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40 प्रतिशत बच्चों को नहीं मिल रहा है मध्याह्न भोजन योजना का लाभ

Updated at : 03 Apr 2019 7:51 AM (IST)
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40 प्रतिशत बच्चों को नहीं मिल रहा है मध्याह्न भोजन योजना का लाभ

जहानाबाद : मध्याह्न भोजन योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में कक्षा 1-8 तक के छात्र-छात्राओं को दोपहर का पक्का हुआ भोजन नि:शुल्क मिलता है. इस योजना का उद्देश्य स्कूलों में नामांकन और उपस्थिति को बढ़ाना व छात्रों में पोषण के स्तर को सुधारना है, लेकिन इन सभी उद्देश्यों में जहानाबाद जिला फिसड्डी साबित हुआ है. […]

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जहानाबाद : मध्याह्न भोजन योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में कक्षा 1-8 तक के छात्र-छात्राओं को दोपहर का पक्का हुआ भोजन नि:शुल्क मिलता है. इस योजना का उद्देश्य स्कूलों में नामांकन और उपस्थिति को बढ़ाना व छात्रों में पोषण के स्तर को सुधारना है, लेकिन इन सभी उद्देश्यों में जहानाबाद जिला फिसड्डी साबित हुआ है.

बिहार सरकार की एमडीएम योजना की दिसंबर 2018 तक के प्रगति रिपोर्ट में भी जिले को सबसे अंतिम 38वां रैंक दिया गया है. जहानाबाद में सरकारी विद्यालयों में कुल नामांकन साल-दर-साल लगातार गिर रहा है.
सत्र 2015-16 में जहां कक्षा 1-5 तक जिले में करीब 1 लाख 51 हजार बच्चों का नामांकन था, वहीं 2016-17 में यह घटकर 1 लाख 24 हजार, 2017-18 में 1 लाख 19 हजार और 2018-19 में करीब 1 लाख हो गया. कुल नामांकन में लगातार होती कमी यह बताती है कि एमडीएम योजना अपने इस उद्देश्य में पूरी तरह फेल हुई.
जिले में कुल नामांकित बच्चों में करीब 60 प्रतिशत बच्चे ही मध्याह्न भोजन का लाभ उठा पाते हैं. सत्र 2015-16 में प्राथमिक विद्यालयों के 65.93 प्रतिशत, 2016-17 में करीब 67 प्रतिशत, 2017-18 में 59.66 प्रतिशत बच्चे ही मिड-डे-मील करते हैं. जबकि बाकी बच्चे इससे वंचित रहते हैं. जहानाबाद में प्राथमिक व मध्य विद्यालयों की संख्या 900 है, जिसमें सभी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना संचालित हो रही है.
कक्षा 1-8 तक कुल नामांकित छात्र-छात्राओं की संख्या 1 लाख 58 हजार 456 है, लेकिन फरवरी की रिपोर्ट के अनुसार मात्र 56.37 प्रतिशत छात्र-छात्रा ही मिड-डे-मील लाभ उठा पाये. लाभुकों की संख्या में इस कमी का प्रमुख कारण विद्यालयों में उपस्थिति का गिरता प्रतिशत है. एमडीएम बच्चों को स्कूलों तक लाने में फेल हुआ है.
इसका बड़ा कारण योजना में भ्रष्टाचार और भोजन की गुणवत्ता में कमी है. पिछले वर्ष की नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में भी यह बताया गया है कि बिहार के अधिकांश स्कूलों में बच्चों को निर्धारित पोषणयुक्त भोजन नहीं मिल रहा है.
इस योजना के तहत प्रति छात्र 150 ग्राम चावल के अतिरिक्त करीब 6.52 रुपये और हर शुक्रवार को मौसमी फल व अंडे के लिए पांच रुपये देने का प्रावधान है. महंगाई के इस दौर में जहां खाद्य पदार्थों की कीमतें दिनोंदिन बढ़ रही हैं, वहीं इतने कम रुपये में छात्रों को पोषणयुक्त भोजन देना असंभव सा लगता है.
शकुराबाद मध्य विद्यालय में सभी बच्चों को नहीं मिला एमडीएम :योजना की जांच के क्रम में जब प्रभात खबर टीम मध्य विद्यालय शकुराबाद पहुंची और वहां के छात्रों-शिक्षकों विद्यालय समिति के लोगों और प्रधानाचार्य से बात करने पर कई चौंकानेवाली बातें सामने आयी.
बच्चों ने बताया कि अधिकांश दिन भोजन की गुणवत्ता और स्वाद रूचिकर नहीं रहती है. वहीं खुले आसमान के नीचे बैठकर खाने के कारण धूल और चिड़ियों की बीफ गिरने से कई बच्चों ने भोजना करना छोड़ दिया है.
कक्षा आठवीं की छात्रा शबाना खातून ने बताया कि मंगलवार को मेरे समेत करीब 40 बच्चों के लिए मिड-डे-मील बचा ही नहीं. बच्चों ने प्रधानाचार्य से भी इसकी गुहार लगायी कि दूर से आने के कारण वो खाली पेट है पुन: भोजन बनवाया जाये पर उनकी बात अनसुनी कर दी गयी.
वहीं सिमरण परवीन, खूशबू परवीन, प्रेम कुमार, सन्नी कुमार, सोनू कुमार, साहिल कुमार, यशवंत कुमार, गोविंदा कुमार आदि छात्रों ने भी बताया कि आज उन्हें मिड-डे-मील नहीं मिला है. वहीं बच्चों ने बताया कि 26 और 27 मार्च को भी सभी बच्चों को भोजन नहीं मिला था.
इधर प्रधानाचार्य उदय कुमार ने बताया कि कुल 648 बच्चों का नामांकन है, जिसमें आज 280 बच्चे उपस्थित हैं, वहीं 275 बच्चों ने आज भोजन किया है. सभी को मीनू के हिसाब से खाना दिया जा रहा है. बाहरी लोगों के बहकावे में आकर बच्चे इस तरह की शिकायत कर रहे हैं.
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