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कहर ढाने वाली नदी अब बन गयी जीवनदाता

Updated at : 23 Aug 2024 8:52 PM (IST)
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कहर ढाने वाली नदी अब बन गयी जीवनदाता

कई दशकों से अभिशाप बन कर किसानों पर कहर ढाने वाली गेहुअनंवा नदी अब किसानों का जीवनदाता बन गयी है. गेहुअनंवा नदी का जीर्णोद्धार कराने के बाद इस साल किसानों को धान के पटवन के लिए नदी से पानी मिलने लगा है.

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भभुआ. कई दशकों से अभिशाप बन कर किसानों पर कहर ढाने वाली गेहुअनंवा नदी अब किसानों का जीवनदाता बन गयी है. गेहुअनंवा नदी का जीर्णोद्धार कराने के बाद इस साल किसानों को धान के पटवन के लिए नदी से पानी मिलने लगा है. गौरतलब है कि अपने नाम के अनुरूप ही सांप की तरह टेढ़ी- मेढ़ी पहाड़ी नदी गेहूअनंवा जब बरसात में पहाड़ी पानी के साथ लबालब होकर जब उफनाने लगती थी, तो पहाड़ों से नदी में गिरने वाला यह पानी बधार से लेकर गांवों तक समा जाता था और ग्रामीणों के बीच हलचल मच जाती थी. इससे कच्चे घर गिर जाते थे और पशु पक्षियों का बसेरा भी उजड़ जाता था. दूसरी तरफ बरसात खत्म होने के साथ ही नदी की तलहटी छिछला होने से पानी बह कर निकल जाता था और इससे किसानों को पटवन का भी कोई लाभ नहीं मिल पाता था. मिलाजुला कर दोनों तरफ से इस नदी से लाभ के बजाय किसानों को नुकसान ही अधिक उठाना पड़ता था, जिसे देखते हुए कई दशक के बाद इस साल जिला प्रशासन ने मनरेगा से गेहुअनंवा नदी का जीर्णोद्धार कराने का फैसला लिया था. इधर, इस संबंध में गेहुअनंवा नदी के पोषक क्षेत्र के मेढ़, बढ़ौना आदि पंचायत के किसानों ने बताया कि अब नदी के किनारों को मजबूत बना दिया गया है, जिससे नदी में पानी का ठहराव हो रहा है. साथ ही जरूरत पड़ने पर नदी में मोटर पंप लगाकर धान का पटवन भी किया जा रहा है. लंबे समय से कहर ढाह रही गेहुअंनवा नदी पर वर्ष 2023 में जिला प्रशासन की नजर आखिरकार पड़ गयी. इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा मनरेगा से गेहुअनंवा नदी का जीर्णोद्घार कराने का फैसला लिया गया और चालू बरसात के पूर्व गेहुअनंवा नदी के गाद की साफ सफाई के साथ तटबंधों के ऊंचाई को मजबूत करने का काम पूरा कर नदी के स्वरूप को नदी का शक्ल दे दिया गया. नतीजे में इस साल किसानों को धान के पटवन के समय नदी से भरपूर पानी मिल रहा है. गौरतलब है कि गेहुअनंवा नदी का मुख्य रूप से जीर्णोद्धार चांद प्रखंड के चौरी और दुलही पंचायत, चैनपुर प्रखंड के अमांव, मेढ़, बढ़ौना और सिरबिट पंचायत तथा दुर्गावती प्रखंड के अवहरियां, खामिदौरा और सावढ़ पंचायत में कराया गया है. यहां नदी के काफी छिछली होने से बाढ़ का खतरा गांवों से लेकर बधारों तक बढ़ जाता था. इन्सेट तीन प्रखंडों में 50 किमी का रास्ता नापता है गेहुअनंवा नदी का पानी भभुआ. बरसात में फुंफकारने वाली गेहुअनंवा नदी का पानी जिले के चैनपुर, चांद और दुर्गावती प्रखंड में लगभग 50 किलोमीटर का रास्ता नापता है. यह जानकारी देते हुए जिला प्रोग्राम पदाधिकारी मनरेगा संजय कुमार ने बताया कि यह नदी चैनपुर प्रखंड के टेकुआ ताल से निकलने के बाद प्रखंड के बढ़ौना पंचायत में 7600 मीटर, मेढ़ पंचायत में 7500 मीटर, नगर पंचायत हाटा में 1300 मीटर की दूरी नापती है. इसी तरह चांद प्रखंड की लोहदन पंचायत में 6600 मीटर, सिरबिट पंचायत में 1600 मीटर, चौरी पंचायत में 7500 मीटर, दुल्ही पंचायत में 6600 मीटर की दूरी में गुजरती है. इसी तरह दुर्गावती प्रखंड में यह नदी प्रखंड की खामिदौरा पंचायत में 8900 मीटर तथा सावठ पंचायत में 5400 मीटर की दूरी तय करते हुए डहला गांव के पास हाइवे दो के निकट दुर्गावती नदी में समा जाती है. उन्होंने बताया कि इस नदी के तली का छिछलापन चैनपुर प्रखंड के बाद क्रमश: चांद और दुर्गावती प्रखंड में कम था, जीर्णोद्धार के बाद नदी की गहराई बढ़ने के साथ तटों के मजबूती से कटाव पर भी रोक लग गयी है.

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