स्कूल में बच्चे की मौत के बाद हंगामा, थानाध्यक्ष पर पथराव

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Dec 2017 4:14 AM

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रतनी : स्थानीय प्रखंड के नोआवां राजकीय मध्य विद्यालय के छात्र मनीष कुमार (13 वर्ष) की मौत गुरुवार की दोपहर विद्यालय परिसर में हो गया. इसकी सूचना मिलते ही परिजन व ग्रामीणों आक्रोशित हो गये और हंगामा किया. घटना की सूचना पाकर थानाध्यक्ष चंदन कुमार सिंह दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. शव को उठाने […]

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रतनी : स्थानीय प्रखंड के नोआवां राजकीय मध्य विद्यालय के छात्र मनीष कुमार (13 वर्ष) की मौत गुरुवार की दोपहर विद्यालय परिसर में हो गया. इसकी सूचना मिलते ही परिजन व ग्रामीणों आक्रोशित हो गये और हंगामा किया. घटना की सूचना पाकर थानाध्यक्ष चंदन कुमार सिंह दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.

शव को उठाने का प्रयास किया लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने उचित मुआवजा व डीएम-एसपी के बुलाने की मांग पर अड़ गये. हालांकि आक्रोश इतना अधिक था कि भीड़ ने थानाध्यक्ष पर रोड़ेबाजी भी की. हालांकि, पुलिस ने संयम बनाये रखने की अपील की. जानकारी के अनुसार, छात्र स्कूल गया था. स्कूल में लंच की छुट्टी होने पर बच्चे क्लास रूम से निकलकर दौड़ते हुए घर जा रहे थे. इसी दौरान मनीष को ढेस लग गयी और वह गिर गया. बेहोशी की हालत में शिक्षकों की ओली उसे उठाकर बेंच पर सुलाकर पानी का छींटा मारा, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी. वहीं, प्रधानाध्यापक उपेंद्र नारायण चक्रवर्ती ने बताया कि चार साल पहले भी उसे चोट लगी थी.

इससे पहले भी वह दो बार बेहोश हुआ था, लेकिन कुछ देर बाद होश आ गया था. लेकिन आज ठेस लगने के बाद गिरा और बेहोश हो गया और मौत हो गयी. हालांकि, मृतक का भाई प्रशांत कुमार ने बताया कि चार वर्ष पहले मेरे भाई को चोट लगी थी, लेकिन इलाज कराने के बाद ठीक हो गया था. घटना की जानकारी पाकर बीईओ मुजीव अंसारी भी पहुंचे तथा आक्रोशित लोगों को समझाया. इधर, बीडीओ मुकेश कुमार ने मुआवजे की घोषणा की. लेकिन, आक्रोशित लोगों ने देर रात तक डीएम-एसपी को बुलाने की मांग करते रहे और शव को नहीं उठाने दिया.

अब केकरा सहारे रह बई रे बेटवा…
रतनी. नोआवां मध्य विद्यालय में छात्र मनीष की मौत के बाद उसकी माता गायत्री देवी शव से लिपटकर दहाड़ मारकर रो रही थी. रोते-रोते बेहोश हो जा रही थी. गांव की महिलाएं किसी प्रकार होश में लाते तो फिर यह कहते हुए रोने लगती थी कि अब केकर सहारे रह बई रे बेटवा… गायत्री इस मनहूस दिन को कोस रही थी कि सुबह में मेरा बेटा पढ़ने के लिए घर से खुशी -खुशी स्कूल आया था, लेकिन उसे क्या पता कि आज वह खुद अपने पैरों से चलकर घर नहीं पहुंचेगा आज स्कूल से उसका शव घर आयेगा. इस बात को लेकर भी उसके मन में काफी टिस भरा था. गायत्री की जिंदगी बड़ी ही दुखद रही है. चार साल पहले बीमारी से उसके पति महेश राम की मौत हो गयी थी. पति की मौत के बाद दो बेटों के सहारे अपनी जिंदगी जी रही गायत्री ने आज एक बेटा खो दिया. इसके बाद घर की जिम्मेदारी बड़ा पुत्र प्रशांत पर आ गयी.
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