मोहनिया प्रखंड मुख्यालय में न पानी की सुविधा, न ही बना है सुलभ शौचालय

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अव्यवस्था . कार्यालय में अपना काम कराने रोज आते हैं हजारों लोग महिलाओं को होती है अधिक परेशानी खराब पड़े हैं चार चापाकल मोहनिया सदर : दीपक तले अंधेरा वाली कहावत प्रखंड मुख्यालय में चरितार्थ होती नजर आ रही है. पंचायतों में शौचालय बनवाने व ओडीएफ करने को लेकर जिस तरह प्रशासन सक्रिय दिख रहा, […]

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अव्यवस्था . कार्यालय में अपना काम कराने रोज आते हैं हजारों लोग

महिलाओं को होती है अधिक परेशानी
खराब पड़े हैं चार चापाकल
मोहनिया सदर : दीपक तले अंधेरा वाली कहावत प्रखंड मुख्यालय में चरितार्थ होती नजर आ रही है. पंचायतों में शौचालय बनवाने व ओडीएफ करने को लेकर जिस तरह प्रशासन सक्रिय दिख रहा, उस हिसाब से देखा जाये तो प्रखंड प्रशासन के नाक के नीचे यानी प्रखंड मुख्यालय में एक भी सुलभ शौचालय का नहीं होना स्वच्छता पर सवालिया निशान लगाता है. जहां स्वच्छता को लेकर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर शौचालयों का निर्माण करा पंचायतों को पूरी तरह खुले में शौच मुक्त करना चाहती है,
वहीं अनुमंडल के सबसे बड़े प्रखंड मुख्यालय मोहनिया में न तो एक भी सुलभ शौचालय की व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की. यहां लगे छह चापाकलों में से चार लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिनकी सुध लेना प्रखंड प्रशासन भी मुनासिब नहीं समझता है. जबकि, आये दिन यहां हजारों की संख्या में महिला व पुरुषों का आना जाना होता है. अपने कागजी कार्यों को लेकर यहां आनेवाली महिलाओं को यदि टॉयलेट लगे, तो भला वह कहां जायेंगी. जबकि, बस स्टैंड में स्थित सुलभ शौचालय की दूरी मुख्यालय से लगभग एक किमी है.
महिलाएं भी आती हैं मुख्यालय: इस प्रखंड परिसर में सभी विभागों के लगभग एक दर्जन कार्यालय स्थित है, जिसमें अपने विभिन्न कागजी कार्यों को लेकर हजारों लोगों का आवागमन होता है. हालांकि, इसमें से अधिकांश कार्यालय तो प्रखंड स्तर तक ही सीमित है. लेकिन, पुलिस निरीक्षक कार्यालय के साथ यहां स्थित अवर निबंधन कार्यालय लोगों के आने का सबसे बड़ा जरिया है. अनुमंडल के पांचों प्रखंडों के 69 पंचायतों, 694 गांवों सहित नगर पंचायत से प्रतिदिन लगभग हजारों लोग यहां आते हैं. मुख्यालय में आनेवाले लोगों की संख्या का एक बड़ा भाग जमीन की खरीद व बिक्री के लिए आता है, जिनमें अधिक संख्या महिलाओं की होती है.
बड़ी संख्या में लोगों की सोच होती है कि पारिवारिक बटवारे की हिस्सेदारी से बचने के लिए जमीन खासकर पत्नी के नाम ही रजिस्ट्री कराना पसंद करते है, जिसका नतीजा है कि अनुमंडल भर से महिलाएं काफी संख्या में यहां आती है. इस निबंधन कार्यालय से विभाग को सालाना लगभग 16 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है. इतनी संख्या में लोगों के आवागमन के बावजूद यहां सुलभ शौचालय के साथ पीने के पानी की सुविधा का नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता का परिचायक है.
शिक्षा विभाग ने भी लटकाया शौचालयों में ताला
पूर्व में प्रखंड मुख्यालय में आनेवाली खासकर महिलाएं टॉयलेट के लिए बीआरसी में बने शौचालयों का प्रयोग कर लेती थी. लेकिन, साफ सफाई की कमी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने भी अपने शौचालयों में ताला बंद कर दिया है, जो शिक्षा विभाग के कर्मियों के लिए ही आवश्यकता पड़ने पर खोला जाता है. ऐसी स्थिति में यहां आनेवाली महिलाओं को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है. रहा पीने के पानी का सवाल तो बीआरसी में लगे एक चापाकल के सहारे लोग अपनी प्यास बुझाते हैं.
वह भी सबकों नहीं मालूम है कि यहां पीने का पानी कहां मिलेगा. दुकानदार इसी चापाकल से पानी लाते है. जबकि, अन्य सभी कार्यालयों के लिए पानी खरीद कर लाया जाता है. बीच में नगर पंचायत द्वारा प्रखंड मुख्यालय में छह शौचालयों के निर्माण की बात चल रही थी. आज तक उसका भी कोई अता पता नहीं चल रहा है और न ही प्रखंड प्रशासन इस तरफ ध्यान दे रहा है.
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