हाल कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालय का

Updated at : 29 Jun 2018 6:14 AM (IST)
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हाल कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालय का

कटिहार : शहर के अड़गड़ा चौक स्थित कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालय बेहद जर्जर एवं बुरी हालत में है. कहने को यह चिकित्सालय है, लेकिन यहां चिकित्सकों, कंपाउंडरों समेत अन्य कर्मियों एवं बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. यहां असंगठित क्षेत्र के कामगार बीमा धारकों एवं उनके आश्रितों का इलाज किया जाता है. यह सीमांचल क्षेत्र […]

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कटिहार : शहर के अड़गड़ा चौक स्थित कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालय बेहद जर्जर एवं बुरी हालत में है. कहने को यह चिकित्सालय है, लेकिन यहां चिकित्सकों, कंपाउंडरों समेत अन्य कर्मियों एवं बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. यहां असंगठित क्षेत्र के कामगार बीमा धारकों एवं उनके आश्रितों का इलाज किया जाता है. यह सीमांचल क्षेत्र का एकमात्र कर्मचारी बीमा चिकित्सालय है, जहां आसपास के कई जिलों से मरीज आते हैं. मरीजों का इलाज नहीं होने की स्थिति में उन्हें स्थानीय सदर अस्पताल या फिर अन्य स्थानों पर रेफर किया जाता है.

खाली पड़े हैं चिकित्सकों के पद
अस्पताल सूत्रों के अनुसार यहां चिकित्सकों के छह पद हैं, जिसमें सिर्फ दो डॉक्टर कार्यरत हैं. इसके साथ ही इन दोनों डॉक्टरों में से एक सप्ताह के कुछ ही दिन यहां ड्यूटी करते हैं. बाकी उनकी ड्यूटी राज्य के दूसरे चिकित्सालय में भी रहती है. अस्पताल में कंपाउंडर नहीं है. इसके पूर्व यहां कार्यरत कंपाउंडर सेवानिवृत्त हो गये तब से यह पद खाली पड़ा है. इसके अलावा यहां तीन आदेशपाल है. जिसमें एक का डेपुटेशन पटना हो गया है. अस्पताल में इसके अलावा दो क्लर्क एवं दो नर्स की ड्यूटी बतायी जाती है.
बेहद खराब हाल है अस्पताल के कमरों का : अस्पताल में घुसते ही यहां की बदहाली का अंदाजा लग जाता है. हर तरफ धूल एवं सीलन पसरा हुआ है. यहां के चंद कमरों को छोड़कर शायद सफाई भी नहीं की जाती है. यही कारण है कि ज्यादातर कमरों और कॉरिडोर में धूल, मकड़ी के जाले एवं गंदगी का साम्राज्य है. अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार यहां पीने के पानी के लिए चापाकल और वॉटर सैनिटेशन सिस्टम नदारद है. ले देकर कर्मचारियों के चंदे से एक चापाकल लगाया गया है.
सिर्फ ओपीडी चलता है, बेड व अन्य सुविधाएं नदारद
कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालय में सिर्फ ओपीडी का संचालन होता है. बैड और अन्य नर्सिंग सुविधाएं नहीं है. अगर यहां पेशेंट आते हैं तो उनके जख्मों पर ड्रेसिंग करने वाले तक नहीं है. एंबुलेंस की सुविधा की तो बात ही करें छोड़ें. जिसके कारण यहां आने वाले मरीजों को किसी तरह की कोई सुविधा नहीं मिल रही है. यह अस्पताल हाथी दांत साबित हो रहा है.
कहते हैं प्रभारी चिकित्सक
प्रभारी चिकित्सक डॉ सरफे आलम के अनुसार यहां सुविधाओं का घोर अभाव है. दवाएं हैं, लेकिन कर्मियों की कमी है. इसके साथ ही अन्य बुनियादी सुविधाएं भी नहीं है.
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