पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, वट वृक्ष के लिए फेरे, उमड़ा आस्था का सैलाब
Published by : Sakshi kumari Updated At : 16 May 2026 8:29 AM
वट सावित्री व्रत की पूजा करती महिलाएं
Vat Savitri Puja: भभुआ में वट सावित्री व्रत को लेकर शनिवार को महिलाओं की आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला. पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की और श्रद्धापूर्वक उसकी परिक्रमा की.
Vat Savitri Puja: (भभुआ से अमित कुमार सिन्हा) भभुआ सदर में शनिवार को पतिव्रता महिलाओं ने पुत्र-पौत्र की प्राप्ति,पति और परिवार की सुख-समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना को लेकर श्रद्धा और भक्ति के साथ वट सावित्री व्रत पूजा की. महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर उसकी परिक्रमा की और आज पति की सलामती के लिए दिनभर उपवास रखेंगी.
सुबह से वट वृक्षों के नीचे जुटीं हजारों महिलाएं
शनिवार की सुबह व्रती महिलाएं पूजा सामग्री लेकर वट वृक्षों के पास पहुंचीं.वहां उन्होंने धूप-दीप, अक्षत, गंध और पूजन सामग्री के साथ पूजा की. इसके बाद वट वृक्ष में सूत लपेटकर श्रद्धापूर्वक फेरे लगाए और अखंड सौभाग्य की कामना की. पूरे दिन महिलाओं ने निर्जला उपवास रखकर परिवार की खुशहाली के लिए ईश्वर से प्रार्थना की.
सप्तधान्य और सावित्री-सत्यवान की प्रतिमा स्थापित कर की गई विशेष पूजा
महिलाओं ने वट वृक्ष के समीप बैठकर पात्र में सप्तधान्य भरकर उसे वस्त्र से ढंका और दूसरे पात्र में ब्रह्मा-सावित्री एवं सत्यवान-सावित्री की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की. इसके बाद विधिवत परिक्रमा कर पूजा किया. इस दौरान गरीबों और ब्राह्मणों को वस्त्र दान और भोजन कराकर आशीर्वाद भी लिया गया.
54, 17 और 108 बार की जाती है वट वृक्ष की परिक्रमा
जिला समाहरणालय के पीछे पूजा करा रहे पंडित मनोज तिवारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनाया जाता है. इस व्रत की शुरुआत त्रयोदशी तिथि से होती है और महिलाएं तीन दिन तक उपवास रखती हैं. उन्होंने बताया कि श्रद्धालु महिलाएं वट वृक्ष की 54, 17 और 108 बार परिक्रमा कर पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं.
शहर के मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
भभुआ शहर के पुलिस लाइन स्थित डाकेश्वर महादेव मंदिर, देवीजी मंदिर, संतोषी माता मंदिर, खाकी गोसाईं मंदिर, सदर थाना परिसर, सदर अस्पताल और पीडब्ल्यूडी परिसर सहित कई स्थानों पर महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे एकत्र होकर पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना की.
वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास, पूजा से मिलता है अखंड सौभाग्य
भवन प्रमंडल परिसर में पूजा करा रहे पंडित विनोद शंकर त्रिपाठी ने बताया कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और डालियों-पत्तियों में भगवान शिव का निवास माना जाता है. उन्होंने कहा कि वट सावित्री व्रत करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
सावित्री ने यमराज से छीने थे पति सत्यवान के प्राण
पंडित त्रिपाठी ने बताया कि इसी दिन मां सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज के फंदे से वापस लाए थे. जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जा रहे थे तब सावित्री उनके पीछे चल पड़ीं. यमराज ने प्रसन्न होकर उन्हें तीन वरदान दिए. सावित्री ने एक वरदान में सौ पुत्रों की माता बनने का वर मांगा. तब यमराज को सत्यवान को पुनर्जीवित करना पड़ा.
इसलिए वट वृक्ष की परिक्रमा का होता है विशेष महत्व
मान्यता है कि जब सावित्री यमराज के पीछे गई थीं तब वट वृक्ष ने सत्यवान के शव की रक्षा की थी. पति के प्राण वापस मिलने के बाद सावित्री ने वट वृक्ष का आभार प्रकट करते हुए उसकी परिक्रमा की थी. तभी से वट सावित्री पूजा में बरगद के पेड़ की परिक्रमा का विशेष महत्व माना जाता है.जिलेभर में महिलाओं की श्रद्धा, आस्था और समर्पण का यह पर्व आकर्षण का केंद्र बना रहा.
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साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में अपनी करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.
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