Jehanabad : एजेंसी को 62 लाख देने के बाद भी सफाई व्यवस्था बदहाल

नगर परिषद के सफाई एजेंसी को शहर की सफाई के एवज में प्रति माह 62 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है. आउटसोर्सिंग एजेंसी को इस भुगतान के एवज में पूरे शहर के सभी प्रमुख और अन्य सड़कों के साथ-साथ सभी 33 वार्डों की गली-नाली की सफाई और कूड़े का उठाव दोनों पाली में करना है.
जहानाबाद
. नगर परिषद के सफाई एजेंसी को शहर की सफाई के एवज में प्रति माह 62 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है. आउटसोर्सिंग एजेंसी को इस भुगतान के एवज में पूरे शहर के सभी प्रमुख और अन्य सड़कों के साथ-साथ सभी 33 वार्डों की गली-नाली की सफाई और कूड़े का उठाव दोनों पाली में करना है. आउटसोर्सिंग एजेंसी की जिम्मेवारी पूरे शहर को साफ सुथरा और स्वच्छ रखने की है. बावजूद इसके दशहरा की सफाई के लिए एजेंसी को सफाई कर्मी की कमी महसूस हो रही है, जिसके कारण दशहरा दीपावली और छठ पर्व के अवसर पर शहर की सफाई के लिए प्रतिदिन 50 से 60 अतिरिक्त दैनिक मजदूरों को सफाई के काम में लगाया जा रहा है. इन मजदूरों को प्रतिदिन के हिसाब से दैनिक मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है. अगर प्रतिदिन 50 मजदूरों को सफाई के काम में लगाया जाता है तो उन्हें सरकारी न्यूनतम दैनिक मजदूरी 423 प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी के एवज में 21000 रुपये का भुगतान हर दिन करना होगा. जबकि अगर 60 मजदूर को शहर की सफाई में शामिल किया जाता है तो प्रतिदिन अतिरिक्त 25000 खर्च होंगे. जबकि नगर परिषद द्वारा नियुक्त आउटसोर्सिंग सफाई एजेंसी को हर तरह की सफाई की जिम्मेदारी पहले से ही मिली हुई है. पिछली एजेंसी के द्वारा घर-घर से कूड़े का उठाव किया जा रहा था लेकिन जब से यह एजेंसी आई है तब से घर-घर से कूड़े का उठाव नहीं किया जा रहा है. वार्डों की गलियों में प्रतिदिन झाड़ू भी नहीं लगाया जाता है. झाड़ू केवल मुख्य सड़कों पर ही लगाया जा रहा है. सफाई का आलम यह है कि शहर के ज्यादातर वार्डों में गंदगी पसरी हुई है. ज्यादातर नाले और नालियां जाम है जिसके कारण थोड़ी सी बारिश होने पर सड़कों और गलियों में जल जमाव उत्पन्न हो जाता है. शहर के कई वार्डों के कई मुहल्ले में नाली की उड़ाही और नियमित सफाई नहीं होने के कारण साल के 9 महीने नाली का पानी गलियों में बहता रहता है. नाली से घर से निकलने वाले पानी का निकास नहीं हो पता है, केवल भीषण गर्मी के समय सूरज के ताप से पानी सूखता है जिसके कारण लोगों को गर्मी में जल जमाव से कुछ राहत मिलती है. बाकी के अन्य महीनो में लोगों को नाली के उसी गंदे पानी में प्रवेश कर आना जाना पड़ता है. ऐसे में पीड़ित मोहल्ले के लोग त्राहिमाम कर रहे हैं. गंदगी और जल जमाव के बीच रहने वाले मुहल्ले के लोग सफाई के लिए हर स्तर पर गुहार लगा लगाकर थक चुके हैं. शिकायत के बाद एक दो सफाई कर्मी जाकर नाले के ऊपर के कचरे को छान देते हैं और सफाई की खान पूर्ति कर चले जाते हैं. इससे न तो जलजमाव की समस्या खत्म होती है और न लोगों की पीड़ा कम होती है. शहर की प्रमुख सड़कों से जुड़े हुई नालों का भी यही हाल है. इस मामले में शिकायत मिलने पर जिला पदाधिकारी अलंकृता पांडेय के द्वारा अपर समाहर्ता विभागीय जांच को मामले की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. अपार समाहर्ता विभागीय जांच के द्वारा अभी मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपी जानी बाकी है.
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