साढ़े पांच करोड़ के घोटाले में चार लोगों पर वारंट जारी
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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स्वास्थ्य विभाग में 2009 से 2011 के बीच में हुआ था साढ़े पांच करोड़ का घोटाला निगरानी कोर्ट ने चार लोगों के खिलाफ जारी किया वारंट भभुआ (कार्यालय) : स्वास्थ्य विभाग में 2009 से 2011 के बीच हुए साढ़े पांच करोड़ के घोटाला मामले में दो दिनों पूर्व पटना के निगरानी कोर्ट ने भभुआ के […]
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स्वास्थ्य विभाग में 2009 से 2011 के बीच में हुआ था साढ़े पांच करोड़ का घोटाला
निगरानी कोर्ट ने चार लोगों के खिलाफ जारी किया वारंट
भभुआ (कार्यालय) : स्वास्थ्य विभाग में 2009 से 2011 के बीच हुए साढ़े पांच करोड़ के घोटाला मामले में दो दिनों पूर्व पटना के निगरानी कोर्ट ने भभुआ के चार और लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है. इसमें वरुण कुमार सिंह, नरसिंह प्रसाद यादव, नूरहसन व विकास कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं. उक्त मामले में पहले ही सिविल सर्जन रास बिहारी सिंह द्वारा जो प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी, उसमें घोटाले के समय के तत्कालीन सिविल सर्जन डाॅ उचित लाल मंडल, डीपीएम शाहीद कमाल व लेखा प्रबंधक कमलेश कुमार वर्मा को आरोपित बनाया गया था. मामले में तीनों लोगों को सेवा से हटाया जा चुका है और अभी जमानत पर हैं.
इधर, अनुसंधान के क्रम में पुलिस ने चार और लोगों को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट के लिए पटना निगरानी कोर्ट में गुहार लगायी थी. इसके बाद निगरानी कोर्ट ने उक्त गिरफ्तारी वारंट को जारी किया है.
गौरतलब है कि वर्ष 2009 से 2011 के बीच स्वास्थ्य विभाग के तरफ से चलायी जानेवाली योजना जननी बाल सुरक्षा, बंध्याकरण में व्यापक पैमाने पर घोटाला किया गया था. जांच के क्रम में पाया गया है कि एक ही महिला का 12-12 बार प्रसव व बंध्याकरण दिखा कर फर्जी तरीके से पैसे की निकासी की गयी. यहीं नहीं कई ऐसे अस्पतालों एवं एनजीओ के नाम पर पैसे निकाले गये हैं जो कि मौजूद हीं नहीं हैं.
उक्त मामले में तत्कालीन एसपी उमाशंकर सुधांशु ने पांच लोग वरुण कुमार सिंह, नरसिंह प्रसाद यादव, नूरहसन ,विकास कुमार श्रीवास्तव व डा. हनुमान को दोषी पाते हुए गिरफतारी का आदेश दिया था लेकिन, इस मामले के अनुसंधानकर्ता डीएसपी मुख्यालय दिलीप कुमार झा ने जांच के क्रम में पाया कि डाॅ हनुमान नाम का कोई व्यक्ति नहीं है उसके पिता का नाम व पता उपलब्ध नहीं होने के कारण उसके खिलाफ वारंट के लिए न्यायालय में आवेदन नहीं दिया जा सका. जिन लोगों के खिलाफ गिरफतारी वारंट जारी हुआ है उसमें वरुण कुमार सिंह, नरसिंह प्रसाद यादव व नूरहसन एनजीओ के संचालक हैं जबकि विकास कुमार श्रीवास्तव स्वास्थ्य विभाग में हीं डाटा ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं.
क्या कहते हैं डीएसपी
अनुसंधानकर्ता डीएसपी मुख्यालय ने बताया कि जिनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निकला है, उन्हें गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी शुरू कर दी गयी है. जल्द ही सभी आरोपितों को गिरफतार किया जायेगा. साथ ही उन्होंने बताया कि इस मामले में कई और एनजीओ के संचालक चिकित्सक दोषी पाये गये हैं. उनके खिलाफकार्रवाई की जायेगी.
मामले की लगातार हो रही समीक्षा
मामला काफी गंभीर है़. इसमें बड़े पैमाने पर सरकारी राशि गबन की गयी है. इस मामले की लगातार समीक्षा कर रही हूं. इसमें जो लोग भी शामिल होंगे. चाहे वह एनजीओ के लोग हों, चिकित्सक हों या फिर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी या कर्मी उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी.
अभी तक के अनुसंधान में दो दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ गबन के सबूत पाये गये हैं और दोषियों के संख्या लगतार बढ़ती जा रही है. इस मामले में कई एनजीओ संचालक, चिकित्सकों के नाम सामने आ चुके हैं. सभी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जायेगी.
हरप्रीत कौर, एसपी
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