डंपिंग जोन के लिए नहीं मिल रही भूिम

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समस्या. कचरा फेंकने के लिए 54 साल बाद भी नहीं हुई स्थायी व्यवस्था दो बार निकाली गयी निविदा, किसी ने नहीं दिखायी दिलचस्पी जहां-तहां फेंके जाते हैं कूड़े, बीमारी फैलने की रहती है आशंका घोसी मोड़ पर डंप किये जाने को लेकर हो चुका है विवाद जहानाबाद : शहर के गली-मुहल्लों से उठाव किये जाने […]

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समस्या. कचरा फेंकने के लिए 54 साल बाद भी नहीं हुई स्थायी व्यवस्था

दो बार निकाली गयी निविदा, किसी ने नहीं दिखायी दिलचस्पी
जहां-तहां फेंके जाते हैं कूड़े, बीमारी फैलने की रहती है आशंका
घोसी मोड़ पर डंप किये जाने को लेकर हो चुका है विवाद
जहानाबाद : शहर के गली-मुहल्लों से उठाव किये जाने वाले कूड़े-कचरे का स्थायी तौर पर संग्रह करने के लिए अब तक यहां डंपिंग जोन नहीं बन सका. पहले नगर पालिका और अब नगर पर्षद का दर्जा मिले 54 साल गुजर गये लेकिन डंपिंग जोन बनाने की दिशा में नगर पर्षद को सफलता नहीं मिल रही है. 1962 में नगर पालिका का गठन हुआ था और इसके बाद वर्ष 2007 में नगर पर्षद का दर्जा दिया गया. बावजूद इसके कचरे का स्थायी प्रबंधन करने की व्यवस्था नहीं हुई,
इसका प्रमुख कारण है डंपिंग जोन के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होना. नगर पर्षद की जो जमीन है वह डंपिंग जोन बनाने के मापदंड को पूरा नहीं कर रही है. इधर कोई भी व्यक्ति लीज पर अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है. इसके लिए दो बार किया गया प्रयास असफल हो गया. फिलहाल स्थिति यह है कि ट्रैक्टर या ट्राली से कूड़े या तो दरधा नदी में फेंका जा रहा है या फिर घोसी मोड़ के समीप. इसे लेकर लोगों ने विरोध भी जताया है लेकिन लाचारी यह है कि कचरे का संग्रहण किया जाय तो कहां.
दुर्गंध से बीमारी फैलने की रहती है संभावना : घोसी मोड़ अति व्यस्त मार्ग है. प्रतिदिन हजारों सवारी गाड़ियां वहां से गुजरती है. इसके अलावा उसके आसपास के इलाके में आबादी बसी हुई है. मोड़ से पूरब घोसी जाने वाली सड़क के मार्ग में कई गांव हैं, पश्चिम में गौरक्षणी और दक्षिण दिशा में हसौड़ा एवं पूर्वी गांधी मैदान का मुहल्ला है. इन मुहल्लों में बड़ी संख्या में आवासीय मकान हैं. लंबे समय से घोसी मोड़ पर पूरे शहर के कूड़े-कचरे फेंके जाते हैं. वर्तमान में उक्त स्थल पर कूड़े का पहाड़ बन गया है जहां से दुर्गंध फैल रही है. रिहायसी इलाका प्रदूषित हो रहा है. मुहल्लों में रहने वाले लोग गंदगी के कारण बीमारी फैलने के आशंका से ग्रसित हैं. कुछ माह पूर्व स्थानीय लोगों ने विरोध भी जताया था. कुछ दिनों तक घोसी मोड़ पर कूड़ा फेंकना बंद हो गया था, लेकिन फिर से वहां कूड़े का संग्रहण किया जा रहा है. इसके अलावा दरधा पुल से पश्चिम नदी में गौरी घाट के पास कचरे फेंका जा रहा है जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में है.
जमीन की है सबसे बड़ी समस्या
नगर पर्षद की जो जमीन है वह डंपिंग जोन बनाने के कायटेरिया को पूरा नहीं करती है. पांच सौ गज की दूरी तक आबादी नहीं रहने वाली जमीन पर डंपिंग जोन बनाने का प्रावधान है. नगर पर्षद के पास ऐसी जमीन नहीं है. लीज पर जमीन लेने के लिए दो बार टेंडर निकाला गया था लेकिन एक भी व्यक्ति ने उसमें हिस्सा नहीं लिया.
संजीव कुमार,कार्यपालक पदाधिकारी
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