बेड पर गद्दा नहीं, उपकरणों पर जमी धूल, नुमर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में बुनियादी सुविधाएं गायब

Published by :PANKAJ KUMAR SINGH
Published at :28 Apr 2026 6:24 PM (IST)
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बेड पर गद्दा नहीं, उपकरणों पर जमी धूल, नुमर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में बुनियादी सुविधाएं गायब

प्रखंड के नुमर पंचायत में सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना जमीनी हकीकत में दम तोड़ती नजर आ रही है.

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बरहट. प्रखंड के नुमर पंचायत में सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना जमीनी हकीकत में दम तोड़ती नजर आ रही है. ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से खोले गए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थिति ठीक नहीं है. यहां इलाज से ज्यादा अव्यवस्था और लापरवाही का देखने को मिलता है. सबसे चिंताजनक स्थिति गर्भवती महिलाओं की देखभाल को लेकर है. विभाग द्वारा भेजी गई प्रसव जांच मेज महीनों से धूल फांक रही है, जिससे यहां सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था महज कागजों तक सीमित है. ऐसे में जरूरतमंद महिलाओं को मजबूरन अन्य जगहों का रुख करना पड़ता है. वहीं अस्पताल के जनरल वार्ड की हालत भी किसी से छिपी नहीं है. मरीजों के लिए बनाए गए बेड पर न तो गद्दा है और न ही बेड शीट.

अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं, रखरखाव व उपयोग में हो रही लापरवाही

यह स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े करती है जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है. ओपीडी कक्ष में टेबल पर जमी धूल यह संकेत देती है कि यहां नियमित रूप से मरीजों का इलाज तक नहीं हो रहा. वहीं वजन मापने वाली मशीन जमीन पर बिखरी पड़ी है, जबकि अन्य चिकित्सा उपकरण भी इधर-उधर पड़े हुए नजर आते हैं. इससे साफ है कि अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि उनके रखरखाव और उपयोग में भारी लापरवाही है. करीब सात हजार से अधिक मतदाता वाले नुमर पंचायत के लिए यह हेल्थ सेंटर ही एकमात्र सहारा है. सरकार की ओर से यहां एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और दो एएनएम की तैनाती की गयी है, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप पड़ी हैं. गौरतलब है कि भीषण गर्मी और संभावित बीमारियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया है. बावजूद इसके, नुमर पंचायत का यह हेल्थ सेंटर इन निर्देशों को ठेंगा दिखाता नजर आ रहा है. यहां न तो साफ-सफाई का ध्यान रखा जा रहा है और न ही मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं.

ड्यूटी पर तैनात सीएचओ ने बताया कि उन्होंने करीब एक महीने पहले ही यहां पदभार संभाला है. उनके अनुसार अस्पताल अभी पूरी तरह से रनिंग नहीं हो पाया है. जिसके कारण मरीजों की संख्या कम है. उन्होंने यह भी कहा कि धीरे-धीरे व्यवस्था को दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है.

अस्पताल तो रोजाना खुलता है, लेकिन मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का काफी अभाव है. जिसको लेकर जिला स्तरीय बैठक में भी सुविधा विस्तार को लेकर चर्चा की गयी थी. लेकिन अभी तक कोई बदलाव नहीं देखने को मिल रहा है. अस्पताल की बदहाल स्थिति के कारण यहां मरीज आने से कतराते हैं, जिससे मरीजों की संख्या भी बेहद कम है.

कुमारी गुड़िया, जिला परिषद सदस्य

इस संबंध में पर प्रखंड प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने कहा कि उन्हें इस स्थिति की जानकारी नहीं है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही अस्पताल का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है तो आखिर जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही क्यों सामने आ रही है. क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी दावों तक ही सीमित रहेंगे, या फिर वास्तव में इस बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे.

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