पुस्तकों से लिया सिद्धांत, उसके बाद किया शोध, बच्चों ने खोली समझ की खिड़की

Published by :PANKAJ KUMAR SINGH
Published at :13 Apr 2026 9:48 PM (IST)
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पुस्तकों से लिया सिद्धांत, उसके बाद किया शोध, बच्चों ने खोली समझ की खिड़की

कृत्यानंद मध्य विद्यालय मलयपुर की कक्षाओं में इन दिनों पढ़ाई का तरीका बदल गया है. यहां किताबों से आगे बढ़कर बच्चे खुद प्रयोग कर सीख रहे हैं.

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बरहट. कृत्यानंद मध्य विद्यालय मलयपुर की कक्षाओं में इन दिनों पढ़ाई का तरीका बदल गया है. यहां किताबों से आगे बढ़कर बच्चे खुद प्रयोग कर सीख रहे हैं. इस बदलाव के पीछे हैं शिक्षिका शोभा सिंह है. जिनके नवाचारों ने बच्चों में विज्ञान के प्रति नयी जिज्ञासा जगा दी है. यही वजह है कि स्कूल के छात्र अब जिला से लेकर राज्य स्तर तक विज्ञान प्रदर्शनी में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा चुके हैं.अब आठवीं कक्षा के फसल, उत्पादन व प्रबंधन अध्याय को पढ़ाने के लिए उन्होंने बच्चों से सीधे शोध करवाना शुरू किया है. जैविक और रासायनिक खाद के प्रयोग से फसल उत्पादन पर क्या असर पड़ता है. इसे बच्चों ने खुद करके समझा. साथ ही, इन फसलों के पोषण फायदे और नुकसान के बारे में भी जानकारी हासिल की.

जार में प्रयोग से बच्चों ने गहराई से समझा

इस पहल की शुरुआत एक छोटे से प्रयोग से हुई. शिक्षिका ने तीन पारदर्शी जार में मिट्टी भरकर अलग-अलग स्थितियां तैयार कीं. एक में जैविक खाद दूसरे में रासायनिक खाद और तीसरे में बिना खाद. बच्चों ने इनमें चना और मूंग के बीज बोये और रोजाना उनके विकास का अवलोकन किया.करीब 20 दिनों तक बच्चों ने पौधों की वृद्धि, मिट्टी की गुणवत्ता, जल धारण क्षमता और पत्तियों की संख्या जैसे पहलुओं को नोट किया. इस प्रक्रिया ने उन्हें किताबों की तुलना में कहीं ज्यादा गहराई से समझ दी कि प्राकृतिक और रासायनिक खेती में क्या अंतर है.

स्कूल परिसर में उगी हरी प्रयोगशाला

जार से शुरू हुआ यह प्रयोग अब स्कूल परिसर तक पहुंच चुका है. सातवीं से दसवीं कक्षा तक के सैकड़ों छात्र-छात्राएं छोटे-छोटे क्यारियों में जैविक खेती कर रहे हैं. यहां लाल-हरा साग, धनिया, मूली और भिंडी जैसी सब्जियां उगायी जा रही हैं, जो बच्चों को पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दे रही हैं.

सोशल एक्टिविस्ट ने बढ़ाया हौसला

इस पहल को उस समय नई दिशा मिली जब सोशल एक्टिविस्ट सचिन सचदेवा ने स्कूल का दौरा किया. उन्होंने बच्चों के प्रोजेक्ट को देखा, सवाल पूछे और सराहना की. साथ ही, उन्होंने इस प्रयोग को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए स्कूल में 30×30 का फार्म विकसित करवाने में सहयोग दिया.जिससे बच्चे अब खेत में भी प्रयोग कर रहे हैं.

नवाचार के लिए मिल चुके हैं कई सम्मान

शिक्षिका शोभा सिंह के इन प्रयासों को कई मंचों पर सराहा गया है. उन्हें राजकीय शिक्षक सम्मान, इनोवेशन रिकॉग्निशन अवार्ड, जिलास्तरीय शिक्षक सम्मान डीएम द्वारा और जमुई विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से तीन बार सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान मिल चुका है.

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