इस साल जिले की 83 प्रतिशत महिलाओं का हुआ स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव

= सर्वेक्षण में जिले की 63 फीसदी महिलाओं ने जताया सरकारी अस्पतालों पर भरोसा
= सर्वेक्षण में जिले की 63 फीसदी महिलाओं ने जताया सरकारी अस्पतालों पर भरोसा संस्थागत प्रसव से मातृ व शिशु मृत्यु दर में आयी कमी सुरक्षित मातृत्व के लिए योजनाओं का असर, सुविधाओं में हुआ विस्तार भभुआ सदर. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में दर्ज आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में 83.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया गया है. जबकि, 63 फीसदी गर्भवती महिलाओं ने सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराकर समुदाय में सकारात्मक संदेश दिया है. दरअसल, केंद्र, राज्य सरकार व स्वास्थ्य विभाग के स्तर से जिले में मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विभिन्न योजनाएं चलायी जा रही है. ताकि, सुरक्षित प्रसव के साथ-साथ मातृ व शिशु मृत्यु दर में लगाम लगाया जा सके. संस्थागत प्रसव का मुख्य उद्देश्य मातृ व शिशु मृत्यु दर को रोकना है. इसके लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं के सफल संचालन के लिए जिला स्तर से लेकर प्रखंड स्तर पर निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं, जिसका सकारात्मक असर भी दिख रहा है. सदर अस्पताल में प्रसव को लेकर बहुत ही बेहतर सुविधा उपलब्ध है. लेबर रूम व ऑपरेशन थिएटर के अलावा प्रसव पूर्व वार्ड व मेटरनल वार्ड को भी व्यवस्थित किया गया है. यहां पर चिकित्सक व प्रशिक्षित नर्सों की प्रतिनियुक्ति की जाती है. लोगों को समझना चाहिए कि सरकार व विभाग उनके लिए प्रसव संबंधी सुविधाएं व सेवाओं को नि:शुल्क उपलब्ध करा रही है. साथ ही विभिन्न मदों से महिलाओं को प्रसव के बाद प्रोत्साहन राशि भी मुहैया करायी जाती है. महिलाओं के साथ पुरुषों को भी जागरूक होने की है जरूरत एसीएमओ डॉ शांति कुमार मांझी ने बताया कि संस्थागत प्रसव सुरक्षित मातृत्व की कुंजी है. लेकिन संस्थागत प्रसव के साथ प्रसव पूर्व जांच व प्रसव के उपरांत प्रसूता के स्वास्थ्य व उसके पोषण पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है. इसमें घर के पुरुषों की भूमिका अहम हो सकती है, क्योंकि अधिकतर घरों में सभी निर्णय लेने के अधिकार पुरुषों के ही होते हैं. इसलिए पुरुषों को गर्भवती महिला व प्रसव के बाद उक्त महिला का समुचित ध्यान रखने में अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है. घर में स्वस्थ माहौल से ही एक स्वस्थ जीवन का सूत्र जुड़ा होता है. सुरक्षित प्रसव के लिए चलायी जा रही हैं योजनाएं गौरतलब है कि सरकार द्वारा जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को 1400 रुपये व शहरी को 1000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है. जननी सुरक्षा योजना सिर्फ सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ही उपलब्ध है. जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में प्रसूता व उसके नवजात के लिए 48 घंटे रुकने की सुविधा है. इसमें दवा, भोजन, सभी जांच, रक्त की उपलब्धता व परिवहन की सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध करायी जाती है. साथ ही मुफ्त एम्बुलेंस सेवा, मुफ्त खाना, मुफ्त सी सेक्शन, खून की उपलब्धता सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है.
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