जिले के गांवों में महीनों से घर-घर कचरा का नहीं हो रहा उठाव

जिले के सभी पंचायत में दो साल पहले करोड़ों की लागत से कचरा प्रबंधन करने की योजना बनाई गई थी.
अरवल.
जिले के सभी पंचायत में दो साल पहले करोड़ों की लागत से कचरा प्रबंधन करने की योजना बनाई गई थी. घर घर डस्टबिन का वितरण, ठेला, ई-रिक्शा, अपशिष्ट प्रबंधन इकाई बनाये गये थे. सफाई कर्मियों की बहाली सभी पंचायत में किया गया था. और सफाई कर्मियों की पोशाक भी खरीदे गए थे. लेकिन महज 30 रुपए महीने के लिए ये योजना सुचारू रूप से नहीं चल रही है. सफाई कर्मियों के वेतन के लिए प्रत्येक घर से कचरा उठाव का शुल्क 30 रुपये देना था. लेकिन ग्रामीण कचरा उठाओ शुल्क नहीं दे रहे हैं. जिसके कारण सभी ग्राम पंचायत में कचरा प्रबंधन का काम पूरी तरह से ठप है. गांव की गलियों और खेतों में कचड़ा फैला हुआ है. इसके अलावा 13वीं और 15वीं वित योजना से सफाई कर्मियों की वेतन भुगतान करने का प्रावधान है. लेकिन दोनों योजनाओं में पैसे नहीं है जिससे सफाई कर्मियों का कई माह से वेतन नहीं मिला है. सफाई कर्मी काम छोड़ दिए हैं.कचरा प्रबंधन के उपकरण होने लगे खराब :
जिला के पंचायत में पिछले छह माह से वार्ड में कचरा का उठाव नहीं हो रहा है, जिसके कारण जैसे तैसे रखा गया ठेला भी टूट गया है. कचरा प्रबंधन के लिए हरे और नीले रंग के डब्बे मुहैया कराए गए थे वो भी टूट गया है. कचरा प्रबंधन के लिए ई-रिक्शा खरीदे गये थे, लेकिन छह माह चलने के बाद रिपेयरिंग नहीं होने से वह भी बर्बाद हो रहा है. कुछ सफाई कर्मी ठेला को अपने निजी काम में उपयोग कर रहे हैं. अगर इसी तरह से एक दो महीने खुले में पड़े रहे तो निश्चित तौर पर कचरा उठाव के लिए ली गई सामग्री पूरी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जायेगी और पुन: कचरा उठाव के लिए लाखों रुपए खर्च कर ठेला रिक्शा लेने पड़ सकते हैं.अपशिष्ट प्रबंधन इकाई हुआ बेकार : कचरा प्रबंधन के लिए सभी पंचायतों में अपशिष्ट प्रबंधन इकाई को तैयार करना था. जिसमें 45 से ऊपर अपशिष्ट प्रबंधन इकाई बनकर तैयार भी हुआ था. बड़े ताम झाम से तत्कालीन जिला पदाधिकारी के द्वारा उद्घाटन भी हुआ था. लेकिन उद्घाटन के बाद भी कई अपशिष्ट प्रबंधन इकाई में कचरा को रखा ही नहीं गया.
कचरा से खाद तैयार करने की योजना अधर में :
अपशिष्ट प्रबंधन इकाई में रखे गए अलग अलग कचरों से पंचायतों में जैविक खाद तैयार करना था. लेकिन ग्रामीण क्षेत्र से कचरा का उठाव नहीं होने के कारण यह योजना. पर ग्रहण लग गया. सभी बनकर तैयार हुए अपशिष्ट प्रबंधन इकाई अब बेकार होकर रह गए हैं.. अधिकतर अपशिष्ट प्रबंधन इकाई संबंधित मुखिया के द्वारा अपने निजी कार्यों के लिए उपयोग किया जा रहा हैं. या जुआरियों का अड्डा बनकर रह गया है.क्या कहते हैं अधिकारी
सफाई कर्मियों के वेतन भुगतान नहीं होने के कारण सफाई कर्मी काम नहीं कर रहे हैं. ग्रामीण 30 रुपये मासिक शुल्क नहीं दे रहे हैं जिससे सफाई कर्मियों को वेतन नहीं मिल रहा है. सरकार के यहां से लोहिया स्वच्छता योजना में इस महीने पैसे आने की उम्मीद है. पैसे आते ही सफाई कर्मियों का वेतन भुगतान कर दिया जायेगा और कचरा उठाव फिर से शुरू हो जायेगा़ नीलेश कुमार, जिला स्वच्छता समन्वयक, अरवलडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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