भभुआ : भभुआ थाना क्षे त्र के सीवों गांव में एक राष्ट्रीय पक्षी नर मोर की पेशेवर वन अपराधी द्वारा लाठी से पीट-पीट कर हत्या कर दी गयी. घटना बुधवार की शाम साढ़े सात बजे की बतायी जाती है. पिछले पांच वर्षों से गांव के मंदिर के पीछे पेड़ पर मोर ने अपना बसेरा बना रखा था. ग्रामीणों का प्रिय यह मोर उनके द्वारा दिये गये दाना-पानी पर अपना जिंदगी बसर करता था. मोर की लाठी से पीट कर हत्या से पूरा गांव मर्माहत था. इधर, मोर की हत्या की खबर ग्रामीणों को लगते ही अपराधी गांव छोड़ कर भाग खड़ा हुआ.
जानकारी के अनुसार, अंधेरा होने पर मोर पेड़ पर चला जाता था. सीवों गांव का ही पेशवर वन अपराधी सीता गोड़ द्वारा मोर को लाठी मा रकर पहले गिरा दिया गया. फिर लाठी से पीट कर हत्या कर दी. मोर के मारने के बाद उसे बोरे में कस कर वह ले जाने के फिराक में पड़ा था कि गांव की ही एक महिला ने देख लिया और शोर मचाना शुरू कर दिया गया.
इसके बाद ग्रामीणों को जुटते ही बोरा फेंक कर सीता राम भाग खड़ा हुआ. इसके बाद ग्रामीणों द्वारा इसकी सूचना वन विभाग को दी गयी. वन विभाग के पहुंचने के साथ ही मोर का इलाज कराने का प्रयास किया. लेकिन, तब तक मोर दम तोड़ चुका था.
इस संबंध में रेंज अफसर भभुआ मनोज कुमार ने बताया कि मोर नर था. राष्ट्रीय पक्षी होने के कारण जो वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत राष्ट्र का धरोहर है. उन्होंने बताया कि इस मामले में वन अधिनियम के तहत फरार अपराधी सीता गोंड़ पिता स्व लोचन गोड़ ग्राम सीवों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है. मोर का पोस्टमार्टम कराते हुए उसे मुंडेश्वरी स्थित पवरा पहाड़ी में दफन करा दिया गया है.
हाल में ही जमानत पर छूटा था सीता गोंड़
वन अपराध के मामले में पेशेवर वन अपराधी सीता गोंड़ हाल में ही जेल से जमानत पर निकला था. उपरोक्त जानकारी देते हुए रेंज अफसर भभुआ ने बताया कि सीता गोंड़ पेशेवर वन अपराधी है. उस पर वन पदार्थों की चोरी से लेकर वन प्रक्षेत्र में अवैध लकड़ी काटने आदि के मुकदमें पूर्व से दर्ज है. वन वाद संख्या 8/ एफ के तहत वह जेल भी गया था. हाल में जमानत पर जेल से उसकी रिहाई हुई थी. इसके बाद अब उसके द्वारा राष्ट्रीय पक्षी मोर की हत्या शिकार खाने और पंखों को बेचने के उद्देश्य से कर दी गयी.
ग्रामीणों के दाना-पानी पर कर रहा था जिंदगी बसर
सीवों गांव में पिछले पांच वर्षों से रह रहा मोर ग्रामीणों का प्यारा था. मोर की हत्या के बाद गांव के बच्चा से लेकर बुजुर्ग तक मर्माहत हुए हैं. इस संबंध में ग्रामीण सुजीत पटेल, बहादुर सिंह आदि ने बताया कि वर्ष 2014 में यह मोर कहीं से भटक कर गांव के मंदिर के पास पेड़ पर आ गया था, जो गांव छोड़ कर कहीं नहीं जाता था.
गांव के आस-पास के पेड़ों सहित घरों में गलियों में जहां उसकी जहां मरजी होती थी, भ्रमण करते रहता था. ग्रामीणों द्वारा मोर को खाने-पीन का सामान भी दिया जाता था. कोई उसे मारता नहीं था. पूरे गांव का वह पालतू बने मोर की हत्या ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है.