JPSC में सिर्फ घोटाले ही नहीं हुए, CBI से जानकारी भी छुपाई गई

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जेपीएससी में हुए घोटालों का पर्दाफाश CBI की चार्जशीट और CID की हालिया रेड से हुआ है. CBI ने 12 साल की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें गड़बड़ियों और जानकारी छिपाने का खुलासा हुआ.

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रांची से पंकज त्रिपाठी की रिपोर्ट

JPSC की जांच कर सीबीआइ ने दो साल पहले ही अपनी चार्जशीट सीबीआइ कोर्ट में सौंप दी थी. इसमें वही खुलासे हुए हैं, जो अभी सीआइडी की रेड में सामने आये हैं. सीबीआइ ने लगभग 12 साल तक जांच करने के बाद कोर्ट को पूरी जानकारी दी. जांच में बताया गया कि जेपीएससी में केवल गड़बड़ियां ही नहीं हुईं, बल्कि उसके अधिकारियों ने जांच में सहयोग भी नहीं किया. कई तथ्यों को गोपनीयता के नाम पर छिपाने का प्रयास किया गया. परीक्षाओं में गड़बड़ी करने के लिए मनमाने तरीके से एजेंसी का चयन पहली सिविल सेवा परीक्षा के बाद से ही शुरू हो गया था. द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा के लिए जिस एजेंसी का चयन किया गया, वह नियमसम्मत नहीं था.

यह चार्जशीट सीबीआइ ने दो साल पहले ही कोर्ट में सौंप दी थी, लेकिनअब तक ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है. अब जेपीएससी के उप परीक्षा नियंत्रक, परीक्षा लेनेवाली एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक की गिरफ्तारी और तत्कालीन चेयरमैन के यहां हुई सीआइडी की रेड के बाद ऐसा लगने लगा है कि जेपीएससी में गड़बड़ियों का सिलसिला दो दशक पहले शुरू हुआ और अब तक बदस्तूर जारी है. गड़बड़ी का पैटर्न भी लगभग समान है. पहले विजिलेंस ने जांच की और गड़बड़ियां पायीं, फिर सीबीआइ ने जांच कर कई राज खोले और अब एक बार फिर सीआइडी वहां की अनियमितताओं की जांच कर रही है.

सीबीआइ ने चार्जशीट में बताया

जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष दिलीप प्रसाद के भाई, सदस्य गोपाल प्रसाद, शांति देवी के रिश्तेदार, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के पीएस तथा रिश्तेदार, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो के भाई, पूर्व एमएलए राधाकृष्ण किशोर के भाइयों की हुई नियुक्तियां. सभी की भर्तियां संदेहास्पद.

सिविल सेवा परीक्षा में CBI ने अपनी रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासे किये

गोपनीयता की आड़ में रिकॉर्ड छिपाया गया

जेपीएससी ने इंटरव्यू बोर्ड का गठन कैसे किया और उसमें सदस्यों का चयन किस आधार पर किया गया, इसकी जानकारी सीबीआइ को नहीं दी. गोपनीयता का हवाला देकर आयोग ने इससे संबंधित कोई रिकॉर्ड जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराया. आयोग ने यह भी नहीं बताया कि उसके पदाधिकारियों के रिश्तेदार परीक्षा में शामिल हुए थे या नहीं, जबकि आवेदन पत्र में इसके लिए अलग से कॉलम दिया गया था.

OMR स्कैनिंग में गड़बड़ी की पूरी गुंजाइश थी, कंप्यूटर आज तक नहीं मिला

ओएमआर स्कैनिंग मशीन (आपूर्तिकर्ता : मेसर्स एसपीएस लिमिटेड, नयी दिल्ली) में स्वयं की मेमोरी नहीं थी. इसे एक कंप्यूटर से जोड़कर मनचाहा प्रोग्राम किया जा सकता था. स्कैनिंग जेपीएससी के स्ट्रॉन्ग रूम में गुप्त तरीके से हुई. पूरी प्रक्रिया एजेंसी के एक व्यक्ति धीरज कुमार ने अपने निजी कंप्यूटर का इस्तेमाल कर पूरी की. बाद में जब वह जेपीएससी से अलग हुआ, तो अपना कंप्यूटर भी साथ ले गया. जांच के दौरान वह कंप्यूटर कभी बरामद नहीं हो सका.

जांच एजेंसी के चयन में फर्जी और बैकडेटेड पत्र का खुलासा

रिकॉर्ड से पता चला कि पहली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रोसेसिंग का काम मेसर्स आइकॉन्स को दिया गया था. द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा में यह काम एनसीसीएफ एजेंसी को सौंपा गया, लेकिन एजेंसी का चयन किस पत्र के आधार पर हुआ, इसका रिकॉर्ड नहीं मिला. अधिकारियों ने एनसीसीएफ को काम सौंपनेवाला 15 जून 2006 का पत्र प्रस्तुत किया, लेकिन वह मूल फाइल में कहीं दर्ज नहीं था. जांच में इसे बैकडेटेड (पीछे की तारीख में तैयार) पत्र माना गया.

गर्मी की छुट्टियों में गुपचुप मूल्यांकन

मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं वाराणसी भेजी गयीं और मई से जुलाई 2007 के बीच, जब कॉलेज और विश्वविद्यालय गर्मी की छुट्टियों के कारण बंद रहते हैं, बिना विश्वविद्यालय की अनुमति के इतिहास विभाग परिसर में उनका मूल्यांकन कराया गया. परीक्षा सामग्री लाने और ले जाने के लिए एक अधिकारी को विशेष रूप से राज्य से बाहर भेजा गया.

इंटरव्यू पैनल के गठन में नियमों का उल्लंघन, मनमाने अंक दिये गये

जेपीएससी विनियम, 2002 का उल्लंघन कर इंटरव्यू बोर्ड का गठन किया गया. अलग-अलग सदस्यों द्वारा एक ही अभ्यर्थी को दिए गये अंकों में 10 से 180 अंकों तक का अंतर पाया गया, जिसे सामान्य मूल्यांकन प्रक्रिया में असंभव माना गया.

क्या है जांच रिपोर्ट में ?

जांच रिपोर्ट में दर्ज है कि वर्ष 2006 से 2008 के दौरान डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, सेल्स टैक्स ऑफिसर सहित अन्य पदों पर अपात्र अभ्यर्थियों का चयन रिकॉर्ड में हेराफेरी और निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर किया गया. इसके आधार पर चार दर्जन से अधिक आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य धाराओं में मुकदमा चलाने की सिफारिश की गयी.


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भूमि शर्मा

लेखक के बारे में

By भूमि शर्मा

भूमि शर्मा पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ बतौर कंटेंट राइटर जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में वह मुख्य रूप से जमशेदपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों की खबरों को कवर करती हैं. इससे पहले वह एजुकेशन बीट और झारखंड बीट पर भी काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने शैक्षणिक बदलावों और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर लेखन किया है।

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