पारंपरिक फसलों के साथ औषधीय पौधों की खेती करें किसान

राज्य को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में पहल करते हुए राज्य औषधीय पादप बोर्ड बिहार की ओर से औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया.
बरहट. राज्य को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में पहल करते हुए राज्य औषधीय पादप बोर्ड बिहार की ओर से औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आये किसानों को औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती उनकी आर्थिक उपयोगिता और पर्यावरणीय महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी तेजस जायसवाल उपस्थित रहे. उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि औषधीय पौधों की खेती आने वाले समय में किसानों के लिये आय का एक मजबूत स्रोत बन सकती है. इस पहल का उद्देश्य किसानों के बीच औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती को लोकप्रिय बनाना और उन्हें टिकाऊ कृषि प्रणाली से जोड़ना है.उन्होंने कहा कि आज के दौर में खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है. किसानों को ऐसे विकल्पों की तलाश करनी होगी जो कम लागत में अधिक लाभ दे सकें. औषधीय पौधों की खेती इसी दिशा में एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है.
सात जिलों में चलेंगी कार्यशालाओं की शृंखला
वन प्रमंडल पदाधिकारी ने जानकारी दी कि राज्य औषधीय पादप बोर्ड द्वारा पूरे बिहार में प्रशिक्षण कार्यक्रमों की एक शृंखला शुरू की गयी है. पहले चरण में राज्य के सात जिलों में इस प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित की जायेंगी. इस शृंखला की शुरुआत जमुई से की गयी है. इसके बाद 16 मार्च को बेगूसराय तथा 17 मार्च को बेतिया में इसी प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे. इसके बाद अन्य जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा.
क्षेत्र में मौजूद हैं 150 से अधिक औषधीय पौधों की प्रजातियां
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 150 प्रकार की औषधीय पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं. इन पौधों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में लंबे समय से किया जाता रहा है और इनका दैनिक जीवन में भी विशेष महत्व है. विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि यदि इन पौधों की वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाये तो यह न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी.
कम कीमत पर मिलेगा पौधा
कार्यक्रम में वन विभाग की ओर से चलाई जा रही वृक्षारोपण योजना की भी जानकारी दी गयी. अधिकारियों ने बताया कि किसानों को मात्र 10 रुपये प्रति पौधा की लागत पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इसके साथ ही एक विशेष प्रोत्साहन योजना भी लागू की गयी है. यदि तीन वर्षों के बाद लगाए गए पौधों में से कम से कम 50 प्रतिशत पौधे जीवित रहते हैं, तो किसानों को अतिरिक्त 70 प्रतिशत पौधे रख-रखाव सहायता के रूप में प्रदान किए जायेंगे. कार्यक्रम के दौरान किसान योगेंद्र पंडित और रमाकांत मिश्रा सहित कई अन्य किसान भी उपस्थित रहे. सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
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