्रभात खबर की पड़ताल करती यह रिपोर्ट.
खेती भी हुई प्रभावित : नोटबंदी के बाद से किसानों को भी परेशानी उठाना पड़ा. जिस समय नोटबंदी की घोषणा की गयी. वह समय रबी व मक्का लगाने का होता है. नवंबर में किसान रबी फसल लगाते हैं. लेकिन नोटबंदी की वजह से किसानों को ऐसे फसल बुआई में विलंब हुआ. अब भी लोग दिसंबर के समाप्ति में गेहूं व मक्का लगा रहे हैं. हालांकि सरकार ने नवंबर के अंतिम में यह घोषणा की कि किसान पांच सौ के पुराने नोट के जरिये अधिकृत किसान केंद्र से बीज खरीद सकते हैं. लेकिन इस तरह का कोई केंद्र नहीं होने की वजह से किसानों को खाद बीज खरीदने में परेशानी उठाना पड़ा. किसानों को महाजन से कर्ज लेकर रबी और मक्का लगाना पड़ा. विलंब होने की वजह से गेंहूं व मक्का की पैदावार कैसी होगी यह तो आने वाला समय ही बतायेगा. फिलहाल किसानों को नोटबंदी से अत्यधिक परेशानी हुई.
बाजारों की रौनक घटी, कारोबार पर भी पड़ा असर : जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में नोटबंदी की वजह से कारोबार प्रभावित हुई. नोटबंदी के बाद से बाजारों में छायी मंदी अब भी बरकरार है. हालांकि धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है. खासकर निर्माण कार्य व बड़े अनुष्ठान का काम अब भी प्रभावित है. छोटे कारोबारियों व सब्जी उगाने वाले किसानों की स्थिति नोटबंदी की वजह से अत्यधिक खराब हुई है. किसानों को हरी सब्जी औने पौने दाम में बेचनी पड़ रही है. वहीं शहरी क्षेत्र के बाजारों में अब भी पूर्व की तरह रौनक नहीं लौटी है. करोड़ों का कारोबार नोटबंदी की वजह से प्रभावित हुई है.
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