होलिका दहन के साथ शुरू हो गया जिले में होली का त्योहार

Published by : AMLESH PRASAD Updated At : 13 Mar 2025 9:05 PM

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जिले में गुरुवार को होलिका दहन के साथ ही होली का महान और पारंपरिक पर्व शुरू हो गया. शहर के विभिन्न मोहल्ले के चौक चौराहों के अलावा कई जगह नदियों में तो प्रत्येक प्रखंड के हर गांव में होलिका दहन किया गया.

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जहानाबाद.

जिले में गुरुवार को होलिका दहन के साथ ही होली का महान और पारंपरिक पर्व शुरू हो गया. शहर के विभिन्न मोहल्ले के चौक चौराहों के अलावा कई जगह नदियों में तो प्रत्येक प्रखंड के हर गांव में होलिका दहन किया गया. इस अवसर पर लोगों ने होलिका की आग में अपनी बुराइयों को भस्म कर नये संवत साल में नये जीवन शुरुआत की. इस अवसर पर नवयुवकों ने जगह-जगह होलिका दहन के स्थल पर लकडियों के ढेर जमा किए उसमें गाय के गोबर के उपले सजाये गये. इसके बाद पुरोहित के द्वारा मंत्र उच्चारण के साथ अग्नि और भक्त प्रहलाद की पूजा की गयी. होलिका की परिक्रमा की गयी. इसके बाद उसे अग्नि को समर्पित कर दिया गया. होलिका दहन के साथ ही पूरे वातावरण में होली के गीत की गीत सुनाई देने लगी. होलिका दहन के स्थल के अलावा विभिन्न मंदिरों और गांव के चौपाल पर होली के गीत गाये जा रहे थे. होलिका दहन के बाद लोगों ने एक दूसरे को होलिका की राख लगाकर होली पर्व का शुभारंभ किया. इस अवसर पर अगजा की आग में किसानों के अलावा आम लोगों ने चने की झिंगरी, गेहूं की बाल और आलू पकाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया और अपने रिश्तेदारों तथा इष्ट मित्रों को भी प्रसाद खिलाया. इस अवसर पर युग युवकों ने लुकवारी भी खेला. लुकवारी परंपरागत रूप से कपड़े का एक बॉल बनाकर उसे तेल में डूबा कर उसे पर लोहे की तार की जाली की तरह बांधकर होलिका की आग से उसे जलाया जाता है इसके बाद युवक उस आग लगी हुई लुकवारी को मुकदर की तरह भांजते हैं. इस अवसर पर प्रत्येक घर में विभिन्न प्रकार के पकोड़े जिसे आम बोलचाल की भाषा में बचका कहा जाता है बनाया गया. कई घरों में होलिका दहन के अवसर पर ही पूए भी बनाए गए. गृहणियों द्वारा बनाए गए पकौड़े और पूए को होलिका में डालकर उसके बाद सपरिवार इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया.

सनातन धर्म में हिंदू मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक वर्ष फागुन मास की पूर्णिमा की रात्रि में होलिका दहन किया जाता है. इसके अगले दिन से ही हिंदू मान्यता के अनुसार नए साल के संवत की शुरुआत हो जाती है. फागुन मास की पूर्णिमा के बाद चैत्र मास का प्रारंभ होता है. हिंदू विक्रम संवत के अनुसार इसी दिन हिंदी तिथि से नए वर्ष की शुरुआत होती है. गुरुवार की सुबह 10:11 से पूर्णिमा प्रारंभ हो गया. हालांकि पूर्णिमा के साथ ही 10:11 से ही भद्रा नक्षत्र भी शुरू हो गया जिसमें शुभ कार्य करना वर्जित होता है. यह भद्रा नक्षत्र गुरुवार की रात्रि 10:37 थी. इसी कारण गुरुवार को जिले भर में होलिका दहन 10:37 के बाद हीं किया गया. हालांकि भद्रा नक्षत्र तो 10:37 के बाद समाप्त हो गया किंतु शुभ मुहूर्त रात 11:26 मिनट से शुरू हुआ. इसके बाद पूरी रात शुभ मुहूर्त ही रही. इस कारण कुछ जगहों पर होलिका दहन 10:37 के बाद की गयी. जबकि ज्यादातर जगहों पर शुभ मुहूर्त में लोगों के द्वारा 11:26 के बाद ही होलिका दहन किया गया.

होलिका दहन आपसी कटुता और बुराई को होलिका की आग में दहन करने का नाम है. अपने बुरे कर्म और आदतों को होलिका में समर्पित कर होली के दिन से एक नई जिंदगी शुरू करने की सीख बड़े बुजुर्ग पीढ़ी दर पीढ़ी अपने बच्चों को देते आ रहे हैं. कहा जाता है कि होली के दिन दुश्मन भी एक दूसरे के गले लग जाते हैं. आपसी द्वेष और ईर्ष्या होलिका में दहन किया जाता है. होली हिंदू वर्ष कैलेंडर का पहला दिन है यानी नव वर्ष है. इसी कारण सारे पुराने कड़ुवाहट, द्वेष और ईर्ष्या को खत्म कर नव वर्ष की शुरुआत की जाती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार होली के दिन ही नव वर्ष के अवसर पर पारंपरिक तरीके से लोग एक-दूसरे पर रंग उड़ेल कर उनकी जिंदगी को रंगीन और खुशहाल बनाने की कामना करते हैं. होलिका दहन से जुड़ी हुई एक पुरानी कथा है कि अत्याचारी राजा हिरण्यकशपू भगवान विष्णु के अनन्य भक्त और अपने पुत्र प्रहलाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर लकड़ियां की बनी चिता पर बैठने का निर्देश दिया था. होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी. इसके लिए उसे वरदान में एक दुशाला मिली हुई थी. होलिका उसी दुशाला को ओढ़ कर नन्हे भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर लकड़ियों की चिता पर बैठ गयी थी, किंतु भगवान की माया से होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद हरि का नाम लेते हुए चिता से बाहर आ गये, तभी से बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में हर वर्ष होलिका दहन का त्यौहार मनाया जाता है. हिरण्यकशपू की बहन होलिका के कारण ही इसका नाम होलिका दहन पड़ा.

कल मनायी जायेगी होली : मगध प्रक्षेत्र सहित जहानाबाद जिले में भी गुरुवार की रात्रि में होलिका दहन के बाद इस वर्ष होली शुक्रवार को नहीं मनाई जाएगी, बल्कि इसके बदले शनिवार को होली का पर्व मनाया जायेगा. पुरोहित उमेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि शुक्रवार को मरजाद रहेगा क्योंकि शुक्रवार की सुबह 11:15 बजे दिन तक पूर्णिमा का ही मुहूर्त रहेगा. पूर्णिमा बरकरार रहने के कारण शुक्रवार को शास्त्रों के अनुसार होली नहीं मनाई जा सकती क्योंकि शास्त्रों में उदीयमान तिथि से ही कोई भी पर्व त्योहार मनाने की परंपरा है. शुक्रवार को 11:15 बजे तक पूर्णिमा ही रहेगी इस कारण उदीयमान तिथि से गुरुवार की रात्रि 10:37 के बाद पूर्णिमा होने के बावजूद शुक्रवार को पूर्णिमा की तिथि मानी जायेगी. होली पूर्णिमा के अगले दिन सुबह में मनाई जाती है. ऐसे में उदीयमान (सूर्योदय के बाद आने वाला अगला दिन) तिथि के आधार पर शास्त्र के अनुसार मगध क्षेत्र के साथ-साथ जहानाबाद जिले में शनिवार को होली का पर्व मनाया जायेगा.

उमंग में डूबे हैं जिले के युवाहोली नई उमंग और खुशी का त्योहार है. होली के समय ठंड खत्म हो जाती है. बसंत के एक माह पूरा होने के बाद धूप में तीखापन आने लगता है. इस समय तक किसानों के खेत में अधिकांश फसल पककर तैयार हो जाते हैं. ऐसे में खेत खलिहान से लेकर गांव जेवार सहित हर और उमंग छाया रहता है. ऐसे में होली का पर्व हर उम्र के लोगों में उमंग भर देता है. खासकर युवा वर्ग होली के उमंग में नाचने गाने लगते हैं. होली के आगमन के साथ ही पूरा जिला उत्साह और उमंग में डूब गया है. बच्चों से लेकर युवा पुरुष से लेकर महिला और जवान से लेकर बुजुर्ग तक सभी होली की उमंग और उत्साह के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं.

पूरे दिन हुई खरीदारी

गुरुवार को भी पूरे दिन लोग जमकर होली की खरीदारी में जुटे रहे. बच्चे रंग अबीर और पिचकारी खरीद रहे थे, तो बड़े कपड़े, मिठाइयां और होली के लिए बनाए जाने वाले पकवान और पूजा की सामग्री की खरीदारी में जुड़े रहे. इसके लिए डालडा, रिफाइन, तेल, चीनी, मैदा, ड्राई फ्रूट, कई तरह के नमकीन, मिक्सचर कोल्ड ड्रिंक और पूजन सामग्री की खरीदारी की जा रही थी. कपड़ों में ज्यादातर बच्चे और बड़ों के लिए कुर्ता-पायजामा तथा महिलाओं के लिए सूती साड़ी की खरीदारी की जा रही थी. वहीं बच्चे तरह-तरह की पिचकारी खरीदने में मशगूल है. होलिका दहन के अवसर पर विभिन्न प्रकार के पकौड़े बनाने के लिए भी सामग्री खरीद की जा रही थी. इसके लिए कच्चा चना जिसे देहाती भाषा में झिंगरी कहा जाता है की जमकर खरीदारी हो रही थी. पकोड़े के लिए विभिन्न प्रकार की सब्जियां और ब्रेड भी खरीदी जा रही थी. विभिन्न प्रकार की मिठाइयां खरीदने के लिए स्वीट भंडार पर भी लोगों की भीड़ लगी थी.

बाजार की सड़कों पर लगता रहा भारी जामहोली के अवसर पर खरीदारी के लिए लोग बाजार में उमड़ पड़े जिसके कारण गुरुवार को भी पूरे दिन बाजार की सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ देखी गयी. हाल यह था कि बाजार की सड़कों पर तिल रखने की भी जगह नहीं थी. पूरे शहर में खरीदारों की भीड़ के कारण सुबह से ही सड़कों पर जाम की स्थिति बनी थी. खासकर बाजार जाने वाली सड़कों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा था. वहीं खरीदारों के कारण कपड़ा किराना मिठाई और रंग अबीर और पिचकारी बेचने वाले की दुकानों पर भारी भीड़ लगी थी.

पुलिस दल की गश्ती हुई तेज

होली के अवसर पर पर्व को शांतिपूर्ण संपन्न करने के लिए पूरे जिले में पुलिस की गश्ती तेज कर दी गई है. पुलिस गश्ती के अलावा हर प्रमुख स्थान और चौक चौराहों पर मजिस्ट्रेट नियुक्त किये गये हैं. लॉ एंड ऑर्डर को नियंत्रित करने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है जिससे हर गश्ती दल जुड़ा है. अफवाह फैलाने वाले लोगों और सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की कड़ी नजर है. डीएम अलंकृता पांडेय ने सभी जिलावासियों से हर्षोल्लास और आपसी भाईचारे के साथ मिल-जुलकर होली मनाने की अपील की है. इधर एसपी ने ला एंड ऑर्डर बहाल रखने में प्रशासन की मदद करने का आह्वान किया है. उन्होंने कहा है कि होली के पावन अवसर पर लोग एक-दूसरे से मिलकर सौहार्दपूर्ण वातावरण में होली खेले. एसपी ने कहा कि गड़बड़ी पैदा करने वाले और अफवाह फैलाने वाले लोगों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जायेगा. उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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