जीटी रोड : वाराणसी-औरंगाबाद सिक्सलेन का काम 13 साल बाद भी नहीं हुआ पूरा

Updated at : 27 May 2024 8:47 PM (IST)
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जीटी रोड : वाराणसी-औरंगाबाद सिक्सलेन का काम 13 साल बाद भी नहीं हुआ पूरा

वाराणसी-औरंगाबाद एनएच दो सिक्सलेन का काम जो 10 वर्ष पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, वह अब तक पूर्ण नहीं हो पाया है. कहीं पुल-पुलिया का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है, तो कहीं सर्विस रोड का कार्य अधूरा पड़ा है.

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कर्मनाशा. वाराणसी-औरंगाबाद एनएच दो सिक्सलेन का काम जो 10 वर्ष पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, वह अब तक पूर्ण नहीं हो पाया है. कहीं पुल-पुलिया का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है, तो कहीं सर्विस रोड का कार्य अधूरा पड़ा है. जबकि, इसी रोड से होकर रोहतास व कैमूर के हजारों लोग प्रतिदिन वाराणसी सहित यूपी के अन्य जगहों पर पहुंचते हैं. इसलिए यह रोड यहां के लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. कैमूर व रोहतास जिले के लोगों के लिए यह बड़ी समस्या है, फिर भी यह समस्या लोकसभा चुनाव में चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया, जिसकी चर्चा इन दिनाें संसदीय क्षेत्र के लोगों के बीच बनी है. गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट पर 13 वर्षों से कार्य चल रहा है. लेकिन, अब तक लोगों के सुहाने सफर का सपना साकार नहीं हो पाया है और जून 2024 तक भी कार्य पूर्ण होने की संभावना भी नहीं दिख रही है. लेकिन, जून-जुलाई तक कार्य पूर्ण नहीं होने की स्थिति में एनएचएआइ वर्तमान कार्यदायी संस्था को टर्मिनेट कर किसी दूसरी कंपनी को कार्य पूर्ण करने की जिम्मेदारी दे सकती है. लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर हाल में एनएचएआइ 2024 तक कार्य को पूर्ण करना चाहती है. दरअसल, लाेगों में उम्मीद जागी थी वर्ष 2024 में जून तक वाराणसी से औरंगाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग 19 के सिक्सलेन का कार्य पूरा हो जायेगा, लेकिन 13 साल से अधिक समय बीतने के बाद भी फोरलेन को सिक्सलेन बनाने का कार्य पूरा नहीं हो सका है. जबकि, एनएचएआइ ने दावा भी किया था कि 2024 के जून माह तक काम पूरा हो जायेगा और 2024 में इस हाइवे पर यात्रियों के लिए सुहाना सफर आसान हो जायेगा. जबकि, धरातल पर ऐसा कुछ दिख नहीं रहा है. कई जगहों पर पुल- पुलिया व सड़क का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है, लेकिन कार्य में तेजी जरूर आयी है. – 2011 में सिक्सलेन बनाने का शुरू हुआ था काम वर्ष 2011 में एनएच दो का विस्तार कर फोरलेन से सिक्सलेन बनाने का काम शुरू हुआ था, इसे 2014 में पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन समय पर काम पूरा नहीं हुआ. उस समय इसकी अनुमानित लागत करीब 2848 करोड़ रुपये थी. कार्यदायी संस्था समय से निर्माण कार्य पूरा करने में नाकाम रही. ऐसे में दोबारा कार्य अवधि बढ़ा कर 2017 में तय कर दिया गया. उस समय कार्य पूर्ण होने में जमीन अधिग्रहण की समस्या के कारण भी परियोजना पूर्ण होने में बाधा आ रही थी, जिसके चलते एक बार फिर से समय सीमा बढ़ा दिया गया था. समय बढ़ने से इस परियोजना की लागत में भी इजाफा हुआ. जहां पहले से अब सीमेंट, बालू, छड़ गिट्टी आदि सामान का रेट काफी बढा है. उसी के हिसाब से इस योजना का कास्ट भी बढ़ता चला गया. वाराणसी-औरंगाबाद के बीच 192 किलोमीटर के प्रोजेक्ट पर वाराणसी, मोहनिया, सासाराम सहित तीन टोल लगाये गये हैं. उनका भी रेट बढ़ कर दोगुना से कुछ ही कम रह गया है. दिल्ली से कोलकाता को जोड़ने वाले इस व्यस्ततम रोड को पहले से जीटी रोड व एनएच दो के नाम से जाना जाता रहा है. उसे वर्तमान में एनएच 19 कर दिया गया है. क्या कहते हैं लोग- – छांव गांव निवासी गजानंद यादव ने बताया कि कैमूर जिले से गुजरने वाले एनएच दो के सिक्सलेन विस्तार का कार्य अभी दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र के कुल्हड़ियां, खजुरा, मरहिया मोड, दुर्गावती बाजार, कर्मनाशा नदी पुल सहित कई जगहों पर पूर्ण नहीं हुआ है. करोड़ों रुपये का यह प्रोजेक्ट जो तीन वर्षों में पूरा होना था, 13 वर्षों से अधिक समय बीतने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है. इतनी बड़ी समस्या होने के बावजूद भी यह लोकसभा चुनाव में चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया, जबकि यह एक बड़ी समस्या है. – कर्मनाशा बाजार निवासी तस्लीम अली ने बताया कि कैमूर जिले के दुर्गावती में डहला मोड़ व मरहिया के पास अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती है. जहां आज तक अंडरपास या ओवरब्रिज नहीं बन पाया है. सिक्सलेन विस्तार का कार्य 10 वर्ष पहले ही हो जाना चाहिए था, जो अब तक पूर्ण नहीं हो पाया है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी बड़ी समस्या लोकसभा चुनाव में लोगों के लिए चुनावी मुद्दा नहीं है. – सरैया गांव निवासी शेर मोहम्मद ने बताया कि 2011 से लेकर 2024 में टोल टैक्स की दर को देखा जाये तो काफी बढ़ोतरी हुई है. लेकिन सिक्सलेन का निर्माण कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो सका है. जबकि, सिक्सलेन सड़क सुविधा के लिए ही टोल टैक्स की वसूली काफी वर्षों से लगातार हो रही है. फिर भी सिक्सलेन का काम पूर्ण नहीं हो पाना दुर्भाग्य की बात है. कैमूर व रोहतास जिले के लिए यह सड़क जीवन रेखा कही जाती है. यह समस्या लोकसभा चुनाव में सबसे बडा चुनावी मुद्दा है. – धनसराय गांव निवासी मनोज राजभर ने कहा कि इस सड़क से कैमूर व रोहतास जिले के हजारों में लोग मरीज से लेकर छात्र प्रतिदिन वाराणसी सहित यूपी के अन्य शहरों में जाते रहते हैं. लेकिन 13 वर्ष बाद भी सड़क का कार्य पूर्ण नहीं होने से लोगों को आये दिन बॉर्डर पर जाम की समस्या से रूबरू होना पड़ता है. यह जिले के लिए काफी अहम मुद्दा है. इस सड़क का कार्य जल्द से जल्द पूर्ण होना चाहिए.

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