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Kaimur News : महंगाई की मार, इस बार धान की खेती करनेवाले किसानों पर बढ़ा बोझ

Updated at : 05 Jun 2025 8:52 PM (IST)
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Kaimur News : महंगाई की मार, इस बार धान की खेती करनेवाले किसानों पर बढ़ा बोझ

इस बार धान की खेती में किसानों को एनपीके खाद और एपीएस खाद बाजार से महंगे दाम पर खरीदनी होगी. पिछले साल की अपेक्षा खाद के इन दोनों ब्रांडों के दाम में सरकार स्तर से वृद्धि कर दिया गया है

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भभुआ. इस बार धान की खेती में किसानों को एनपीके खाद और एपीएस खाद बाजार से महंगे दाम पर खरीदनी होगी. पिछले साल की अपेक्षा खाद के इन दोनों ब्रांडों के दाम में सरकार स्तर से वृद्धि कर दिया गया है. जबकि, यूरिया और डीएपी खाद पिछले साल के ही दर पर किसानों को उपलब्ध कराया जायेगा. गौरतलब है कि जिले में रोहणी नक्षत्र के शुरू होने के साथ ही खरीफ सीजन में धान की खेती की घंटी बज चुकी है. किसान धान के खेती को लेकर खेतों को तैयार करने से लेकर धान के बीहन डालने में भी जुट गये हैं. लेकिन, इस बार किसानों को धान के खेती में एनपीके व एपीएस खाद महंगा मिलने जा रहा है. प्रभारी जिला कृषि पदाधिकारी शिवजी कुमार के अनुसार, इस बार एनपीके खाद का जो पिछले साल 1470 रुपये प्रति बैग की दर से बेचा जा रहा था, अब एनपीके के एक बोरा का दाम बढ़कर 1720 रुपये बैग हो गया है. इसी तरह एपीएस खाद पिछले साल 1200 रुपये प्रति बैग था. इस साल एपीएस खाद का दाम बढ़कर 1400 रुपये प्रति बैग हो गया है. जबकि, किसानों को यूरिया पिछले साल की तरह ही 266.50 पैसा प्रति बैग तथा डीएपी खाद 1350 रुपये प्रति बैग के दाम पर उपलब्ध कराया जायेगा. गौरतलब है कि एपीएस खाद जिसका उपयोग फसलों को पोषक तत्व देने के लिए किया जाता है. आम तौर पर डायमोनियम फॉस्फेट का एक विकल्प है. क्योंकि, यह पौधों के नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की आवश्यकता को पूरा करता है. इसी तरह एनपीके खाद में भी नाइट्रोजन, फॅासफोरस तथा पोटेशियम जैसे आवश्यक तत्व मौजूद होते हैं, जो पौधों के विकास के लिए जरूरी होता है. यह खाद पौधों के रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि करने में सहायक होता है. इससे पौधे बीमारियों और कीटों से बेहतर ढंग से निबट सकते हैं. इन्सेट 1 जिले में यूरिया व डीएपी 2 लाख 6 हजार बैग उपलब्ध भभुआ. धान की खेती के प्रथम चरण में किसानों को जरूरत के अनुसार बीहन में खाद डालने के लिए वर्तमान में जिले में पर्याप्त मात्रा में यूरिया, डीएपी और एनपीके खाद उपलब्ध है. उपरोक्त जानकारी देते हुए प्रभारी जिला कृषि पदाधिकारी शिवजी कुमार ने बताया कि अभी जिले में यूरिया और डीएपी खाद का दो लाख छह हजार 162 बैग उपलब्ध है. इसमें एक लाख 88 हजार 522 बैग यूरिया खाद तथा 17 हजार 640 बैग डीएपी खाद की मात्रा है. इसी तरह एनपीके खाद का भी 89 हजार 380 बैग जिले में उपलब्ध है. वर्तमान में जिले के उर्वरक दुकानों से किसान जरूरत के अनुसार खाद खरीद सकते हैं. इन्सेट 2 एक लाख 31 हजार हेक्टेयर में होगी इस साल धान की खेती भभुआ. जिले में इस साल लगभग एक लाख 31 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की जायेगी. इसे लेकर किसानों को एक हजार 31 हेक्टेयर खेतों में धान का बीहन डालना है. हालांकि, कागजी आंकड़ों के अनुसार अभी भी धान की खेती पूर्व से चले आ रहे एक लाख 11 हजार हेक्टेयर में ही बतायी जाती है. लेकिन, जिला कृषि पदाधिकारी रेवती रमण के अनुसार पिछले कुछ सालों से हर साल धान के खेती का रकबा बढते जा रहा है. क्योंकि सरकारी के हर खेत को पानी, जल जीवन हरियाली अभियान, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना आदि के क्रियान्वयन में चेकडैमों, तालाबों, आहर और पइन के निर्माण से बहुत से खेतों पर सिंचाई की नयी सुविधाएं उपलब्ध हो चुकी हैं. जिससे ऐसे खेतों में भी अब किसान धान की खेती करने लगे हैं. इससे वास्तविक रकबा में बढ़ोत्तरी हुई है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PRABHANJAY KUMAR

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