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महक रहा दुर्लभ पौधों से सजा बगीचा

Updated at : 08 Jun 2025 9:14 PM (IST)
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महक रहा दुर्लभ पौधों से सजा बगीचा

आपने कई बगीचे देखे होंगे, जहां फल, फूल या सजावटी पौधे होते हैं. लेकिन जमुई जिले के खैरा प्रखंड के भ्रमरपुर भौंड गांव के रहने वाले बुजुर्ग शिवनंदन सिंह ने अपने घर के पास ऐसा बगीचा तैयार किया है, जो बेहद खास है.

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गुलशन कश्यप, जमुई

आपने कई बगीचे देखे होंगे, जहां फल, फूल या सजावटी पौधे होते हैं. लेकिन जमुई जिले के खैरा प्रखंड के भ्रमरपुर भौंड गांव के रहने वाले बुजुर्ग शिवनंदन सिंह ने अपने घर के पास ऐसा बगीचा तैयार किया है, जो बेहद खास है. इस बगीचे में उन्होंने देशभर से लाकर दुर्लभ प्रजातियों के औषधीय और धार्मिक महत्व वाले पौधे लगाये हैं. उनका कहना है कि उन्होंने यह बगीचा लोगों को प्रेरित करने और प्रकृति से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया है. शिवनंदन सिंह ने बताया कि उनके बगीचे में ””””गरम मसाला”””” का पौधा भी है, जो स्वाद और सुगंध के लिहाज से बेहद खास है. इसकी केवल एक पत्ती किसी भी सब्जी को स्वादिष्ट बना देती है और अन्य मसालों की जरूरत नहीं पड़ती. उन्होंने बताया कि इस पौधे की खुशबू भूख को भी बढ़ा देती है.

कई तरह के पौधों से सजा है यह बगीचा

उनके बगीचे में लौंग, इलायची, सेव, वाटर एप्पल, चीकू, रुद्राक्ष, नवग्रह, चेरी, कल्पवृक्ष, कीवी, ड्रैगन फ्रूट, मौसमी, सिंदूर सहित दर्जनों पौधे हैं. इसके अलावा आम, जामुन, बेल, पत्तरज जैसे पारंपरिक और धार्मिक पौधे भी लगाये गये हैं. खास बात यह है कि आम की दो दर्जन से अधिक किस्में उनके पास मौजूद हैं, जिनमें कुछ साल में एक से ज्यादा बार फल भी देते हैं.शिवनंदन सिंह ने बताया कि जब चंद्रशेखर भारत के प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने उनके हरियाणा स्थित आश्रम पर एक सुंदर बगीचा देखा था. उसी बगीचे से उन्हें प्रेरणा मिली. इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे देश के विभिन्न हिस्सों से दुर्लभ पौधों को लाकर अपने घर के पास का यह बगीचा विकसित किया.

बगीचे के पीछे करते रहते हैं खूब मेहनत

शिवनंदन सिंह ने बताया कि उन्होंने दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों से वे पौधे लेकर आये. अभी हाल ही में उन्होंने ””””कल्पवृक्ष”””” का पौधा भी लगाया है. शिवनंदन सिंह प्रतिदिन सुबह 1 से 2 घंटे बगीचे में बिताते हैं और पौधों की देखरेख करते हैं. उनका कहना है कि यह बगीचा सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक जागरूकता अभियान है. वे चाहते हैं कि लोग इन पौधों के महत्व को समझें और प्रकृति के साथ जुड़ें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANKAJ KUMAR SINGH

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