टिकट कटने पर किया था राजद का खेल खराब, अब बीजेपी का दामन थामेंगी रितु जायसवाल

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 15 May 2026 6:32 PM

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रितु जायसवाल

Ritu Jaiswal: राजद से निकाले जाने, परिहार सीट पर बगावत और नई पार्टी के ऐलान के बाद अब रितु जायसवाल BJP का दामन थाम सकती है. आइये इनके बारे ने जानते हैं.

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Ritu Jaiswal: बिहार की चर्चित महिला नेता रितु जायसवाल अब अपनी नई राजनीतिक पारी भारतीय जनता पार्टी के साथ शुरू करने की तैयारी में हैं. सूत्रों की मानें तो वह जल्द ही भाजपा की सदस्यता ले सकती हैं. कभी लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की करीबी मानी जाने वाली रितु अब नए सियासी मंच पर नजर आ सकती हैं.

रितु जायसवाल लंबे समय तक RJD में सक्रिय रहीं. पार्टी ने उन्हें महिला प्रदेश अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी थी. वह 2021 से 2023 तक पार्टी की प्रवक्ता भी रहीं और बिहार की राजनीति में महिला नेतृत्व का मजबूत चेहरा बनकर उभरीं. लेकिन 2025 विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद उनका पार्टी से टकराव खुलकर सामने आ गया.

टिकट कटने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरीं

परिहार विधानसभा सीट से दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहीं रितु को जब RJD ने उम्मीदवार नहीं बनाया, तो उन्होंने बगावत कर दी. निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए उन्होंने मुकाबले को पूरी तरह बदल दिया. इसका सीधा नुकसान RJD को हुआ और भाजपा उम्मीदवार को फायदा मिल गया. इसी के बाद पार्टी ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर उन्हें निष्कासित कर दिया.

RJD से बाहर होने के बाद रितु जायसवाल ने युवाओं और महिलाओं को केंद्र में रखकर नई पार्टी बनाने की बात कही थी. उन्होंने परिवारवाद और टिकट की खरीद-फरोख्त के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई थी. हालांकि अब उन्होंने नई पार्टी बनाने के बजाय भाजपा के साथ जाने का रास्ता चुना है.

पंचायत से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

48 वर्षीय रितु जायसवाल ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत सीतामढ़ी की सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया के रूप में की थी. मुखिया रहते उन्होंने गांव में विकास, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई काम किए. उनके काम को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और उन्हें सम्मानित किया गया.

रितु ने 2020 में RJD के टिकट पर परिहार विधानसभा चुनाव लड़ा, जहां उन्हें बेहद कम अंतर से हार मिली. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें शिवहर सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन वहां भी जीत नहीं मिली. लगातार दो चुनाव हारने के बावजूद उनकी राजनीतिक सक्रियता बनी रही.

परिवार भी समाजसेवा से जुड़ा

रितु जायसवाल के पति अरुण कुमार पूर्व IAS अधिकारी रह चुके हैं. उन्होंने नौकरी छोड़ समाजसेवा का रास्ता चुना और पटना में जरूरतमंद युवाओं को UPSC की मुफ्त तैयारी कराने लगे. रितु भी लगातार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रही हैं.

हाल ही में शिक्षक भर्ती को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए लाठीचार्ज को रितु जायसवाल ने गलत बताया था. उन्होंने बेरोजगारों और महिलाओं के मुद्दे पर लगातार अपनी आवाज बुलंद रखी है. यही वजह है कि बिहार की राजनीति में उनकी अलग पहचान बनी हुई है.

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BJP में एंट्री से बदल सकते हैं समीकरण

रितु जायसवाल का भाजपा में जाना सिर्फ दल बदल नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार खासकर सीतामढ़ी की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. परिहार और आसपास के इलाकों में उनकी पकड़ को देखते हुए भाजपा को इसका राजनीतिक फायदा मिल सकता है. अब सबकी नजर उनकी आधिकारिक एंट्री पर टिकी है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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