कैमूर: तालाब जीर्णोद्धार के बाद कीचड़ में तब्दील हुई सड़क, पियां गांव के ग्रामीणों का निकलना हुआ मुश्किल

कीचड़ में लिपटा मुख्य सड़क | Prabhat Khabar Network
कैमूर जिले के पियां गांव में तालाब जीर्णोद्धार का काम ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है. मुख्य सड़क कीचड़ से सराबोर है, जिससे पैदल चलना और वाहन चलाना दूभर हो गया है. स्कूल बसें भी गांव तक नहीं पहुंच पा रही हैं.
Kaimur News : कैमूर जिले के कुदरा की महुअत पंचायत के पियां गांव में तालाब एवं पईन जीर्णोद्धार कार्य के बाद गांव की मुख्य सड़क कीचड़ से पट गई है. बरसात के कारण करीब एक किलोमीटर लंबी सड़क पर फिसलन इतनी बढ़ गई है कि पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है. बाइक सवार आए दिन गिरकर घायल हो रहे हैं, जबकि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी कीचड़ में फिसलकर चोटिल हो रहे हैं.
स्कूल बस गांव तक आना बंद, बच्चों को गोद में ले जा रहे अभिभावक
ग्रामीणों ने बताया कि लघु जल संसाधन विभाग द्वारा करीब 1.64 करोड़ रुपये की लागत से तालाब एवं पईन का जीर्णोद्धार कराया गया. कार्य के दौरान निकाली गई मिट्टी की ढुलाई में बड़ी मात्रा में मिट्टी गांव की मुख्य सड़क पर गिरती रही, जिसे हटाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई. अब बरसात में यही मिट्टी दलदल बन गई है. हालत यह है कि स्कूल बस और छोटे वाहन गांव तक नहीं पहुंच रहे हैं. स्कूल बसें गांव से करीब एक किलोमीटर दूर कुदरा-गंगापुर सड़क पर खड़ी होती हैं और अभिभावक बच्चों को गोद या पीठ पर बैठाकर कीचड़ पार कर बस तक पहुंचा रहे हैं. कुछ बच्चों ने तो विद्यालय जाना भी बंद कर दिया है.
ग्रामीण बोले- समय रहते सड़क साफ कर दी जाती तो नहीं होती परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि यदि एजेंसी कुछ मजदूर या जेसीबी लगाकर सड़क से मिट्टी हटवा देती तो यह समस्या नहीं होती. उन्होंने बताया कि जून माह के अंत में ही निर्माण कार्य बंद कर दिया गया था और बरसात शुरू होने से पहले सड़क की सफाई नहीं कराई गई. इससे पूरे गांव को नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.
निर्माण कार्य में अनियमितता का भी आरोप
ग्रामीणों ने जीर्णोद्धार कार्य में अनियमितता का आरोप भी लगाया है. उनका कहना है कि तालाब में पहले चार पानी निकासी नाले थे, लेकिन निर्माण एजेंसी ने केवल तीन नाले बनाए, जिससे पश्चिमी छोर के खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच सकेगा. इसके अलावा दो सिंचाई बाहा (नहर) का निर्माण होना था, लेकिन केवल एक बाहा बनाकर कार्य छोड़ दिया गया. वह भी पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होने लगा है. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही के कारण सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है और किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा.
कार्यपालक अभियंता से नहीं हो सका संपर्क
इस संबंध में लघु जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता संदीप कुमार से उनका पक्ष जानने के लिए सरकारी मोबाइल नंबर पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.
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