बच्चे को लेकर फरियाद सुनाने कलेक्ट्रेट पहुंची एक महिला

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टेहटा में नर्सिंग होम की है संचालिका जहानाबाद : कलेक्ट्रेट में बुधवार को उस वक्त अजीबो गरीब स्थिति उत्पन्न हो गयी जब नि:संतान एक महिला दूध मुहे एक बच्चे को अपनी गोद में लेकर जिलाधिकारी को फरियाद सुनाने पहुंची. उक्त महिला का नाम रानी कुमारी है, जो टेहटा बाइपास के पास संचालित एक नर्सिंग होम […]

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टेहटा में नर्सिंग होम की है संचालिका

जहानाबाद : कलेक्ट्रेट में बुधवार को उस वक्त अजीबो गरीब स्थिति उत्पन्न हो गयी जब नि:संतान एक महिला दूध मुहे एक बच्चे को अपनी गोद में लेकर जिलाधिकारी को फरियाद सुनाने पहुंची. उक्त महिला का नाम रानी कुमारी है, जो टेहटा बाइपास के पास संचालित एक नर्सिंग होम की संचालिका है. वह घबराइ हुई थी, उसकी आंखों से अनवरत आंसू बह रहे थे. उसका कहना था कि क्या किसी अनाथ बच्चे को मां की ममता देना गुनाह है. उसे फंसाने की और उसके नर्सिंग होम को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है. महिला का कहना है कि 16 जनवरी को उसके नर्सिंग होम के पास लावारिस हालत में नवजात बच्चा मिला है.
वह बे-औलाद है इस कारण उसकी ममता जाग गयी और वह बच्चे को खुद पालने लगी. इसके बाद टेहटा में कुछ लोगों के बीच शुरू हो गयी तरह-तरह की चर्चाएं. नर्सिंग होम संचालिका पर बच्चा बेचने की कोशिश किये जाने का भी आरोप लगाया जाने लगा. इस कारण वह घबरा कर बुधवार को अपनी फरियाद सुनाने पहुंच गयी डीएम मनोज कुमार सिंह के पास. उसने जिलाधिकारी को नवजात बच्चे से संबंधित पूरी जानकारी दी. अपने ऊपर बच्चा बेचने के लगाये गये आरोप से दुखी उक्त महिला डीएम को अपनी व्यथा सुनाते हुए कह रही थी कि नाहक उसे फंसाने की साजिश की जा रही है.
जिनके स्वार्थ पूरे नहीं हुए वह मानसिक रूप से प्रताड़ित कर एक मां की ममता को बदनाम करना चाहते हैं. नर्सिंग होम संचालिका कुछ मीडिया कर्मियों से भी मुखातिब हुई और रो-रोकर अपने ऊपर लगाये गये आरोप की पीड़ा व्यक्त की. वह कह रही थी कि वह बच्चे को गोद लेकर उसका पालन पोषण कर रही है. उसे बीसीजी का टीका लगवाया है. हालांकि जिलाधिकारी से मिलने के बाद महिला काफी राहत महसूस की है. उसने बताया कि डीएम साहब ने बच्चा रखने की अनुमति दी है और कहा है कि कानूनी प्रक्रिया भी पूरी कर लें. इसके बाद उक्त महिला नवजात को अपने सीने से लगाये जिला बाल संरक्षण इकाई बिहारशरीफ (नालंदा) गयी है. वह वहां उसका निबंधन करायेगी. उक्त नि:संतान नर्सिंग होम संचालिका को ऐसा लग रहा है कि नौ-दस दिनों से अपने कलेजे के टुकड़े की तरह पाल रहे नवजात कहीं उससे छीन न जाय. यह सब बयां करते हुए वह लगातार रोये जा रही थी. उसकी आंखो से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा था.
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