बिहार में जातीय जनगणना सीएम नीतीश कुमार का मास्टरस्ट्रोक? जानिये RJD- JDU को क्या मिल सकता है लाभ...

Updated at : 07 Jan 2023 10:54 AM (IST)
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बिहार में जातीय जनगणना सीएम नीतीश कुमार का मास्टरस्ट्रोक? जानिये RJD- JDU को क्या मिल सकता है लाभ...

Jati Janganana Bihar 2023: बिहार में जातीय जनगणना की प्रक्रिया विधिवत शुरू कर दी गयी है. शनिवार से इसकी शुरुआत हो गयी है. पहले फेज में मकानों पर नंबर लिखने का काम किया जाएगा. वहीं बिहार में जाति आधारित गणना नीतीश कुमार का मास्टरस्ट्रोक बन सकता है.

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Jati Janganana Bihar 2023: बिहार में जातीय जनगणना की शुरुआत 7 जनवरी 2023 दिन शनिवार से की जा रही है. पहले चरण में मकानों की गिनती होगी और मकानों पर संख्या अंकित करने का काम किया जाएगा. वार्ड स्तर पर नजरी नक्शा तैयार किया जाएगा. वहीं एक फरवरी से आर्थिक स्थिति का भी आकलन किया जाएगा. बिहार में जाति आधारित गणना से सूबे की सियासत भी गरमायी हुई है. वहीं इस गणना (Caste Based Census 2023) को नीतीश कुमार(Nitish Kumar) का मास्टरस्ट्रोक भी माना जा रहा है. जानिये जाति आधारित गणना के पीछे की वो सियासी वजह जिससे फायदे मिल सकते हैं.

जाति आधारित गणना पर सियासी महासंग्राम

बिहार में जब-जब जाति आधारित गणना की मांग उठी तो सूबे से लेकर केंद्र तक की सियासत गरमायी. कभी बिहार की सत्ता में एकसाथ एनडीए में रहे भाजपा और जदयू ने भी इसपर सहमति जताई. तो राजद विपक्ष में रहकर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाती रही. आज सूबे में सियासी समीकरण बदले हैं और नीतीश कुमार महागठबंधन की ओर से सीएम हैं. राजद सत्ता में है तो भाजपा विपक्ष में बैठी है. इस बीच जातीय जनगणना का काम शुरू हो गया है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जातीय जनगणना…

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेसा जातीय जनगणना के पक्ष में रहे हैं. तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद सदन से लेकर सड़क तक इस मांग के साथ उतर चुकी है. केंद्र की भाजपा सरकार ने साफ कर दिया था कि केंद्र सरकार अपनी ओर से जाति आधारित गणना नहीं कराएगी. लेकिन राज्य सरकार अपने खर्च से राज्य में करा सकती है. बिहार से एक प्रतिनिधिमंडल भी इस मांग को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी से मिला. जिसमें सभी दलों के नेता शामिल थे.

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राजद और जदयू को मिल सकता है लाभ

बता दें कि बिहार में इसका लाभ राजद और जदयू को मिल सकता है. दरअसल, धरातल की बात करें तो पिछड़ी जातियों की ये मांग हमेसा रही है कि सूबे में जातिगत जनगणना कराया जाए. हाल में आरक्षण विवाद के बीच नगर निकाय चुनाव कराकर नीतीश कुमार की सरकार ने अति पिछड़ों को साधा.

आगामी चुनाव में दिखेगा असर?

वहीं तेजस्वी यादव भी पिछड़ों की आवाज उठाकर इस जनगणना की मांग करते रहे हैं. जनगणना शुरू होने पर भी उनकी प्रतिक्रिया आई जिसमें वो राजद की मांग और साथ का जिक्र पिछड़ों के संदर्भ में कर रहे हैं. इसका लाभ भी आगामी चुनाव में जदयू -राजद को मिल सकता है.

Posted By: Thakur Shaktilochan

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