अब तेल्हाड़कुंड व करकटगढ़ जलप्रपात पर भी बजेगी फोन की घंटी

Updated at : 01 Mar 2019 7:15 AM (IST)
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अब तेल्हाड़कुंड व करकटगढ़ जलप्रपात पर भी बजेगी फोन की घंटी

भभुआ नगर : अब जिले के लोग आसानी से अपने जिले के किसी भी कोने से एक दूसरे से मोबाइल के जरिये बात कर पायेंगे. चाहे वह नक्सल प्रभावित अधौरा हो या चैनपुर या करमचट. इन जगहों में से खासकर अधौरा के तेल्हाड़कुंड व चैनपुर के करकटगढ़ जलप्रपात पर मोबाइल टावर नहीं रहने से लोग […]

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भभुआ नगर : अब जिले के लोग आसानी से अपने जिले के किसी भी कोने से एक दूसरे से मोबाइल के जरिये बात कर पायेंगे. चाहे वह नक्सल प्रभावित अधौरा हो या चैनपुर या करमचट. इन जगहों में से खासकर अधौरा के तेल्हाड़कुंड व चैनपुर के करकटगढ़ जलप्रपात पर मोबाइल टावर नहीं रहने से लोग जाने से कतराते हैं.
लेकिन, इन जगहों सहित जिले के 82 जगहों पर अब आसानी से अब फोन की घंटी बज जायेगी और लोग एक-दूसरे से बात कर सकेंगे. इसके लिए पूर्व सरकार स्तर से जारी निर्देश के बाद अब जिले में स्थल चयनित कर लिया गया है और इसकी सूची पुलिस अधीक्षक ने पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) को भेज दी है.
गौरतलब है कि जिले में खासकर तेल्हाड़कुंड, करकटगढ़ जल प्रपात पर हर रोज जिले के लोग घूमने या पिकनिक मनाने जाते हैं. लेकिन, पिकनिक मनाने जाने के दौरान मोबाइल कनेक्शन नहीं रहने से लोग कभी कभार परेशान हो जाते हैं. यहां तक अधिकांश इन जगहों पर जाने से भी कतराते हैं.
अधौरा प्रखंड में लगाये जायेंगे 46 मोबाइल टावर
एसपी द्वारा जो सूची भेजी गयी उसमें अधौरा प्रखंड में 46 टावर लगानेवाले जगहों की सूची भेजी गयी है. गौरतलब है कि जिले के अधौरा, चैनपुर, चांद व रामपुर प्रखंड में कई ऐसे नक्सल प्रभावित गांव हैं,जहां मोबाइल का टावर नहीं पकड़ता है. मोबाइल टावर नहीं रहने से लोग काफी परेशान हो जाते हैं.
ये लोग बाहर रह रहे अपने परिजनों से महीने में एक या दो दिन ही प्रखंड मुख्यालय आने पर बात हो पाता है. लेकिन, सरकार स्तर पर की गयी पहल और वर्तमान जिला प्रशासन द्वारा भूमि चयनित कर सूची भेज देने से अब इन वनवासियों की परेशानी कुछ हद तक कम हो जायेगी.
नक्सल गतिविधियों पर भी लगेगी लगाम
जिले में नक्सल प्रभावित अधौरा, चैनपुर, चांद, बेलांव, भगवानपुर, रामपुर के कई इलाके या तो जंगल में है या जंगल से सटे हैं. इन जगहों पर मोबाइल का फोन काम नहीं करता है. इसलिए नक्सल गतिविधि की सूचना देने में ग्रामीणों की परेशानी होती है. वहीं पुलिस को भी टावर नहीं रहने का खामियाजा भुगतना पड़ता है.
इसे निजात दिलाने के लिये पुलिस महानिरीक्षक अभियान कुंदन कृष्णन ने सभी जिला पदाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में एक सप्ताह के अंदर भूमि चयनित कर सरकार को उपलब्ध करायी जा सके.
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