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थर्ड पार्टी की जांच में 186 नल जल योजनाएं पायी गयीं बंद

Updated at : 17 Dec 2024 8:43 PM (IST)
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थर्ड पार्टी की जांच में 186 नल जल योजनाएं पायी गयीं बंद

सरकार के निर्देश पर नवंबर माह में जिले में थर्ड पार्टी से करायी गयी नल जल योजना की जांच में जिले में 186 नल जल योजनाओं को बंद पाया गया

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भभुआ. सरकार के निर्देश पर नवंबर माह में जिले में थर्ड पार्टी से करायी गयी नल जल योजना की जांच में जिले में 186 नल जल योजनाओं को बंद पाया गया. इन बंद योजनाओं के कारण लगभग 23 हजार लोगों को हर घर नल के जल योजना का सरकारी पानी नहीं मिल रहा था. गौरतलब है कि सरकार की नल जल योजना मुख्यमंत्री के सात निश्चय में शामिल है, जिसके तहत सूबे के हर परिवारों को सरकारी नल जल योजना से जोड़ा जाना है. पहले इस योजना की शुरूआत जिले में वार्ड व प्रबंधन क्रियान्वन समिति द्वारा की गयी. लेकिन, क्रियान्वयन में तमाम तरह की शिकायत आने के बाद योजना के क्रियान्वयन की कमान लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को सौंप दिया गया है. वर्तमान में जिले में सभी नल जल योजनाओं का संचालन लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा कराया जा रहा है. इधर, नवंबर के तीसरे सप्ताह में सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा थर्ड पार्टी से जिले के नल जल योजनाओं की जांच करायी गयी. इसमें कई नल जल योजनाओं को बंद पाया गया. इसके कारण सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा था. इधर, इस संबंध में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता रवि प्रकाश ने बताया कि जांच में बंद योजनाओं को चालू करने का काम आरंभ कर दिया गया है. कई बंद योजनाएं वर्तमान में चालू भी हो चुकी हैं. नवंबर माह के तीसरे सप्ताह में जिला प्रशासन द्वारा टीम गठित कर जिले के विभिन्न वार्डों में नल जल योजना की उपयोगिता की जांच करायी गयी थी. इस संबंध में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता रवि प्रकाश ने बताया कि पीएचइडी और पीआरडी से पीएचइडी को हस्तांतरित 1905 योजनाओं की जांच सरकार के निर्देश पर करायी गयी थी. इसमें पीआरडी यानी पूर्व में पंचायती राज विभाग के माध्यम से लगी 140 योजनाओं व पीएचइडी से लगी 46 योजनाओं को बंद पाया गया था. इन बंद योजनाओं के कारण जिले के 5732 परिवारों को सरकार की इस योजना का पानी नहीं मिल पा रहा था. गौरतलब है कि अगर एक परिवार में अनुमानित औसत संख्या चार भी मान लिया जाये, तो इसका मतलब है कि बंद योजनाओं के कारण लगभग 23 हजार लोग सरकारी पानी से वंचित चल रहे थे. इन्सेट कहीं पाइल लीकेज, तो कहीं पाइप कनेक्शन नहीं भभुआ. नल जल योजनाओं की जांच के बाद सरकारी आंकडों में यह बताया जा रहा है कि कितनी योजनाएं बंद पायी गयी और बंद योजनाओं से प्रभावित परिवारों की संख्या कितनी रही. लेकिन, नल जल योजना की जांच की हकीकत यह भी बता रही हैं कि चालू योजनाओं में भी वार्ड के शत प्रतिशत लोगों को पानी नहीं मिल रहा था. जांच में सामने आया कि कही पाइप लीकेज, तो कहीं टंकी लीकेज, कहीं पाइप कनेक्शन नहीं किया जाना, कहीं चढ़ाई के कारण शत प्रतिशत लोगों तक सरकारी पानी नहीं पहुंच पा रहा था. उदाहरण के लिए रामपुर प्रखंड की पंचायत पसाई के वार्ड दो में चालू योजना के बावजूद 120 परिवारों में 60 परिवारों को तथा वार्ड तीन में चालू योजना के बाद भी 130 परिवारों में 30 परिवारों को सरकारी पानी नहीं मुहैया हो रहा था. इसी तरह बहुअन पंचायत के वार्ड नौ में चालू योजना से 80 परिवारों में से 60 परिवारों को व सीवों पंचायत के वार्ड एक से लेकर वार्ड पांच में चालू योजनाओं से 654 परिवारों में से 624 परिवारों को पानी नहीं मिल पा रहा था. इन्सेट 2 नल जल योजनाओं को बाधित करने में ग्रामीणों की भी भूमिका भभुआ. सरकार की नल जल योजना का लाभ शत प्रतिशत लोगों तक नहीं पहुंचने का एक कारण ग्रामीण भी हैं. गौरतलब है कि नल जल योजना के क्रियान्वयन शुरू होने के बाद ग्रामीणों द्वारा पाइप या टंकी खराब गुणवत्ता का लगाने, टंकी का बेस प्वाइंट में घटिया बालू, ईंट आदि घटिया सामग्री का प्रयोग किये जाने आदि की शिकायतें की जा रही थीं. लेकिन, विभाग के अनुसार सब कुछ के बावजूद ग्रामीणों द्वारा नल जल योजना का इस्तेमाल सही ढंग से नहीं किया जाना भी शत प्रतिशत लोगों तक पानी नहीं पहुंचने का एक कारण है. इस संबंध में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता ने बताया कि पूर्व में पीआरडी द्वारा जिन योजनाओं का क्रियान्वयन कराया गया था, उसमें कई जगहों पर लगे स्टेपालइजर गायब हो गये. इसी तरह नल जल योजनाओं के बिछाये गये पाइप जहां कहीं साइड या गलियों के किनारे लगाये गये थे. खेती के समय ट्रैक्टर आदि भारी वाहनों को खेत में उतारने चढ़ने के दौरान कट गये या फट गये, जिससे पानी की आपूर्ति बाधित हो गयी. उन्होंने बताया कि विभाग योजनाओं को क्रियान्वित तो कर देता है, लेकिन, योजनाओं की सफलता की जिम्मेदारी सिर्फ विभाग पर ही नहीं, ग्रामीणों पर भी निर्भर करता है.

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