वट सावित्री पूजा कल, सुहागिन महिलाएं रखेंगी अखंड सौभाग्य का व्रत

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 15 May 2026 1:50 PM

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श्रृंगार का समान खरीदती महिला

जमुई जिले में वट सावित्री व्रत को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और बाजारों में पूजन सामग्री के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ रही है. शनिवार को सुहागिनें निर्जला उपवास रखकर वट वृक्ष की 108 परिक्रमा करेंगी और पति की दीर्घायु की कामना करेंगी.

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जमुई से अर्जुन अरनव की रिपोर्ट: पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य एवं परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर जिले भर की सुहागिन महिलाएं शनिवार को वट सावित्री पूजा करेंगी. इस अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार कर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करेंगी तथा पति की लंबी उम्र और संतान की कुशलता के लिए निर्जला उपवास रखेंगी.

बाजारों में रही रौनक, पूजन सामग्री की खरीदारी

व्रत को लेकर शुक्रवार को बाजारों में भारी चहल-पहल देखी गई. सुहागिन महिलाएं पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे बांस से बना पंखा, कच्चा सूत, आम, लीची तथा श्रृंगार के सामानों की खरीदारी करती नजर आईं. जिले के विभिन्न मंदिरों और वट वृक्षों के समीप पूजा को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं. शनिवार सुबह से ही वट वृक्षों के पास महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ेगी.

108 परिक्रमा और सत्यवान-सावित्री की कथा

पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सावित्री-सत्यवान की कथा सुनाई जाएगी. महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर कच्चा सूत बांधते हुए 108 बार परिक्रमा करेंगी. ज्योतिषाचार्य पंडित मनोहर आचार्य के अनुसार:

  • बरगद और पीपल की पूजा से शनि, मंगल एवं राहु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं.
  • वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास माना जाता है.

पौराणिक महत्व: सावित्री ने यमराज से वापस लिए थे प्राण

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता सावित्री ने अपनी तपस्या और दृढ़ संकल्प से यमराज को प्रसन्न कर अपने पति सत्यवान को पुनर्जीवन प्रदान करवाया था. तभी से सुहागिन महिलाएं इस परंपरा का पालन करती आ रही हैं. वट सावित्री पूजा में आम और लीची के प्रसाद के साथ बांस के पंखे का विशेष महत्व होता है, जिससे महिलाएं अपने पति को हवा करती हैं.

संस्कृति और समर्पण का प्रतीक

यह व्रत केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में वैवाहिक जीवन की मजबूती, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों का भी प्रतीक है. यह नई पीढ़ी को स्त्री के कर्तव्य और दृढ़ इच्छाशक्ति की सीख देता है.

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