पूर्व राष्ट्रपति के नाम पर खुला पुस्तकालय अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू

Edited by VIKASH KUMAR
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पूर्व राष्ट्रपति व किताबों का शौक रखने वाले डॉ अब्दुल कलाम के नाम पर खुला पुस्तकालय पिछले कई वर्षो से जीर्णशीर्ण अवस्था में पड़ा है

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मोहनिया शहर. पूर्व राष्ट्रपति व किताबों का शौक रखने वाले डॉ अब्दुल कलाम के नाम पर खुला पुस्तकालय पिछले कई वर्षो से जीर्णशीर्ण अवस्था में पड़ा है. यह मोहनिया शहर के जगजीवन भवन के समीप स्थित अब्दुल कलाम पुस्तकालय स्थानीय बुद्विजीवी लोगों के प्रयास से खोला गया. लेकिन आज उपेक्षा का शिकार है, जो जीर्णशीर्ण अवस्था में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. यहां पुस्तकालय के कमरे में लगी खिड़कियां व दरवाजे भी टूटने लगे हैं. जबकि, लाखों रुपये के पुस्तकालय में रखे किताब भी देखरेख के अभाव में बर्बाद हो रहे हैं. पिछले कई वर्ष से पुस्तकालय बंद पड़ा है, जिसे देखने वाला न कोई स्थानीय जनप्रतिनिधि है न ही स्थानीय प्रशासन. जबकि, शहर में कई शिक्षण संस्थान हैं, जिसमें बच्चों को पढ़ने के लिए मोहनिया में एक भी पुस्तकालय नहीं है, काफी प्रयास के बाद खुला भी, लेकिन कई वर्षो से बंद रहता है. गौरतलब है कि शहर का इकलौता अब्दुल कलाम पुस्तकालय है, जबकि यहां निजी से लेकर कई सरकारी विद्यालय है. फिर भी पुस्तकालय के अभाव में बच्चों को परेशानी होती है. लेकिन, स्थानीय अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता हैं. 2001 में अब्दुल कलाम के नाम पर खुला था पुस्तकालय तत्कालीन जलसंसाधन मंत्री जगदानंद सिंह द्वारा एक जुलाई 2001 को अब्दुल कलाम पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया था, जहां अंदर बैठ कर लोगों को पढ़ने की व्यवस्था की गयी है. लेकिन अब कई वर्षों से बंद रहने से पूरा अंदर रखा किताब खराब हो रहा हैं. तत्कालीन डीएम मिहिर कुमार के कार्यकाल में जब पुस्तकालय खुला तो काफी लोगों में खुशी थी. कुछ दिन संचालन भी हुआ, लेकिन बढ़ते मोबाइल दुनिया के बीच लोगों की रूचि कम होने, प्रशासनिक व सामाजिक शिथिलता के कारण बंद हो गया, जो अब पूरी तरह से बंद ही है. # सेवानिवृत हेडमास्टर के बाद किसी ने नहीं की पहल मोहनिया के हेडमास्टर पद से सेवानिवृत हुए चंद्रजीत सिंह ने पुस्तकालय संचालन को लेकर काफी उत्सुकता दिखाई थी, जिसमे काफी दिन तक पुस्तकालय में कार्यक्रम से लेकर 26 जनवरी व 15 अगस्त को झंडोत्तोलन उन्हीं के द्वारा किया जाता था, लेकिन बढ़ती उम्र के कारण वह असमर्थ होते गये, जिसके बाद अब तक किसी बुद्विजीवी द्वारा पहल नहीं की गयी और कई वर्षो से पुस्तकालय बंद पड़ा है. # क्या कहते हैं शिक्षाविद –इस संबंध में डीएवी रतवार की शिक्षिका नीलम पांडेय ने बताया अब नये पुस्तकालय खुल भी नहीं रहे हैं, लेकिन मोहनिया में 24 वर्षों से खुला है तो स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधि को पहल कर चालू कराना चाहिए, ताकि बच्चों के साथ शिक्षा से जुड़े लोग पुस्तकालय में जाकर अच्छी-अच्छी पुस्तकें को पढ़कर उसका लाभ ले सकें. पुस्तकालय को चालू करने के लिए अपने स्तर से प्रयास करूंगी. –इस संबंध में बीके पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर आनंद सिंह ने बताया बंद पड़े पुस्तकालय को चालू करना चाहिए, ताकि आज के बच्चे पुस्तकालय क्या होता है जाने सकें. पुस्तकालय के अभाव में आज के बच्चे मोबाइल से ही जो जनाना होता जानकारी कर लेते हैं, इससे बच्चों में मोबाइल का लगने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है. बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रशासन को चाहिए कि बंद पड़े पुस्तकालय को चालू कराया जाये. प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार बना पुस्तकालय पुस्तकालय बंद, देखरेख के अभाव में लाखों की किताबें हो रही बर्बाद पुस्तकालय के कमरे में लगी खिड़कियां व दरवाजे भी टूटने लगे

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