‘मे आई हेल्प यू ‘ काउंटरों का मिट गया वजूद

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उपेक्षा. यात्रियों को परिवहन संबंधित जानकारी देने के लिए शहर में खोले गये थे तीन सहायता केंद्र जिला प्रशासन के द्वारा शहर के तीन प्रमुख स्थानों पर यात्रियों को परिवहन संबंधी जानकारी देने के उद्देश्य से तीन ‘ मे आइ हेल्प यू ‘ काउंटर खोला गया था. लेकिन इसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा […]

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उपेक्षा. यात्रियों को परिवहन संबंधित जानकारी देने के लिए शहर में खोले गये थे तीन सहायता केंद्र

जिला प्रशासन के द्वारा शहर के तीन प्रमुख स्थानों पर यात्रियों को परिवहन संबंधी जानकारी देने के उद्देश्य से तीन ‘ मे आइ हेल्प यू ‘ काउंटर खोला गया था. लेकिन इसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा है. तीनों सहायता केंद्रों का वजूद लगभग मिट गया है. अब इसके पास शहर के विभिन्न स्थानों के मुहल्लों के कूड़े-कचरे फेंके जाते हैं. इस तरफ प्रशासन का ध्यान नहीं है. चौराहों पर स्थित तीनों केंद्र यात्रियों को मुंह चिढ़ा रहा है.
जहानाबाद : शहर के काको मोड़, अरवल मोड़ और कारगिल चौक के समीप यात्रियों को परिवहन संबंधी जानकारी देने के उद्देश्य से सहायता केंद्रों को खोला गया था. जिले के तत्कालीन डीएम बालामुरूगन डी ने यात्री सुविधाओं को सहज बनाने के लिए ‘ मे आइ हेल्प यू ‘ काउंटर की स्थापना करायी थी. लेकिन इन काउंटरों से शायद ही किसी व्यक्ति को कोई सहायता उपलब्ध हो पायी होगी. केंद्र खुलने के कुछ ही दिनों के बाद से इन काउंटरों से पुलिसकर्मी गायब हो गये.
जिला प्रशासन के द्वारा बड़े ही तामझाम के साथ इन काउंटरों की व्यवस्था की गयी थी जो फिलहाल बेकार साबित हो रहा है. सहज तौर पर कहा जा सकता है कि इस मामले में पैसे की सिर्फ बरबादी की गयी है. काउंटरों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. काउंटर पर लिखा जहानाबाद पुलिस आपकी सेवा में तत्पर आम अवाम को व्यवस्था की सच्चाई से रू-ब-रू करा रहा है. बताते चलें की राज्य सरकार से लेकर जिला प्रशासन द्वारा यातायात नियमों की जानकारी और अनुपालन के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही है. जिसमें बड़े पैमाने पर सरकारी राशि खर्च की जा रही है. परंतु सही संचालन के अभाव में सहायता केंद्र जैसी योजना बेकार साबित हो रही है.
जानकारी के अभाव में भटकते हैं बाहरी यात्री : शहर के बीचो-बीच से एनएच 83 गुजरी है. पटना- गया के बीच जहानाबाद स्थित है. इस रास्ते से प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है. लोग राजधानी पटना के अलावा गया, बोधगया, और राजगीर के अलावा झारखंड के इलाके में जाते हैं. चौक-चौराहे पर किसी को परेशानी न हो इस उद्देश्य से उक्त सहायता केंद्रों की स्थापना करायी गयी थी. ताकि बाहरी यात्री वहां से रास्ते की जानकारी ले सकें. परंतु काउंटरों पर पुलिसकर्मी के नहीं रहने से जानकारी देने वाला कोई नहीं होता. बाहरी यात्री भटकते हैं या फिर राहगीरों से रास्ता पूछकर आगे की ओर बढ़ते हैं. ऐसी स्थिति में यहां जरूरत महसूस की जा रही है ‘ मे आइ हेल्प यू ‘ काउंटरों को फिर से व्यवस्थित करने की. ताकि इसका लाभ बाहरी यात्रियों को मिल सके.
बंद कराना चाहिए कांउटर के पास कूड़ा फेंकना : काको मोड़ और अरवल मोड़ के पास खोले गये सहायता केंद्र की हालत अत्यंत खराब है. इन दोनों स्थानों पर काउंटर के समीप ही भारी मात्रा में कूड़े फेंके जाते हैं. यह अलग बात है कि वहां से कूड़े का उठाव किया जाता है. लेकिन अत्यधिक मात्रा में कूड़े का ढेर रहने की वजह से किसी भी यात्री को यह पता नहीं चलता कि यहां पर यात्री सहायता केंद्र है. लोग कूड़े देखते ही वहां पर जाना मुनासिब नहीं समझते. लोगों का कहना है कि यदि सहायता केंद्रों को फिर से वजूद में लाना है तो सबसे पहले वहां पर कूड़े-कचरे फेंकने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना होगा.
काउंटरों पर नहीं उपलब्ध रहते एक भी पुलिसकर्मी
विष्णुपद, बोधगया व राजगीर जाने के लिए यहां से गुजरते हैं देसी-विदेशी पर्यटक
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