बरहट . प्रखंड के अति पिछडा क्षेत्र चोरमारा-गुरमहा गांव में वर्षों बाद लोकतंत्र की गूंज तो सुनायी दी, लेकिन विकास की रोशनी आज भी गांव की दहलीज तक नहीं पहुंच सकी है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जिस तरह बिजली पहुंचाने का शोर मचाया गया. ग्रामीणों को लगा कि अब उनके जीवन में भी बदलाव आयेगा. आनन-फानन में गांव में बिजली के पोल तो खड़े कर दिये गये, लेकिन जैसे ही मतदान संपन्न हुआ, पूरी योजना पर मानो ब्रेक लग गया. वहीं चुनाव खत्म होते ही बिजली विभाग की सक्रियता भी ठंडी पड़ गयी. इसका नतीजा यह हुआ कि पूरा गांव आज भी अंधेरे में है. इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है. लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बिजली का काम शुरू कर दिया गया, लेकिन वोट पड़ते ही नीयत व फाइल दोनों ठंडे बस्ते में डाल दी गयी. ग्रामीण मुकेश कोड़ा, सहदेव कोड़ा, महेंद्र कोड़ा और प्रयाग कोड़ा ने बताया कि जब गांव में बिजली के खंभे लगते देखे गय, तो वर्षों बाद उम्मीद जगी थी कि अब रोशनी में बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी और जीवन स्तर में सुधार आयेगा. लेकिन चुनाव खत्म होते ही काम पूरी तरह ठप हो गया. आज हालात यह हैं कि गांव में खड़े बिजली के खंभे सरकारी लापरवाही और अधूरे वादों के खामोश गवाह बनकर खड़े हैं. जबकि इस गांव के मतदान केंद्र पर एक हजार से अधिक मतदाता हैं. इसके बावजूद आज तक यहां बिजली जैसी बुनियादी सुविधा लोगों को नसीब नहीं हो सकी है. रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होती है.
वन विभाग का एनओसी बना बहाना
इस मामले में सहायक विद्युत अभियंता परियोजना अभिषेक राज ने बताया कि गुरमहा और चोरमारा गांव में बिजली के पोल खड़े किये जा चुके हैं. गांव में किसी प्रकार के पेड़-पौधे भी नहीं हैं. लेकिन आगे के कार्य के लिए वन विभाग से पूर्ण अनुमति यानी एनओसी नहीं मिलने के कारण काम बाधित है. उन्होंने कहा कि जैसे ही अनुमति मिलती है, कार्य दोबारा शुरू कर दिया जायेगा.
अब तक कोई आदेश नहीं, रेंजर
वहीं बरहट वन क्षेत्र के रेंजर सुधांशु कुमार ने कहा कि इस संबंध में अब तक उनके विभाग को कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है. आदेश मिलते ही बिजली विभाग को सूचित कर दिया जायेगा.
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