23 दिन तक नाबालिग से दरिंदगी, पहचान मिटाने की कोशिश… तीन दोषियों को अंतिम सांस तक उम्रकैद

नाबालिग का अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म कांड में पॉक्सो के विशेष न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को अंतिम सांस तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनायी है.
– जमुई में पॉक्सो अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, स्पीडी ट्रायल कर 37 पन्नों में सुनाया फैसला
– दिसंबर में सामने आया था मामला, कटिहार से बरामद हुई थी पीड़िताजमुई. नाबालिग का अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म कांड में पॉक्सो के विशेष न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को अंतिम सांस तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. विशेष न्यायाधीश महेश्वर दूबे की अदालत ने कटिहार निवासी तीनों आरोपित मो इमरान उर्फ चांद, मो आफताब अंसारी और मो सद्दाम को अंतिम सांस तक कैद व एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना नहीं भरने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है. 37 पृष्ठों के विस्तृत फैसले में अदालत ने इस कृत्य को अत्यंत जघन्य, अमानवीय और समाज को झकझोरने वाला अपराध करार दिया. इस मामले में सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने मृत्युदंड की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजय कुमार और सत्यजीत कुमार ने आरोपितों के पक्ष में दलीलें पेश कीं. सभी तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने तीनों को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनायी.
पिछले साल सामने आयी थी घटना
घटना 1 दिसंबर 2025 की है, जब जमुई के अलीगंज बाजार से 15 वर्षीय नाबालिग अचानक लापता हो गयी थी. परिजनों द्वारा खोजबीन के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा. करीब 23 दिन बाद 24 दिसंबर को जमुई पुलिस ने कटिहार के एक बंद कमरे से पीड़िता को बरामद किया. उस समय उसकी हालत बेहद गंभीर थी, जिसे देखकर पुलिसकर्मी और मौजूद लोग भी स्तब्ध रह गये. पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि मो इमरान उसे बहला-फुसलाकर कटिहार ले गया, जहां उसे बेहोशी की हालत में रखा गया और लगातार दुष्कर्म किया गया. बाद में उसे मो सद्दाम के हवाले कर दिया गया, जहां भी उसके साथ अत्याचार जारी रहा. पीड़िता के कपड़े फाड़ दिये गये, उसे नए कपड़े पहनाकर उसकी हिंदू पहचान मिटाने की कोशिश की गयी और जबरन प्रतिबंधित मांस खिलाया गया. विरोध करने पर उसे पीटा जाता था. यह अमानवीय अत्याचार लगातार 23 दिनों तक चलता रहा.
फोन कॉल से हुआ मामले का खुलासा
पूरे मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब आरोपितों में से एक ने पीड़िता के मोबाइल से उसकी मां को फोन किया और उसे खोजने से मना किया. इसी कॉल के आधार पर पुलिस को लोकेशन का सुराग मिला. जमुई पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई की और कटिहार पहुंचकर पीड़िता को सुरक्षित बरामद किया. इसके साथ ही तीनों आरोपितों इमरान आलम, आफताब अंसारी और सद्दाम हुसैन को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया. प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पीडी ट्रायल की मांग की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया. 17 जनवरी 2026 को पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया. 22 जनवरी को न्यायालय ने संज्ञान लिया और 27 जनवरी से गवाहों की गवाही शुरू हुई. इस दौरान पीड़िता, उसकी मां, चिकित्सक, पुलिस अधिकारी और स्कूल प्रधानाध्यापक समेत कई अहम गवाहों के बयान दर्ज किये गये. 19 फरवरी से 28 फरवरी तक दोनों पक्षों की बहस चली, जिसके बाद 16 मार्च को अदालत ने तीनों को दोषी ठहराया और 24 मार्च 2026 को सजा सुनायी गयी. नए बीएनएस कानून के तहत इस तरह के अपराध में मृत्युदंड या न्यूनतम 20 वर्ष से लेकर अंतिम सांस तक कारावास का प्रावधान है, इसमें अदालत ने कठोरतम सजा का चयन किया.
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