आज से गूंजेंगे दुर्गा सप्तशती के श्लोक

जिलेभर के मंदिरों व घरों में सोमवार को कलश स्थापना के साथ ही शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो जायेगी.
जमुई . जिलेभर के मंदिरों व घरों में सोमवार को कलश स्थापना के साथ ही शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो जायेगी. इस दौरान श्रद्धालु नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करेंगे. इसके लिए मंदिर से घरों तक पूजा की तैयारी लगभग पूरी हो गयी है. शहर के बड़ी दुर्गा मंदिर पंचमंदिर, गांधी पुस्तकालय के समीप छोटी दुर्गा मंदिर, वीर कुंवर सिंह सेवा समिति सहित अन्य पूजा पंडालों में विधिवत कलश स्थापना कर पूजा-अर्चना की जायेगी. छोटी दुर्गा मंदिर के पुरोहित पप्पू पांडेय तथा शिरोमणि झा ने बताया कि शारदीय नवरात्रि सोमवार 22 सितंबर से शुरू होकर दो अक्तूबर तक रहेगी. उन्होंने बताया कि इस बार की नवरात्रि पूरे दस दिनों की होगी. नवरात्र के पहले दिन शुक्ल योग का संयोग बन रहा है, जो शुभ फलदायक रहेगा. पंडित शिरोमणि झा ने बताया कि साल में चार नवरात्र आते हैं. इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्र महत्वपूर्ण है. जबकि माघ और आषाढ़ के नवरात्र गुप्त कहे जाते हैं. उन्होंने बताया कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विधान है. इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश और मातृगण का निवास माना जाता है. उन्होंने बताया कि सुबह शुक्ल योग और शाम को ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है. उन्होंने बताया कि चतुर्थी तिथि दो दिन होने के कारण नवरात्र इस बार 10 दिनों का होगा. नवरात्र में दुर्गा सप्तशती, दुर्गा स्तोत्र, दुर्गा चालीसा और रामचरितमानस का पाठ करने का विशेष महत्व है.
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि में घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:09 से सुबह 8:07 तक. इस दौरान घट स्थापना करने से स्थिर सुख, समृद्धि और धन लाभ मिलने के योगायोग है और अगर इस समय में न कर सके तो अभिजीत मुहूर्त दिन के 11:36 से दोपहर 12:24 है. इस मुहूर्त में भी श्रद्धालु घट स्थापना कर सकते हैं.
नवरात्र को लेकर मंदिरों में विशेष तैयारी
नवरात्र को लेकर जिलेभर में तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. पर्व के दौरान होने वाली शक्ति स्वरूपा देवियो की पूजा को लेकर सभी देवी मंदिरों में साज सज्जा व विद्युत रोशनी की तैयारी पूरी की गई है. भक्त बाजारों से नारियल, चुनरी, मिट्टी के बर्तन व माता रानी के शृंगार का समान खरीदते नजर आये.
शैलपुत्री की पूजा से शुरु होगा नवरात्र का व्रत
शारदीय नवरात्रि में भी इस बार नौ दिनों तक नवदुर्गा के नौ रूपों की पूजा होगी. पंडित श्रीदेव पांडेय ने बताया कि पहले दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के प्रथम स्वरुप देवी शैलपुत्री की पूजा अर्चना, घटस्थापना व दुर्गासप्तशती के पाठ से प्रारंभ होगा. इस दौरान साधक नौ दिनों तक अनुष्ठान में लीन रहेंगे.
हाथी पर आगमन व प्रस्थान
इस वर्ष शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां दुर्गा का आगमन व प्रस्थान गज यानी हाथी पर होगा, जो सुख-समृद्धि व ऐश्वर्य का प्रतीक है. पंडित श्रीदेव पांडेय ने बताया कि मां का हाथी पर आना संसार के लिए शुभ संकेत है. मां दुर्गा के आगमन व प्रस्थान की सवारी लोगों के जीवन में शुभ अशुभ का प्रभाव डालता है. माता रानी अपने भक्तों धनधान्य व समृद्धि प्रदान करेंगी.
शारदीय नवरात्र 2025 पूजन तिथियां
22 सितंबर – मां शैलपुत्री पूजा
23 सितंबर – मां ब्रह्मचारिणी पूजा24 सितंबर – मां चंद्रघंटा पूजा26 सितंबर – मां कूष्मांडा पूजा
27 सितंबर – मां स्कंदमाता पूजा28 सितंबर – मां कात्यायनी पूजा
29 सितंबर – मां कालरात्रि पूजा30 सितंबर – मां महागौरी पूजा
01 अक्टूबर – मां सिद्धिदात्री पूजा02 अक्टूबर – विजयादशमी(दशहरा)
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