भद्रा के चलते आज देर रात 12.30 से सुबह चार बजे तक होगा होलिका दहन

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= तीन मार्च को चंद्रग्रहण की वजह से इस बाद चार मार्च को मनेगी होली

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= तीन मार्च को चंद्रग्रहण की वजह से इस बाद चार मार्च को मनेगी होली भभुआ सदर. सनातन धर्म में दीपावली के बाद होली का त्योहार सबसे बड़ा पर्व माना जाता है. पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा को प्रदोष काल में होलिका दहन होता है व उसके अगले दिन यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को होली खेली जाती है. रंगों के इस पर्व पर लोग एक-दूसरे को रंग, अबीर व गुलाल लगाकर बधाइयां व शुभकामनाएं देते हैं. इस बार भद्रा नक्षत्र व तीन मार्च को पड़ने वाले चंद्रग्रहण के कारण दो मार्च की देर रात होलिका दहन व चार मार्च को होली का त्योहार मनाया जायेगा. ज्योतिषविद पंडित हरीशंकर तिवारी ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि दो मार्च की शाम 5:55 बजे से शुरू होकर तीन मार्च की शाम 5:07 बजे तक रहेगी. पूर्णिमा के साथ ही भद्रा काल भी रहेगा. उन्होंने बताया कि साल का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा व 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन के लिए उत्तम माना जाता है. वहीं ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है. सूतक काल के दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ व उत्सव करना उचित नहीं माना गया है. इसी कारण 3 मार्च को रंगों का उत्सव नहीं मनाया जायेगा व 4 मार्च को होली खेलना शास्त्रों के अनुसार उचित माना गया है. उन्होंने बताया कि इस बार होलिका दहन का शुभ समय 2 मार्च सोमवार की रात 12:30 बजे से भोर 4:00 बजे तक रहेगा.

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