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प्राचीन तालाब को नगर पर्षद ने कूड़े-कचरे से भर दिया

Updated at : 25 Jul 2019 8:35 AM (IST)
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प्राचीन तालाब को नगर पर्षद ने कूड़े-कचरे से भर दिया

भभुआ : सूबे के मुख्यमंत्री तालाब, कुआं एवं अन्य जलश्रोतों का अस्तित्व समाप्त किये जाने से काफी चिंतित हैं. उन्होंने इसके लिए सभी डीएम, एडीएम, अंचलाधिकारी सहित वरीय अधिकारियों को पत्र लिख सभी तालाब, पोखरा एवं जलश्रोतों को ढूंढ निकाले व अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए टास्क दिया है. यहीं नहीं तालाबों को ढूंढ निकालने के […]

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भभुआ : सूबे के मुख्यमंत्री तालाब, कुआं एवं अन्य जलश्रोतों का अस्तित्व समाप्त किये जाने से काफी चिंतित हैं. उन्होंने इसके लिए सभी डीएम, एडीएम, अंचलाधिकारी सहित वरीय अधिकारियों को पत्र लिख सभी तालाब, पोखरा एवं जलश्रोतों को ढूंढ निकाले व अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए टास्क दिया है.

यहीं नहीं तालाबों को ढूंढ निकालने के मुख्यमंत्री के चिंता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने बहुत पहले समाप्त हो चुके तालाबों को ढूंढने का जिम्मा निगरानी विभाग तक को दे दिया है. लेकिन, कैमूर में नगर पर्षद ही शहर के बीचोबीच पड़नेवाले प्राचीन तालाब के अस्तित्व को समाप्त कर दिया है. कुल मिलाकर तालाब एवं अन्य जलश्रोतों का अस्तित्व समाप्त करने में सरकारी महकमा भी पीछे नहीं है.

शहर के बीचोबीच नगर पर्षद के परिसर में हुआ करता था तालाब : दरअसल, भभुआ शहर के बीचोबीच नगर पर्षद कार्यालय के सामने एक प्राचीन बड़ा तालाब हुआ करता था. लेकिन, नगर पर्षद के लोगों ने उक्त तालाब को कूड़ेदान बना डाला. धीरे-धीरे कूड़े के ढेर से उस तालाब को पूरी तरह पाट दिया.
हालात यह है कि तालाब के स्थल पर कूड़ों का ढेर आज भी लगा हुआ है. उस जगह को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा पाये कि यहां कभी तालाब हुआ करता था. वर्तमान समय में उक्त स्थल पर कूड़े के गाड़ी एवं नगर पर्षद के अन्य सामान रखे गये हैं.
तालाब को पुनर्जीवित करने के लिए नप ने नहीं किया कोई काम : खासबात यह कि मुख्यमंत्री के तालाब, पोखरा एवं जलश्रोतों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त किये जाने के बावजूद नगर पर्षद के कान पर जूं तक नहीं रेंग पाया है. मुख्यमंत्री को तालाब व पोखरा को लेकर चिंता व्यक्त किये करीब 15 दिन हो गये.
लेकिन, इस 15 दिन में भी नगर पर्षद उक्त तालाब के अस्तित्व को वापस लाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. उक्त स्थल पर आज भी पुरानी स्थिति ज्यों की त्यों बरकरार है. अब जरा समझिए कि जिन विभागों के ऊपर तालाब, पोखरा व जलश्रोतों के रक्षा की जवाबदेही है वहीं विभाग तालाब, पोखरा का अस्तित्व समाप्त करेंगे तो आमलोगों को कैसे समझाया जा सकेगा.
क्या कहते हैं नप के कार्यपालक पदाधिकारी
उक्त मामले में पूछे जाने पर नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यालय के सामने एक तालाब हुआ करता था. ऐसी जानकारी मिली है. उस तालाब के साथ साथ शहर के अन्य तालाबों की रिपोर्ट बनाकर नगर विकास विभाग को भेजी जा चुकी है. जैसे ही तालाबों के पुनर्जीवित को लेकर विभाग से योजना आयेगी उक्त तालाब को पुनर्जीवित कर दिया जायेगा.
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