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पैक्स व व्यापार मंडल अध्यक्ष खुद अपना गेहूं इस बार बेच रहे बाजार में

चालू रबी सीजन में सरकार के समर्थन मूल्य पर शुरू किये गये गेहूं की खरीद में स्वयं पैक्स अध्यक्ष भी अपना गेहूं पैक्स को नहीं बेच रहे हैं. पैक्स व व्यापार मंडल के अध्यक्ष अपना गेहूं खुद बाजार में बेच रहे हैं.

भभुआ. चालू रबी सीजन में सरकार के समर्थन मूल्य पर शुरू किये गये गेहूं की खरीद में स्वयं पैक्स अध्यक्ष भी अपना गेहूं पैक्स को नहीं बेच रहे हैं. पैक्स व व्यापार मंडल के अध्यक्ष अपना गेहूं खुद बाजार में बेच रहे हैं. बाजार रेट ने इस बार गेहूं की खरीदारी को लेकर सरकार को बड़ा झटका दिया है. अब तक जिले में चालू रबी सीजन में गेहूं की खरीद को लेकर निबंधन कराये 653 किसानों में से मात्र नौ किसानों से सरकार के समर्थन मूल्य पर अपना गेहूं बेचा है. जिले में इस बार गेहूं खरीद की स्थिति इतनी लचर बनी हुई है कि गेहूं खरीद के लगभग सवा माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई प्रखंडों में गेहूं खरीद की बोहनी तक नहीं हो सकी है. किसानों की बात अगर छोड़ दें तो गेहूं खरीदने के लिए विभाग द्वारा अधिकृत किये गये पैक्सों के अध्यक्ष भी अपना गेहूं स्वयं अपने पैक्स को नहीं दे रहे हैं. क्योंकि, गेहूं सरकारी समर्थन मूल्य 2275 रुपये प्रति क्विंटल पर बाजार का रेट भारी पड़ रहा है. दरअसल, जब शुक्रवार को कुछ पैक्स अध्यक्षों से बात की गयी, तो पता चला कि उन्होंने भी अपना गेहूं पैक्स को नहीं बेचा है. जबकि, अधिकतर पैक्स अध्यक्ष स्वयं किसान है और अच्छी खेती-बाड़ी करते हैं. सोनहन पैक्स के अध्यक्ष जिन्हें किसानों से गेहूं खरीदने के लिए विभाग ने अधिकृत किया है. किसान संजय जायसवाल ने बताया कि अभी तक उनके पैक्स पर एक भी छटांक गेहूं की खरीद नहीं हुई है. किसानों को बाजार में अधिक दाम मिल रहा है. इसलिए किसान बाजार में ही गेहूं बेच दे रहे हैं. यह पूछे जाने पर उन्होंने अपना गेहूं पैक्स को बेचा है कि नहीं, उनका कहना था कि मेरा गेहूं भी भाई ने बाजार में 2325 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर बेच दिया है. इसी तरह चांद पैक्स के अध्यक्ष जो गेहूं की खरीदारी के लिए अधिकृत है. धनंजय सिंह ने बताया कि अभी तक उनके भी पैक्स पर एक छटांक गेहूं किसानों ने नहीं बेचा है. यह पूछे जाने पर कि आपने अपना गेहूं पैक्स को दिया है कि नहीं, उनका कहना था कि पहले हम किसान हैं. बाद में पैक्स अध्यक्ष. खेती भी एक व्यवसाय है. हम अपना सामान कम दाम पर किसी को क्यूं बेचे, जब हमें उसी सामान का दाम बाजार में अधिक मिल रहा हो. उन्होंने बताया कि वैसे भी वे फाउंडेशन बीज से गेहूं की खेती करते हैं. इसलिए अपना गेहूं उन्होंने बीज निगम को दिया है. बीज निगम के गेहूं में 400 से लेकर 500 रुपये तक बोनस भी मिल जाता है. जगरीया पैक्स के अध्यक्ष संजय पांडेय ने बताया कि अभी तक एक छटांक भी गेहूं की खरीद उनके पैक्स द्वारा नहीं की गयी है. क्योंकि, बाजार भाव चढ़ा होने से कोई किसान सरकार के समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने को नहीं तैयार है. यह पूछने पर कि अपना गेहूं उन्होंने सरकार को बेचा की नहीं. जवाब था कि अपना गेहूं अभी रखे हुए हैं. गेहूं का भाव और ऊपर जायेगा. वैसे विभाग द्वारा अपना गेहूं पैक्स को देने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है. ऐसे में कुछ अपना गेहूं भी स्वयं अपने पैक्स को बेचना पड़ेगा. = सात प्रखंडों में एक भी छटाक गेहूं की खरीदारी नहीं जिले में अब तक अगर सरकारी दर पर गेहूं की खरीद की बात करें, तो शुक्रवार तक जिले में मात्र नौ किसानों ने पैक्स क्रय समितियों को अपना गेहूं बेचा है. जबकि चालू रबी सीजन में गेहूं बेचने के लिए जिले के 653 किसानों द्वारा अपना निबंधन कराया गया था. इस संबंध में जिला सहकारिता पदाधिकारी सह गेहूं क्रय के नोड्ल पदाधिकारी नयन प्रकाश ने बताया कि अभी तक अधौरा और चांद प्रखंड में एक-एक किसान, रामगढ़ प्रखंड में चार किसान तथा रामपुर प्रखंड में तीन किसानों ने अपना गेहूं पैक्स क्रय समितियों को बेचा है. बहरहाल मिलाजुला कर जिले के 11 प्रखंडों में से भभुआ, मोहनिया, चैनपुर, कुदरा, भगवानपुर, दुर्गावती तथा नुआंव यानी सात प्रखंडों में सरकार के समर्थन मूल्य पर एक भी छटाक गेहूं की खरीदारी नहीं हुई है. जबकि, गेहूं की खरीद जिले में 15 मार्च से शुरू है और 15 जून तक गेहूं खरीदा जाना है. लेकिन, स्थिति के अनुसार गेहूं खरीद के लक्ष्य 1182 एमटी के आलोक में लगता नहीं है कि 20 प्रतिशत भी गेहूं की खरीद हो सकेगी.

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