फिर पहले जैसा शहर में इस्तेमाल होने लगा कैरीबैग

Updated at : 24 Aug 2019 8:47 AM (IST)
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फिर पहले जैसा शहर में इस्तेमाल होने लगा कैरीबैग

भभुआ सदर : राज्य सरकार द्वारा पॉलीथिन (कैरीबैग) पर पूर्ण रूप से रोक लगाये जाने के बाद भी इसका धड़ल्ले से शहर में इस्तेमाल किया जा रहा है. नगर पर्षद के छापामार दल के सुस्त पड़ने से किराना दुकान से लेकर अन्य दुकानों पर फिर से इसकी भरमार होने लगी है. सब्जी व किराना दुकानदार […]

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भभुआ सदर : राज्य सरकार द्वारा पॉलीथिन (कैरीबैग) पर पूर्ण रूप से रोक लगाये जाने के बाद भी इसका धड़ल्ले से शहर में इस्तेमाल किया जा रहा है. नगर पर्षद के छापामार दल के सुस्त पड़ने से किराना दुकान से लेकर अन्य दुकानों पर फिर से इसकी भरमार होने लगी है.

सब्जी व किराना दुकानदार भी सस्ती पॉलीथिन में सामान देने की लालच से बच नहीं पा रहे हैं.नप प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने और इसका प्रयोग नहीं करने को लेकर धर-पकड़ या जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा हो. लेकिन, वर्षों की लगी आदत व ग्राहकों के भटकने के भय से दुकानदार नहीं मान रहे है और नहीं ही पॉलीथिन कैरीबैग का प्रयोग करनेवाले लोग.

व्यापारियों पर नहीं दिख रहा प्रतिबंध का असर : 15 अगस्त 2017 से प्लास्टिक बैग पर रोक लगाये जाने के बावजूद भी सब्जी विक्रेता, थोक व खुदरा विक्रेता के साथ-साथ फेरीवाले भी इसका उपयोग खुलेआम तो कुछ छिप छिपा कर कर रहे हैं और आम लोग के साथ छोटे-बड़े व्यापारी भी प्रशासन के निर्देश को ठेंगा दिखा रहे हैं.

वैसे शहर में आम जनमानस में भी प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लेकर अच्छी राय है. मगर लोग भी है कि वह पॉलीथिन कैरी बैग का उपयोग करने से परहेज नहीं कर रहे हैं और शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर सब्जी वाले प्लास्टिक के बैग में ही सब्जियां बेच रहे हैं.

रोक लगने के कुछ दिनों तक तो बंद था, लेकिन विगत कुछ हफ्तों से इसका उपयोग खुलेआम किया जा रहा है. लेकिन, उनके द्वारा कुछ नहीं कहा जाता हैं. वैसे इस एक्ट को प्रासंगिक बनाने के लिए जिला प्रशासन को और भी सख्ती से पेश आने की आवश्यकता मालूम पड़ती है. ताकि, लोग खासकर फुट कर दुकानदार अपनी आदतों से बाज आ जाये और लोग भी घर से झोला लेकर निकलते हुए जान की दुश्मन बनी पॉलीथिन से परहेज करें.

इस तरह के पॉलीथिन हैं प्रतिबंधित

पैकिंग में यूज होने वाली पन्नी

हर तरह के प्लास्टिक पॉलीथिन से बने कैरी बैग

मॉल, सभी रिटेल स्टोर, जनरल स्टोर में प्रतिबंधित, ठेलों और ग्रासरी शॉप पर प्रतिबंधित

इन पॉलीथिन पर नहीं है प्रतिबंध

ऐसी प्लास्टिक जो पैकेजिंग का हिस्सा हो

दूध की थैली, मट्ठा, ब्रेड, नमकीन, पाव- बन

डिस्पोजेबल प्लास्टिक गिलास, प्लेट और चम्मचें

जैव चिकित्सा अपशिष्ट एक्ट 1998 (प्रबंधन व निस्तारण) के तहत अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में यूज की जाने वाली पॉलीथिन इस बैन से अलग है.

पॉलीथिन है हानिकारक कर लीजिए इससे तोबा

शहर में वैसे तो अभी भी चोरी छिपे तो कभी खुलेआम प्रतिबंधित किये जाने वाले पॉलीथिन में ही सामान बेचे जा रहे हैं. इसका सबसे अधिक इस्तेमाल सब्जी और फुट कर विक्रेताओं द्वारा किया जाता है. दरअसल, प्रतिबंधित हुआ पॉलीथिन बैग एक हजार माइक्रोन यानी एक मिलीमीटर के बराबर होता है. ये हमारे बाल के डायोमीटर जितना होता है. इसकी कीमत काफी कम होती है. जिस कारण विक्रताओं द्वारा इसका ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.

क्या कहते हैं नगर पर्षद के इओ

नप इओ अनुभूति श्रीवास्तव ने बताया कि नोटीफिकेशन में साफ तौर पर बताया गया है कि हर तरह के पॉलीथिन (कैरीबैग) को बैन किया गया है और अधिक जानकारी के लिए शहर भर में माइकिंग के अलावे बैनर पोस्टर और पंपलेट के माध्यम से भी नगर पर्षद द्वारा जागरूकता अभियान युद्ध स्तर पर चलाया गया है.

क्या कहते हैं सिटी मैनेजर

सिटी मिशन मैनेजर इसराफिल अंसारी ने बताया कि लगातार छापेमारी अभियान चलाया जाता है. गुरुवार को भी पूरब पोखर के समीप पांच दुकानों से पॉलीथिन जब्त करते हुए सभी दुकानदारों पर आठ हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

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