एक दशक पूर्व के नक्सल कांड का वारंटी नक्सली जानकी यादव गिरफ्तार

चरकापत्थर पुलिस व सी समवाय एसएसबी के संयुक्त कार्रवाई में चरकापत्थर थाना क्षेत्र के दूधनियां गांव से नक्सली जानकी यादव को गिरफ्तार किया गया.
सोनो. चरकापत्थर पुलिस व सी समवाय एसएसबी के संयुक्त कार्रवाई में चरकापत्थर थाना क्षेत्र के दूधनियां गांव से नक्सली जानकी यादव को गिरफ्तार किया गया. जानकी चरकापत्थर थाना के एक दशक पूर्व के एक नक्सल कांड संख्या 78/14 का वांछित अभियुक्त है. जानकारी देते हुए चरकापत्थर थानाध्यक्ष रंजीत कुमार ने बताया कि पूर्व में लगभग आधा दर्जन नक्सल कांडों में जानकी यादव का नाम आया था. चरकापत्थर थाने में उस पर नक्सल घटना को लेकर पांच प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जबकि एक प्राथमिकी खैरा थाने में दर्ज हुई थी. जानकी इन कांडों में कई बार जेल भी जा चुका है. दो वर्ष पूर्व जेल जाने के बाद वह बेल पर बाहर आया था. जेल से बाहर आने के बाद वह संगठन के गतिविधि से दूर अन्य प्रदेश चला गया था. इस बीच कानूनी प्रक्रिया पूरा न करने पर उसका बेल टूट गया और कोर्ट से उस पर वारंट जारी हुआ था. चूंकि वह अन्य जगह रह रहा था, इसलिए पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सका था. सुरक्षाकर्मी व पुलिस को बीते गुरुवार गुप्त सूचना मिली कि जानकी घर आया हुआ है. सूचना मिलते ही एसएसबी जवानों के साथ पुलिस ने दुधनियां स्थित उसके घर पर छापे मारी कर जानकी को गिरफ्तार कर लिया.
क्या है नक्सल कांड 78/14
चरकापत्थर थाना क्षेत्र के नक्सल प्रभावित इलाका रुझनियां गांव से हड़बड़ला नदी तक सड़क निर्माण के दौरान जब मिट्टी भराई का कार्य चल रहा था, तभी 10 मई 2014 की दोपहर में 20-25 की संख्या में पुलिस वर्दी पहने हथियार से लैस नक्सलियों ने मौके पर पहुंचकर न सिर्फ कार्य को रुकवा दिया था, बल्कि जेसीबी चालक भालसुमिया निवासी कमाल मियां को जेसीबी से उतार कर जेसीबी में आग लगा दी. नक्सलियों ने यह कार्रवाई लेवी नहीं देने पर की थी. चालक कमाल मियां के पिता खलील मियां ने मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज करायी थी, जिसमें नक्सली कमांडर चिराग दा, बीरबल दा, दिनेश पंडित, सुरंग यादव, परवेज दा, सिद्धू कोड़ा, दरोगी यादव, लाल मोहन यादव, बेगम मरांडी, राजू यादव के अलावे जानकी यादव का भी नाम शामिल था.
बदले की भावना से नक्सली संगठन में शामिल हुआ था जानकी
दुधनियां गांव में नक्सल गतिविधि का पदार्पण आपसी रंजिश और जमीन विवाद था. इसी गांव का हार्डकोर नक्सली दरोगी यादव ने जमीन के विवाद को लेकर जानकी यादव के बड़े भाई की हत्या कर दी थी. जानकी दरोगी यादव का चचेरा भाई था. भाई की हत्या को लेकर बदले की आग में जलता जानकी यादव आखिरकार नक्सल संगठन की शरण में चला गया था. संगठन में रहते हुए एक दशक पूर्व वह कई नक्सल घटनाओं में शामिल हुआ था. बाद में वह जेल भी गया और जेल से बाहर आकर नक्सल गतिविधि से दूर होकर अन्य प्रदेश में रोजी रोटी कमाने लगा.
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