नदियों की धार से मंद पड़ी एनएच 110 की रफ्तार

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समस्या . व्यवस्था के आगे थम जाती है यात्री वाहनों की गति, परिस्थिति के आगे बेवश दिखते हैं लोग विकास पर भारी पड़ रहीं दरिया की धार आम लोगों के सुखद अहसास पर हालात ने लगा दिया है ताला जहानाबाद : वर्ष 2012 में अरवल के समीप सोन नदी पर पुल बना तो आम लोगों […]

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समस्या . व्यवस्था के आगे थम जाती है यात्री वाहनों की गति, परिस्थिति के आगे बेवश दिखते हैं लोग

विकास पर भारी पड़ रहीं दरिया की धार
आम लोगों के सुखद अहसास पर हालात ने लगा दिया है ताला
जहानाबाद : वर्ष 2012 में अरवल के समीप सोन नदी पर पुल बना तो आम लोगों के जेहन में काफी खुशी हुई थी. जहानाबाद जिला के साथ साथ भोजपुर, अरवल से लेकर नालंदा तक दूरी कम हो जाने पर लाखो लोग सरकार के इस व्यवस्था से सुखद अनुभूति का एहसास कर रहे थे. सभी जगहों पर धान का कटोरा एवं आलू (सब्जी) का खेत एक होने की चर्चा थी. लेकिन आज परिस्थिति ने आम लोगों के चहकते आवाज पर ताला लगा दिया है. बिते दिन लगातार हुए बारिश से उफनाई नदियों ने एनएच के रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. नालंदा से अरवल को जोड़ने वाली एनएच 110 पर बने डायवर्सन आम यात्री के लिए सरदर्द बना है. बीते करीब दस दिनों से एनएच 110 अरवल-जहानाबाद –
एकंगर पथ पर वाहनों का आवाजाही ठप हो गया है. जहानाबाद जिला के शहर के निकट दरधा नदी पर निजामुदिनपुर के समीप दरधा नदी पर बना डायवर्सन सिधे तौर पर जिले के काको, मोदनगंज, बंधुगंज सहित नालंदा के एक बड़ी आबादी को प्रभावित करता है. वहीं रतनी प्रखंड के जहांगीरपुर व नेहालपुर के समीप अरवल जहानाबाद पथ पर बना डायवर्सन व्यवस्थित तंत्र की अबूझ पहेली बन कर रह गयी है. दरअसल व्यवस्था से पस्त आम लोगों की समस्या एक दो वर्ष के लिए रहे तो कोई बात नहीं? ऐसा नहीं की उक्त दोनों जगह पर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया लेकिन निर्माण कार्य के शुरू होते ही कुछ महिनों बाद निर्माण पर ऐसी नजर लगी की आज तक दोनों जगह पर निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुई.
हालांकि सरकारी स्तर पर एक दो बार प्रयास भी किया गया लेकिन परिस्थिति के आगे सब बेवश दिखाई दिया. तंत्र के आगे चोट खाती एक बड़े भू भाग की निरीह जनता को पुल के निर्माण कार्य पूरा होने पर विश्वास ही नहीं होता. करीब पांच वर्ष पूर्व अरवल-जहानाबाद – एकंगरसराय एनएच 110 का सड़क सह पूल का निर्माण कार्य शुरू किया गया था. हर वर्ष जैसे ही बारिश का मौसम आता है कि व्यवस्था के आगे एनएच की रफ्तार पस्त पड़ जाती है. दरधा, पुनपुन, बलदइया, गंगहर नदी में पानी आने व नदियों में थोड़ी सी जलस्तर के बढ़ने के साथ नदियां की धार एनएच की रफ्तार को मंद कर देती है.
डायवर्सन के ऊपर से बहते करीब चार पांच फीट पानी यात्री वाहन का रूख मोड़ देती है बल्कि आम यात्री पर आर्थिक बोझ भी डाल देती है. नदियों के उफनते ही आम जन जीवन कराहता सा नजर आता है. ऐसा नही की डायवर्सन से बहाव तेज होने पर अरवल-जहानाबाद जिला का यात्रा प्रभावित होता है बल्कि पश्चिमि इलाके के आरा, औरंगाबाद एवं पूर्वी इलाका के नालंदा का आवागमन सिधे तौर पर ठप हो जाता है. चार जिला के आवागमन भंग होने पर यात्रियों को दूसरा रास्ता अख्तियार कर लंबी दूरी तय कर यात्रा करना पड़ता है. फिलहाल बेहतरी के आस में आम यात्रियों का विश्वास नदियां के धार के साथ बहते दिखाई दे रहा है. एनएच का जिला मुख्यालय से संपर्क टूटने पर ग्रामीण सड़क सहारा तो बनता है
लेकिन उनकी हालत भी बेहतर नही होने से लंबी दूरी के अधिकतर यात्रि वाहन के कमी आते ही लोगों का यात्रा मुश्किलों भरा हो जाता है.जनप्रतिनिधि से लेकर कई संगठन ने सड़क के जर्जर हालत पर कई बार धरना- प्रदर्शन किया लेकिन मामला सिफर रहने से न तो प्रतिनिधि पर विश्वास है न सरकार के पदाधिकारियों पर यकीन? फिलहाल उग्रवादी गतिविधि के चलते बंद पड़ा जहांगीरपुर डायवर्सन का निर्माण कार्य एवं आम लोगों के हस्तक्षेप से बंद पड़ा निजामुदिनपुर डायवर्सन का निर्माण कार्य आम आदमी के बीच अक्षम पहेली बनकर रह गयी है.
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