भाईचारे की मिसाल बना भभुआ का एक घर
भभुआ सदर (कैमूर) : भभुआ के छावनी मुहल्ला स्थित जिस घर को लोग खरीदने के बाद अपशकुन के डर से बेच देते थे, उस घर में बने मजार ने कुसुम देवी पर ऐसी छाप छोड़ी कि आज यह जगह हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल बनी है. कुसुम देवी बताती हैं कि वर्ष 2000 में जब वह […]
भभुआ सदर (कैमूर) : भभुआ के छावनी मुहल्ला स्थित जिस घर को लोग खरीदने के बाद अपशकुन के डर से बेच देते थे, उस घर में बने मजार ने कुसुम देवी पर ऐसी छाप छोड़ी कि आज यह जगह हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल बनी है. कुसुम देवी बताती हैं कि वर्ष 2000 में जब वह पति के साथ इस घर को खरीदने आयीं तो पता चला कि उनसे पहले 10 से 12 लोग उस मकान को खरीद कर बेच चुके थे. मुहल्ले के लोगों ने बताया कि इस घर में जो भी रहा है, उसका कुछ न कुछ अहित ही हुआ.
लेकिन, वह लोगों के इस अंधविश्वास से डरी नहीं. घर के अंदर जाकर देखा तो वहां एक मजार मिला, जिसे देख उनकी उत्कंठा जागी कि वह भी रमजान के महीने में रोजा रखते हुए भगवान के साथ-साथ खुदा की भी इबादत कर लिया करेंगी. इसके बाद वह घर खरीद कर उसमें पति, दो बेटे व तीन बेटियों के साथ रहने लगीं. घर खरीदने के बाद पहले रमजान से ही रोजा रख कर खुदा की इबादत करने का जो सिलसिला शुरू हुआ, कुसुम आज तक उसे आगे बढ़ाये जा रही हैं. वह बताती हैं कि उनके घर बने मजार पर हिंदू-मुस्लिम दोनों ही अपने-अपने त्योहारों पर दुआएं मांगने पहुंचते हैं.
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