खराब हो गयी सभी लाइटें

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अनदेखी. शहर में एनएच पर छाया रहता है अंधेरा व्यर्थ साबित हो रहा व्यय किये गये एक करोड़ रुपये सौंदर्यीकरण व रोशनी के पुख्ता प्रबंध के नाम पर लगायी गयी थी कीमती लाइटें जहानाबाद : शहर से होकर गुजरने वाली एनएच 83 पर अब अंधेरा कायम रहता है. तीन माह के भीतर ही सड़क पर […]

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अनदेखी. शहर में एनएच पर छाया रहता है अंधेरा

व्यर्थ साबित हो रहा व्यय किये गये एक करोड़ रुपये
सौंदर्यीकरण व रोशनी के पुख्ता प्रबंध के नाम पर लगायी गयी थी कीमती लाइटें
जहानाबाद : शहर से होकर गुजरने वाली एनएच 83 पर अब अंधेरा कायम रहता है. तीन माह के भीतर ही सड़क पर लगायी गयी सभी 125 एलइडी लाइटें अब रौशनी नहीं देती वह दिखावे की वस्तु बनी हुई है. इसे रख-रखाव का अभाव कहें या लाइट की गुणवता की कमी सभी लाइटें खराब हो चुकी है. इस स्थिति से जिला के आला अफसर भी अवगत हैं. चुकी उनके आवास के पास से ही समाहरणालय तक लगायी गयी सभी लाइटें बंद पड़ी है.
परिणाम यह है कि कुछ दिनों पूर्व तक दुधिया रौशनी से जगमग रहने वाली पटना गया सड़क एनएच 83 पर अब अंधेरा छाया रहता है. मात्र तीन माह के अंदर सभी लाइटों के खराब हो जाने से लोग इसे सरकार के पैसे का दुरूपयोग बताने लगे हैं. सभी प्रमुख नुक्कड़ों पर चर्चा हो रहीहै कि लाइट लगाने के नाम पर व्यय की गयी राशि व्यर्थ साबित है.
एक करोड़ छ: लाख रुपये किये गये थे खर्च :नगर विकास विभाग के द्वारा जहानाबाद शहर में 125 एलइडी लाइटें लगाने की जिम्मेवारी बुडको एजेंसी को सौंपी गयी थी. एक लाइट की कीमत करीब 85 हजार रुपये बतायी गयी है. इस हिसाब से कुल 125 लाइटें लगाने में एक करोड़ छ: लाख पच्चीस हजार रुपये लागत आयी थी. शहर से होकर गुजरने वाली एनएच 83 के दोनों किनारे पर लाइट लगाने की योजना थी.
जिसके तहत जिला अधिकारी के आवास से लेकर कारगील चौक (समाहरणालय)तक लाइटें लगायी गयी थी. हालांकि शहर के अरवल मोड़ से लेकर दरधा नदी पुल तक के इलाके को इससे अछूता रखा गया था. शुरू में रौशनी की चकाचौंध देखकर लोग खुश हुये. शहर सुंदर भी दिख रहा था. लेकिन अब शत-प्रतिशत लाइटों के खराब हो जाने से लोग व्यवस्था के प्रति नाक-भौं सिकोड़ने लगें हैं.
एनएच पर छाया रहता है घुप्प अंधेरा :जब लाइटें लगायी गयी थी तो लोगों को काफी सहुलियत हुयी थी. डीएम आवास से लेकर कोर्ट एरिया तक एनएच से गुजरने में लोग सकुन महसूस करते थे. लगातार दुधिया रौशनी के बीच लोग आवाजाही कर रहे थे. वाहनों के आवागमन में भी सुगमता थी. लेकिन अब स्थिति विपरित है.
सड़क पर पूरी तरह अंधेरा छाया रहता है. सूर्यास्त के बाद रौशनी उपलब्ध रहने से बेखौफ होकर चलने वाले लोग अब एनएच पर घुप्प अंधेरा हो जाने से भय महसूस करते हैं. महिलाएं तो अपने आप को अंधेरे में चलना सुरक्षित महसूस नहीं करती. इस स्थिति से अधिकारी भी अवगत हैं. लेकिन इसमें सुधार की दिशा में अब तक कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गयी है.
ठीक करायी जायेगी लाइटें
कुछ तकनीकी गड़बड़ी से लाइटें बंद पड़ी है इसे सुधार करने की दिशा में अविलंब सार्थक कार्रवाई की जा रही है. अतिशीघ्र बंद पड़ी लाइटें चेक कराकर एनएच पर रौशनी की सुविधा बहाल कर दी जायेगी.
संजीव कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद
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